करौली (राजस्थान)में प्रशासन और पुजारी के परिवार में तालमेल बन गया है और परिवार शवदाह के लिये तैयार है । मीडिया और सोशल मीडिया पर एक अभियान चला कर लिबरल ,डेमोक्रेटिक ,बुद्धिजीवियों और विपक्ष को लांछित किया जा रहा था कि वे करौली की उपेक्षा कर रहे थे । सच इससे अलग था , कैसे ? यह बता रहे हैं शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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