उत्तर भारत में गेहूँ काटने के लिए हार्वेस्टर चलाने वाले पंजाब के टेक्नीशियन कोरोना के बाद लॉकडाउन करने के कारण नहीं आ पा रहे हैं। बिहार के सासाराम के किसान हज़ारों रुपये खर्चकर उन्हें लेकर भी आए तो उसी प्रशासन ने उन्हें क्वरेंटाइन के लिए बंद कर लिया जिसने लाने की अनुमति दी थी। किसानों ने शीतल पी सिंह को इस बाबत सवालों के जवाब में जानकारी दी।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।





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