सरकार मज़दूरों के मामले में लापरवाही के कीर्तिमान रच रही है। रेलवे उनसे किराया माँग रहा है और पुलिस उन पर लाठियाँ चमका रही है। वे अपने पैसों से चंदा करके परमिट लेकर भी घरों तक लौट नहीं पा रहे हैं और न ही सरकार उनके खाने पीने की सुध ले रही है। सर्वत्र फैले इस हाहाकार की मीमांसा कर रहे हैं शीतल पी सिंह।
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