हज़ार बसें यूपी की सीमा पर दो दिन ख़ाली खड़ी रह करके अब वापस लौट गईं । उत्तर प्रदेश सरकार ने कोई स्पष्टीकरण न दिया कि उसने खुद अपने उस आदेश का अनुपालन क्यों नहीं किया जिसमें इन बसों को नोएडा और ग़ाज़ियाबाद से प्रवासी मज़दूरों के घरों तक चलवाना था । उसकी तरफ़ से टीवी मीडिया के कुछ हिस्सों में इन बसों की लिस्ट में पाई गई कुछ टाइप इत्यादि की ग़लतियों पर ही ध्यान केंद्रित कराया जाता रहा । इसका जवाब किसी ने न दिया कि जिन 879 बसों को ठीक करार दिया गया था उन्हें भी स्तेमाल क्यों न किया गया? शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।







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