क्या राहुल गाँधी पप्पू हैं? क्या अमित शाह ही मोदी जी के वारिस हैं? रामलीला मैदान में गरजने के बाद फिर ग़ायब तो नहीं हो जाएँगे राहुल गाँधी?
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।

























