संयुक्त राष्ट्र की मानवाधिकार मामलों की इकाई द्वारा भारत के सुप्रीम कोर्ट में सीएए के मामले पर पक्षकार बनने के लिए दरखास्त डालना असाधारण मामला है। भारत के लिए तो यह पहली बार है। ओआईसी, अमेरिकी मानवाधिकार आयोग, ब्रिटिश सरकार और ईरान सरकार के बाद ख़ुद संयुक्त राष्ट्र का सीएए के विरोध में इस हद तक सामने आना हमारे विदेश मंत्रालय के लिए असंभव जैसी चुनौती है। देखिए शीतल के सवाल।
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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