दो मुस्लिम युवकों के अपहरण और उनकी हत्या के गंभीर आरोपों के बाद क्या बजरंग दल को एक सामाजिक या धार्मिक संगठन माना जा सकता है? क्या उसकी हिंसक और आतंकी गतिविधियों के मद्देनज़र प्रतिबंध नहीं लगना चाहिए? क्या उसके कार्यकर्ता समाज में टकराव की स्थितियाँ निर्मित नहीं कर रहे, सांप्रदायिक विभाजन को बढ़ावा नहीं दे रहे?
लेखक सत्यहिंदी के संपादक हैं। वह लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी लिबरल एंड क्रिएटिव आर्ट्स के पूर्व डीन हैं। पत्रकार, टीवी एंकर, लेखक, कवि और अनुवादक के तौर पर रचनात्मक लेखन कार्य करते रहे हैं।


























