पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बंगाल बीजेपी ने अपना नारा बदल लिया है। मोदी ने बंगाल के मतदाताओं को लिखे विशेष पत्र में जय श्रीराम की जगह जय मां काली का जिक्र किया है। राज्य में जल्द ही चुनाव होने वाले हैं।
पीएम मोदी ने बंगाल के मतदाताओं को पत्र लिखा
प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बंगाल के मतदाताओं को लिखे एक पत्र में देवी काली का आह्वान किया है और उनसे राज्य की सेवा करने के लिए एक अवसर मांगा है। प्रधानमंत्री का यह संदेश राज्य में चुनावी बिगुल बजने से कुछ दिन पहले आया है। बीजेपी ने मोदी के इस पत्र को घर-घर पहुंचाने का काम शुरू कर दिया है।
रणनीतिक बदलाव: राम से काली तक
बंगाल भाजपा द्वारा मीडिया के लिए जारी किए गए बांग्ला भाषा के इस पत्र में "जय माँ काली" का इस्तेमाल भाजपा की बंगाल रणनीति में एक बड़े बदलाव का संकेत देता है। अब तक भाजपा का संदेश मुख्य रूप से "राम" पर केंद्रित रहता था। पुरानी पहचान- "जय श्रीराम" का नारा दशकों से भाजपा की पहचान रहा है और बंगाल के नेता अपनी जनसभाओं में इसी का इस्तेमाल करते आए हैं।
बीजेपी के नेताओं का धुआंधार प्रचार
सोमवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने भी अपने संबोधन की शुरुआत "जय माँ काली" से की। बंगाल बीजेपी के एक नेता कहा- "हम हिंदुत्व के प्रति प्रतिबद्ध हैं। काली और दुर्गा वे देवियाँ हैं जिनसे बंगाल के लोग सबसे अधिक जुड़ाव महसूस करते हैं। बंगाल के मतदाताओं को 'जय माँ काली' के साथ संबोधित करने में कुछ भी गलत नहीं है।" घर-घर पहुँचेगा मोदी का संदेश
भाजपा कार्यकर्ता प्रधानमंत्री के अगले बंगाल दौरे से पहले उनके इस पत्र की प्रतियां लेकर घर-घर जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में लिखा:
"बंगाल के लोगों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि कृपया विकास के इस कार्यक्रम में शामिल हों जो अन्य राज्यों में चल रहा है। मैं बंगाल की जनता की सेवा करने के लिए एक अवसर की प्रतीक्षा कर रहा हूँ।"ममता सरकार पर निशाना और 'विश्वास की कमी'
मोदी का यह पत्र ऐसे समय में आया है जब सुप्रीम कोर्ट ने भी टिप्पणी की है कि राज्य सरकार और केंद्रीय संस्थानों के बीच 'विश्वास की कमी' (trust deficit) है। अपने पत्र में पीएम मोदी ने उन केंद्रीय योजनाओं का ज़िक्र किया जिन्हें ममता बनर्जी सरकार ने बंगाल में लागू नहीं होने दिया।बंगाल के मतदाताओं से मोदी ने क्या कहा
आर्थिक गिरावट: उन्होंने याद दिलाया कि आजादी के तुरंत बाद बंगाल आर्थिक विकास और उद्योगों में अग्रणी था, लेकिन आज की स्थिति देखकर उन्हें दुख होता है।
कुशासन का आरोप: उन्होंने पिछले छह दशकों के "कुशासन और तुष्टीकरण की राजनीति" को बंगाल की इस हालत का जिम्मेदार ठहराया।
पलायन और सुरक्षा: उन्होंने लिखा कि युवाओं के पास नौकरियों के लिए दूसरे राज्यों में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है और महिलाएं अपनी सुरक्षा को लेकर डरी हुई हैं।
योजनाओं का लाभ: उन्होंने जन धन खाते, पेंशन योजना, चिकित्सा बीमा और खेती से जुड़ी अपनी सरकार की विभिन्न सामाजिक लाभ योजनाओं का ब्यौरा दिया।
