उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार में महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू गिरधारी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है। मंत्री ने पति पर मारपीट करने, जातिसूचक शब्दों से अपमानित करने, पहली शादी छिपाकर विवाह करने, दूसरी महिलाओं के साथ कथित संबंध रखने, जालसाजी और उनकी तथा उनके बच्चों की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
रेखा आर्य ने गुरुवार को फेसबुक पर एक वीडियो साझा किया, जिसमें वह भावुक होकर अपने साथ हुई कथित घटनाओं के बारे में बताती नजर आईं। उन्होंने अपने पति की तस्वीर के साथ दो ऑडियो क्लिप भी साझा कीं। मंत्री का कहना है कि एक ऑडियो में उनके पति एक महिला से बातचीत के दौरान कथित तौर पर उनकी हत्या की साजिश रचते सुनाई देते हैं। हालांकि, ऑडियो की प्रामाणिकता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
वीडियो पोस्ट करने के कुछ घंटे बाद रेखा आर्य को देहरादून के कृष्णा मेडिकल सेंटर में भर्ती कराया गया, जहां उनकी जांच की जा रही थी।

‘मैं अंदर तक हिल गई हूं’, वीडियो में छलका मंत्री का दर्द

रेखा आर्य ने वीडियो में कहा कि ऑडियो सुनने के बाद वह अंदर तक हिल गई हैं। उनके मुताबिक, इस रिकॉर्डिंग ने उनके वैवाहिक रिश्ते पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने भावुक होकर सवाल किया कि ईमानदारी और सच्चाई के साथ जीवन बिताने का क्या यही परिणाम मिलता है। मंत्री ने कहा कि ऑडियो सुनने के बाद उन्हें अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज कराने का फैसला करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन्होंने बेहद पीड़ा के साथ लिया है।
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रेखा आर्य ने कहा, “महिला चाहे सामान्य हो या कोई बड़ी हस्ती, उसे घरेलू अत्याचार बर्दाश्त नहीं करना चाहिए। उसे इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।” उन्होंने यह भी कहा कि वह संविधान को साक्षी मानकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन करती आई हैं और आगे भी करती रहेंगी। उन्होंने अपने मायके के परिवार के सहयोग का भी उल्लेख किया और कहा कि इस दर्द के बीच भी वह अपने कर्तव्य को नहीं भूली हैं।

ऑडियो क्लिप के आधार पर हत्या की साजिश का आरोप

रेखा आर्य की शिकायत के मुताबिक, उन्हें हाल ही में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग मिली। इसमें उनके पति गिरधारी लाल साहू एक महिला से बातचीत करते हुए कथित तौर पर उन्हें मारने की साजिश रचते सुनाई देते हैं। शिकायत में कहा गया है कि मंत्री और उनके नाबालिग बच्चों की जान को लगातार खतरा है और आशंका है कि आरोपी कभी भी कोई गंभीर घटना अंजाम दे सकता है। मंत्री ने पुलिस से अपनी और अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा मामले में उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। इस मामले में ऑडियो की फॉरेंसिक जांच महत्वपूर्ण होगी, ताकि रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें कथित बातचीत की वास्तविकता का पता लगाया जा सके।

2004 में हुई थी शादी, पति पर पहली शादी छिपाने का आरोप

रेखा आर्य अल्मोड़ा जिले की सोमेश्वर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक हैं और पुष्कर सिंह धामी मंत्रिमंडल में महिला एवं बाल विकास विभाग संभालती हैं। पुलिस को दी गई शिकायत के अनुसार, रेखा आर्यऔर गिरधारी लाल साहू की शादी 6 जुलाई 2004 को उत्तर प्रदेश के बरेली में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। मंत्री ने आरोप लगाया कि शादी के समय उनके पति ने खुद को अविवाहित बताया था। हालांकि, कुछ साल बाद उन्हें पता चला कि गिरधारी लाल साहू की पहले भी शादी हो चुकी थी और उस विवाह से उनके बच्चे भी थे। शिकायत में रेखा आर्य ने कहा कि उस समय तक उनके भी बच्चे हो चुके थे। परिवार की सलाह और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने इस मामले पर चुप रहना उचित समझा। गिरधारी लाल साहू को पप्पू गिरधारी के नाम से भी जाना जाता है। वह उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के जोगी नवादा के निवासी हैं।

