हम पीछे की ओर क़दमताल करते लग रहे हैं । धीरे धीरे लोकतंत्र की चूलें ढीली हो रही हैं और हम तिस पर भी तालियाँ बजा रहे हैं । अजब वक्त है कि जब पूरा समाज कालिदास हो गया है जिस पेड़ पर बैठा है उसी को काट कर खुश है । हम पुलिस को नागरिकों की हत्या करने का हक़ कैसे दे सकते हैं ? सुनिये रिटायर्ड IPS अफ़सर वी एन राय जी को
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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