कई लोग मानते हैं कि जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने जब विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए, उसके बाद राज्य में जनमतसंग्रह का मुद्दा उठाने की ज़रूरत ही नहीं थी।
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कई लोग मानते हैं कि जम्मू-कश्मीर के शासक महाराजा हरि सिंह ने जब विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए, उसके बाद राज्य में जनमतसंग्रह का मुद्दा उठाने की ज़रूरत ही नहीं थी।