संबित पात्रा की कंपनी बिना लायसेंस के माइक्रो फायनेंसिंग करती है और इस कंपनी ने 2016 में क़रीब बासठ लाख रुपये कैश पाँच सौ और हज़ार के नोट जमा कराये थे । साकेत गोखले नामक एक एक्टिविस्ट वकील ने उन पर यह आरोप लगाया है कि संबित इस पैसे का स्त्रोत बताएँ और यह बताएँ कि 2019 के चुनाव के एफीडेविट में उन्होंने यह जानकारी क्यों छिपाई , सुनिये देखिये शीतल पी सिंह के सवाल
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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