भारतीय मीडिया के लिए इमरान ख़ान तो ख़बर हैं, लेकिन भारत ही ख़बर नहीं है। मंदी की वजह से देहातों में दुख पसर रहा है, पर ऐसी ख़बरें पाँच फ़ीसदी लोगों के लिए छपने वाली अंग्रेज़ी में छपती हैं। देखिए शीतल के सवाल में क्या है गाँवों का हाल।
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