इंग्लैंड के बाद अमरीका ने भी फाइजर की वैक्सीन को हाँ कह दिया है और भारत में भी हाँ कहने की प्रक्रिया शुरू हो गई है । यूरोप के दूसरे देश भी क़तार में हैं । खाड़ी के देशों में भी हलचल तेज़ है । रूस पहले ही अपनी वैक्सीन लेकर बाज़ार में है और चीन भी ज़्यादा पीछे नहीं । 2021 कोरोना वैक्सीन का वर्ष होने जा रहा है पर क्या दुनियाँ के ग़रीब लोग उस गिनती में हैं जिन तक वैक्सीन पहुँचनी है ? पूछ रहे हैं शीतल पी सिंह
1984 से अमर उजाला, चौथी दुनिया, इंडिया टुडे, समय सूत्रधार, स्वतंत्र भारत, दैनिक जागरण आदि में 1993 तक लगातार रिपोर्टिंग की। इसके बाद पारिवारिक व्यवसाय में क़रीब दो दशक गुज़ारने के बाद पत्रकारिता में पुनर्वापसी को प्रयासरत। बीच में 2010-11 में 'समकाल' पाक्षिक समाचार पत्रिका का क़रीब एक वर्ष प्रकाशन किया ।













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