विपक्षी नेता तय क्यों नहीं कर पा रहे हैं कि उन्हें अयोध्या जाना चाहिए या नहीं? क्या इसलिए ये कि ये धार्मिक कम चुनावी इवेंट ज़्यादा है? क्या उनकी उलझन ये है कि जाएं या न जाएं बीजेपी उसको मुद्दा बनाएगी? ऐसे में उनके सामने रास्ता क्या है?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























