सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 1 अप्रैल को पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया पर संतोष जताया। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि अब तक 60 लाख में से 47 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है। 7 अप्रैल तक प्रक्रिया पूरी हो जाएगी।
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 4 दिसंबर को एसआईआर मामले की सुनवाई की।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन मतदाता सूची संशोधन (बंगाल एसआईआर) प्रक्रिया में कुल 60.06 लाख मामलों में से मंगलवार शाम तक 47 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा कि रोज़ाना 1.75 लाख से 2 लाख मामलों का निपटारा किया जा रहा है और पूरी प्रक्रिया 7 अप्रैल तक पूरी होने की संभावना है। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को फॉर्म 6 की आड़ में धांधली का मुद्दा वरिष्ठ एडवोकेट कपिल सिब्बल और अन्य वकीलों ने उठाया लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की और ट्रिब्यूनल में जाने को कहा।
चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने तीन सदस्यीय पीठ के साथ सुनवाई करते हुए कहा, ‘‘हम तथ्यों और आंकड़ों को लेकर काफी खुश और आशान्वित हैं। कल (मंगलवार) तक 47 लाख से अधिक मामलों का निपटारा हो चुका है। रोजाना करीब 1.75 लाख से 2 लाख मामलों का निपटारा हो रहा है। हमें बताया गया है कि 7 अप्रैल तक सभी आपत्तियों का फैसला हो जाएगा।’’ पीठ में जस्टिस जॉयमल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली भी शामिल थे।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले मतदाताओं की सप्लीमेंट्री सूची प्रकाशित करने की अंतिम तिथि नामांकन की अंतिम तिथि तक तय की थी। बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 294 में से 152 सीटों के लिए नामांकन की अंतिम तिथि 6 अप्रैल है, जबकि शेष 144 सीटों के लिए 9 अप्रैल है। दोनों चरणों में मतदान क्रमशः 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को होगा।
28 फरवरी को प्रकाशित अंतिम ड्राफ्ट रोल में बंगाल में 6.44 करोड़ मतदाताओं के नाम दर्ज थे, जिसमें हर विधानसभा क्षेत्र में ‘विचाराधीन’ (अंडर एडजुडिकेशन) चिह्नित मतदाताओं की संख्या का विवरण दिया गया था। इसके बाद 23 मार्च की आधी रात के आसपास प्रकाशित पहली सप्लीमेंट्री सूचियों में किसी भी क्षेत्र में हटाए गए मतदाताओं की संख्या का विवरण नहीं दिया गया।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने बताया कि विचाराधीन चिह्नित मतदाताओं में से करीब 44 प्रतिशत मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
फॉर्म 6 का मुद्दा उठाने पर चीफ जस्टिस ने कहा
पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और कल्याण बंद्योपाध्याय ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय में भारी तादाद में नए मतदाता फॉर्म (फॉर्म-6) जमा किए जाने का मुद्दा उठाया। चीफ जस्टिस ने उन्हें अपीलीय ट्रिब्यूनल में जाने का निर्देश दिया।
वरिष्ठ वकील श्याम दीवान ने हटाए गए मतदाताओं की उच्च दर का मुद्दा उठाया और कहा कि यह बहुत अधिक है, लेकिन पीठ ने इसमें भी हस्तक्षेप नहीं किया। यानी कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में फॉर्म 6 की आड़ में धांधली का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट में उठने के बावजूद अदालत ने कोई प्रतिक्रिया या एक्शन नहीं लिया।
चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में क्या कहा
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील दामा शेषाद्रि नायडू ने पीठ को बताया कि हटाए गए मतदाताओं की अपील सुनने के लिए स्थापित 19 अपीलीय ट्रिब्यूनल में न्यायिक अधिकारियों का प्रशिक्षण बुधवार से शुरू हो रहा है। इन सभी ट्रिब्यूनल के लिए दक्षिण कोलकाता के जोका में श्यामा प्रसाद मुखर्जी नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर एंड सैनिटेशन (एसपीएम-एनआईडब्ल्यूएएस) को स्थल बनाया गया है। हटाए गए मतदाता ईसीआई नेट प्लेटफॉर्म के माध्यम से या उप-मंडल अधिकारी या जिला मजिस्ट्रेट के कार्यालय में भौतिक रूप से अपील दाखिल कर सकते हैं। इन अपीलों को डिजिटाइज कर पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा।
सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची की सही-सही संशोधन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए यह सुनवाई की। एसआईआर प्रक्रिया में आपत्तियों का निपटारा और पूरक सूचियां प्रकाशित करने का काम तेजी से चल रहा है।
फॉर्म 6 की आड़ में धांधली गंभीर मामला है
बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी ने फॉर्म 6 की आड़ में दूसरे राज्यों के मतदाताओं की घुसपैठ बंगाल में करवाकर पूरे चुनाव नतीजों को पलटने का आरोप लगाया है। टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी ने इस संबंध में वीडियो सबूत भी पेश किए। जिसमें बीजेपी नेताओं को भारी तादाद में फॉर्म 6 जमा कराते हुए दिखाया गया है। टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी इस सिलसिले में चुनाव आयोग को पत्र लिखकर गुहार लगा चुकी हैं। पश्चिम बंगाल में फॉर्म 6 को लेकर टीएमसी का आंदोलन शुरू हो चुका है।