क्या काँग्रेस का घोषणापत्र चुनाव में कोई नरैटिव बना सकेगा? क्या उससे पार्टी और कार्यकर्ताओं पाँच न्याय और पचीस गारंटियों को मतदाताओं तक ले जा पाएंगे? वरिष्ठ पत्रकार विनोद शर्मा से डॉ. मुकेश कुमार की बातचीत-
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