यूपी में क़ानून व्यवस्था बदहाल है , जाति व्यवस्था के कोढ़ से कराहते समाज में मुख्यमंत्री की जाति के ज़्यादातर लोगों को थाने देने का प्रचलन है । यह तो पता नहीं कि इससे क्या सुधार होता है पर यह ज़रूर साबित है कि इससे अत्याचार बढ़ता है । शीतल पी सिंह की रिपोर्ट
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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