दूसरी महिलाओं से संबंधों का विरोध करने पर मारपीट का आरोप

मंत्री ने अपनी शिकायत में कहा है कि हाल के दिनों में उनके पति का व्यवहार बदल गया था और उन्हें दूसरी महिलाओं के साथ उनके कथित संबंधों की जानकारी मिली। रेखा आर्य के मुताबिक, जब उन्होंने इसका विरोध किया तो उनके पति ने शुरुआत में अपनी गलती स्वीकार करते हुए मौखिक और लिखित रूप से माफी मांगी। लेकिन, शिकायत के अनुसार, इसके बावजूद उनके व्यवहार में सुधार नहीं हुआ। मंत्री ने आरोप लगाया कि विरोध करने पर उनके साथ मारपीट और गाली-गलौज की गई तथा जान से मारने की धमकी दी गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके सरकारी आवास पर कर्मचारियों के सामने कई बार जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करके उन्हें अपमानित किया गया।

जातिसूचक शब्दों के इस्तेमाल का आरोप, एससी-एसटी एक्ट भी लगाया गया

रेखा आर्य ने शिकायत में कहा है कि वह उत्तराखंड में अधिसूचित अनुसूचित जाति से संबंध रखती हैं। उनके आरोप के मुताबिक, गिरधारी लाल साहू अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति से संबंधित नहीं हैं और उन्हें शादी के समय से ही उनकी जाति की जानकारी थी। मंत्री का आरोप है कि उनके पति ने सरकारी आवास पर कर्मचारियों के सामने जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उन्हें अपमानित किया। इसी शिकायत के आधार पर एफआईआर में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं। इन आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया के दौरान होनी है।

कंपनी के निदेशक पद से हटाने के लिए हस्ताक्षर जाली बनाने का आरोप

रेखा आर्य ने अपने पति पर दस्तावेजों में जालसाजी करने का भी आरोप लगाया है। शिकायत के मुताबिक, गिरधारी लाल साहू ने कुछ कंपनियों में रेखा आर्य को निदेशक पद से हटाने के लिए कथित तौर पर उनके हस्ताक्षर जाली तरीके से इस्तेमाल किए और फर्जी दस्तावेज तैयार किए। मंत्री का कहना है कि उन्होंने न तो ऐसे दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए और न ही निदेशक पद से इस्तीफा दिया। इसके बावजूद दस्तावेजों में उन्हें पद से हटाया हुआ दिखाया गया।
पुलिस को अब इस आरोप की जांच के दौरान संबंधित दस्तावेजों, हस्ताक्षरों और कंपनियों के रिकॉर्ड की जांच करनी होगी।

देहरादून के कैंट थाने में एफआईआर, कई धाराओं में मामला दर्ज

रेखा आर्य की शिकायत पर देहरादून के कैंटोनमेंट थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने गुरुवार शाम करीब 7:25 बजे मामला दर्ज किया। एफआईआर में भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक साजिश, चोट पहुंचाने, धोखाधड़ी, जालसाजी, द्विविवाह, पति द्वारा क्रूरता, अपमान और आपराधिक धमकी से संबंधित प्रावधान शामिल किए गए हैं। इसके साथ एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराएं भी लगाई गई हैं।
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कांग्रेस ने धामी सरकार को घेरा

इस मामले पर कांग्रेस ने भाजपा सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि यदि राज्य की एक मंत्री खुद अपने पति से जान का खतरा होने की बात कह रही हैं और पुलिस में शिकायत दर्ज करा रही हैं, तो यह सरकार के लिए शर्मनाक स्थिति है। उन्होंने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से सवाल किया कि रेखा आर्य की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाए गए हैं और उनकी शिकायत पर क्या कार्रवाई की गई है। कांग्रेस प्रवक्ता ने मामले की निष्पक्ष जांच, ऑडियो रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जांच और आरोप साबित होने पर कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि सरकार की जिम्मेदारी है।