शाम, आप घर की बैठक में हैं और देश दुनिया का हाल जानने के लिए टीवी खोल लिया और उस पर ख़बरों की जगह दंगल देख रहे हैं तो समझ लीजिए कि आपके बुद्धि विवेक का आपके ही ख़र्चे पर चीरहरण कर लिया गया है। टीवी आपमें ख़बर की जगह मुसलमानों और पाकिस्तान के बारे में सिर्फ़ और सिर्फ़ नफ़रत ठूँसने का अड्डा है। वह आपको जाहिल और जंगली बना रहा है आपको इतिहास ज्ञान-विज्ञान समाज और सूचना सबसे वंचित कर रहा है सबमें मिलावट कर रहा है वह आपको बदल रहा है बचिये, शीतल पी सिंह को सुनिये।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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