बंगाल के भविष्य का संकल्प
मोदी ने बंगाल के मतदाताओं को याद दिलाया कि राज्य के भाग्य का फैसला करने का समय अब केवल कुछ महीने दूर है। उन्होंने अंत में लिखा: "बंगाल के युवाओं का भाग्य क्या होगा, इसका फैसला कुछ ही महीनों में हो जाएगा। आपका निर्णय उनका भविष्य तय करेगा। बंगाल के स्त्री-पुरुष और बच्चे वंचित हैं। मैंने बंगाल को 'विकसित' और समृद्ध बनाने का संकल्प लिया है।"मोदी और बीजेपी की सोची समझी रणनीति
भाजपा पर अक्सर विपक्षी दलों (विशेषकर तृणमूल कांग्रेस) द्वारा यह आरोप लगाया जाता रहा है कि वह एक 'बाहरी' या 'उत्तर भारतीय' पार्टी है। 'जय श्री राम' को बंगाल में अक्सर हिंदी भाषी बेल्ट के नारे के रूप में देखा गया। 'जय माँ काली' और 'जय माँ दुर्गा' का उपयोग करके पीएम मोदी यह संदेश दे रहे हैं कि भाजपा बंगाल की स्थानीय संस्कृति, परंपरा और लोकाचार (Bengali Ethos) में गहराई से रची-बसी है। यह 'बाहरी' होने के टैग को मिटाने की कोशिश है।
ध्रुवीकरण का नया स्वरूप
'हिंदुत्व' भाजपा की मुख्य विचारधारा बनी हुई है, लेकिन बंगाल में इसे पेश करने का तरीका बदला गया है। माँ काली बंगाल के हिंदू समाज की रक्षक और संहारक शक्ति की प्रतीक हैं। इस नारे के माध्यम से भाजपा हिंदुओं को एकजुट तो कर ही रही है, साथ ही इसे बंगाल की 'शक्ति पूजा' की परंपरा से जोड़कर अधिक स्वीकार्य बना रही है।'विकास' के नैरेटिव की आड़ में 'तुष्टीकरण'
मोदी ने अपने पत्र में 60 वर्षों के "कुशासन और तुष्टीकरण" का उल्लेख किया है। 'जय माँ काली' का आह्वान करने के साथ-साथ आर्थिक पिछड़ेपन और महिला सुरक्षा की बात करना एक घातक राजनीतिक तानाबाना है। भाजपा यह दिखाना चाहती है कि वह बंगाल की धार्मिक पहचान की भी रक्षा करेगी और उसे गुजरात या अन्य विकसित राज्यों की तरह आर्थिक प्रगति की राह पर भी ले जाएगी।महिला मतदाताओं पर फोकस
बंगाल में महिला मतदाता (Silent Voters) चुनाव का पासा पलटने में अहम भूमिका निभाती हैं। ममता बनर्जी की 'लक्ष्मी भंडार' जैसी योजनाओं ने उन्हें महिलाओं के बीच लोकप्रिय बनाया है। देवी काली (नारी शक्ति का प्रतीक) का नाम लेकर और पत्र में विशेष रूप से महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाकर, पीएम मोदी सीधे तौर पर महिला वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर रहे हैं।ममता के मई-माटी-मानुष' नारे को सीधी चुनौती
पत्र में केंद्र और राज्य के बीच "विश्वास की कमी" और केंद्रीय योजनाओं को रोकने का ज़िक्र किया गया है। मोदी खुद को एक 'सेवक' के रूप में पेश कर रहे हैं जो विकास करना चाहता है लेकिन राज्य सरकार उसे रोक रही है। 'जय माँ काली' के साथ इस भावनात्मक अपील को जोड़कर वे ममता बनर्जी के 'मई-माटी-मानुष' के नारे को सीधी चुनौती दे रहे हैं।उग्र हिन्दुत्व से दूरी
बीजेपी और मोदी की यह पहल बता रही है कि भाजपा अब बंगाल में "आक्रामक हिंदुत्व" के बजाय "क्षेत्रीय पहचान के साथ घुला-मिला हिंदुत्व" पेश कर रही है। यह रणनीति टीएमसी के 'बंगाली अस्मिता' वाले दांव को कमजोर करने के लिए तैयार की गई है।