सुदर्शन टीवी और उसके मालिक/संपादक चव्हाणके पहली बार कड़ी न्यायिक स्क्रुटिनी के सामने आ पड़े हैं। संयोग से वह सुप्रीम कोर्ट में एक ऐसी बेंच के सामने हैं जो प्रेस की आज़ादी और नागरिक की आज़ादी के सवाल पर बेहद तर्कसंगत रवैये के लिये विख्यात है। हाईकोर्ट से तो चव्हाणके केंद्र सरकार की खुली मदद के चलते बच निकले थे, विश्लेषण कर रहे हैं शीतल पी सिंह।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।
















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