पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगई ने संविधान के मूल ढांचे में फेरबदल न करने के सिद्धांत पर सवाल उठा दिया है। न्यायाधीश के तौर पर इसी सिद्धांत का हवाला देनेवाले गोगई क्यों बदल गए? इससे पहले उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भी ऐसे ही विचार रख चुके हैं। यह सवाल पहली बार नहीं उठा है, लेकिन सवाल यह है कि इस वक्त यह बात उठाने का अर्थ क्या है?
लेखक सीएनबीसी आवाज़ के पूर्व संपादक हैं, आर्थिक मामलाों के विशेषज्ञ हैं और समसामयिक विषयों पर लिखते रहते हैं।













.jpg&w=3840&q=75)










