मोदी सरकार में एक और इस्तीफा अचानक हो गया। इस बार पश्चिम बंगाल में धमाका हुआ। वह भी चुनाव से ऐन पहले। राज्यपाल डॉ. सी.वी. आनंद बोस ने गुरुवार को अचानक इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने राज्यपाल पद पर करीब 3.5 साल काम किया। उनका इस्तीफा राज्य में आने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले आया है। राज्य में टीएमसी सरकार चौथी बार लगातार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी ममता बनर्जी को हराने की तैयारी में है। ममता ने उनके इस अचानक इस्तीफ़े पर हैरानी जताई है और केंद्र पर हमला किया है।

राज्यपाल बोस ने इस्तीफ़ा देते हुए कहा कि उन्होंने राज्यपाल कार्यालय में काफ़ी समय बिताया है। उन्होंने इस्तीफ़े की वजह नहीं बताई और न ही कोई राजनीतिक दबाव की बात कही। बोस ने 23 नवंबर 2022 को राज्यपाल पद की शपथ ली थी। तब कलकत्ता हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव ने उन्हें शपथ दिलाई थी। वे 1977 बैच के केरल कैडर के रिटायर्ड आईएएस अधिकारी हैं। रिटायरमेंट से पहले वे कोलकाता के नेशनल म्यूजियम के प्रशासक थे।

ममता ने केंद्र पर साधा निशाना

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक्स पर पोस्ट करके कहा, 'मैं श्री सी.वी. आनंद बोस के राज्यपाल पद से अचानक इस्तीफे की खबर से हैरान और बेहद चिंतित हूं। इस्तीफे की वजह मुझे अभी नहीं पता। लेकिन मौजूदा हालात देखकर मुझे हैरानी नहीं होगी, अगर केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें कुछ राजनीतिक हितों के लिए दबाव डाला हो, खासकर आने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले।'

ममता ने आगे लिखा, 'केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मुझे बताया कि आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल बनाया जा रहा है। उन्होंने मुझसे इस बारे में कोई सलाह नहीं ली, जो पुरानी परंपरा के खिलाफ है। ऐसे फ़ैसले भारत के संविधान की भावना को कमजोर करते हैं और हमारे संघीय ढांचे की नींव पर चोट पहुंचाते हैं। केंद्र को सहकारी संघवाद का सम्मान करना चाहिए और राज्यों की गरिमा को कम करने वाले एकतरफा फैसले नहीं लेने चाहिए।'

आर.एन. रवि कौन हैं?

आर.एन. रवि फिलहाल तमिलनाडु के राज्यपाल हैं। उनके और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के बीच भी रिश्ते ठंडे रहे हैं। तमिलनाडु में भी विधानसभा चुनाव आने वाले हैं। रवि एक पूर्व आईपीएस अधिकारी हैं और कई राज्यों में राज्यपाल रह चुके हैं।

तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवि का कार्यकाल 2021 से शुरू होने के बाद से ही एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में डीएमके सरकार के साथ लगातार टकराव और विवादों में रहा है। वे कई बार राजनीतिक और संवैधानिक विवादों के केंद्र में रहे हैं।

विधेयकों पर सहमति में देरी और रोक

आरएन रवि ने तमिलनाडु विधानसभा द्वारा पारित कई अहम विधेयकों पर लंबे समय तक सहमति नहीं दी या उन्हें राष्ट्रपति के पास भेज दिया था। 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने 10 ऐसे बिलों को रोकने को अवैध और मनमाना करार दिया था और कहा था कि राज्यपाल के पास वीटो पावर नहीं है और उन्होंने गुड फेथ में काम नहीं किया। यह फैसला राज्य सरकार के लिए बड़ी जीत थी, लेकिन राज्यपाल बनाम सरकार का सबसे बड़ा विवाद बना रहा।

विधानसभा में बार-बार वॉकआउट

रवि ने कई बार विधानसभा सत्र के उद्घाटन पर सरकार द्वारा तैयार अभिभाषण पढ़ने से इनकार किया और सदन से बाहर चले गए। जनवरी 2026 में राष्ट्रगान के प्रति अनादर का आरोप लगाकर वॉकआउट किया। यह 2023-2026 में कम से कम चौथी बार हुआ। वे राज्य सरकार के निवेश, अपराध, शिक्षा आदि दावों को झूठा और निराधार बताते रहे। एक सरकारी कॉलेज कार्यक्रम में छात्रों से 'जय श्री राम' का नारा लगवाने का आरोप उन पर लगा, जिससे तमिलनाडु में बड़ा राजनीतिक बवाल हुआ। कई संगठनों ने इसे संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताया और हटाने की मांग की। मंत्री की नियुक्ति, बर्खास्तगी में हस्तक्षेप जैसे मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई।
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ममता और बोस के बीच भी रहा तनाव

वैसे, आरएन रवि व स्टालिन की तरह ही ममता और बंगाल के राज्यपाल बोस के बीच भी रिश्ते हमेशा तनावपूर्ण रहे हैं। विश्वविद्यालयों के वाइस चांसलर नियुक्ति, बिलों पर हस्ताक्षर और अन्य मुद्दों पर कई बार विवाद हुए।

सी.वी. आनंद बोस

बोस केरल के कोट्टायम जिले के मननाम में 2 जनवरी 1951 को पैदा हुए। उनके पिता स्वतंत्रता सेनानी पी.के. वासुदेवन नायर थे। बोस जवाहरलाल नेहरू फेलोशिप के प्राप्तकर्ता हैं। वे लाल बहादुर शास्त्री नेशनल एकेडमी ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन, मसूरी के पहले फेलो हैं। उन्होंने 9 भाषाओं में 70 किताबें और कुल 350 प्रकाशन किए हैं, जिनमें उपन्यास, कहानियां, कविताएं और निबंध शामिल हैं।
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वे यूरोपियन काउंसिल फॉर न्यूक्लियर रिसर्च, जेनेवा और इंटरनेशनल फ्यूजन एनर्जी ऑर्गनाइजेशन, आईटीईआर, फ्रांस में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। वे एटॉमिक एनर्जी एजुकेशन सोसाइटी के चेयरमैन भी रहे। केरल के श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के खजाने पर सुप्रीम कोर्ट कमिटी के प्रमुख भी रहे।

बहरहाल, पश्चिम बंगाल में अब चुनाव की तैयारियां तेज हो गई हैं। नया राज्यपाल आने से राजनीतिक माहौल और गर्म हो सकता है। सबकी नज़र इस पर है कि कि आगे क्या होता है।