पूरा दिन राजनीति में बीता और हज़ार बसें प्रवासी मज़दूरों को उनके घर पहुँचाने की प्रतीक्षा में उत्तर प्रदेश की सीमा पर धूप खाती रहीं । बीजेपी दिन भर यह साबित करने में लगी रही कि बसों की लिस्ट में कुछ नं थ्री व्हीलर और स्कूटर आदि के थे जबकि कांग्रेस बसों की क़तार के वीडियो दिखाती रही । प्रशासन मीडिया से छिपता रहा और दिन बीत गया! शीतल के सवाल
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।














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