बीजेपी ने इस बार पश्चिम बंगाल में राज्यसभा के लिए सभी तीनों सीटों पर टीएमसी के दलबदलुओं को उम्मीदवार बनाया है। बीजेपी ने गुरुवार रात इसकी सूची जारी की। टीएमसी से हाल ही में इस्तीफा देने वाले सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक को बीजेपी में शामिल होने के कुछ घंटे बाद ही राज्यसभा उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। ये तीनों नेताओं ने टीएमसी से तब इस्तीफ़ा दिया था जब पार्टी में बगावत हुई थी।

सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक ने हाल ही में टीएमसी से इस्तीफा देने के साथ-साथ राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके इस्तीफे के बाद इन तीन सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव कराए जा रहे हैं। इन तीनों की जीत तय मानी जा रही है क्योंकि ममता खेमे के पास सीट जीतने की क्षमता नहीं है और टीएमसी का बागी खेमा उम्मीदवार नहीं उतार रहा है। बाक़ी किसी दल के पास जीतने की क्षमता नहीं है।

तो सवाल है कि जब सुष्मिता देव, सुखेंदु शेखर राय और प्रकाश चिक बराइक तीनों पहले राज्यसभा सांसद थे और अब भी राज्यसभा सांसद ही बनेंगे तो इस्तीफा क्यों दिया था? बदलाव तो सिर्फ़ इतना आएगा कि पहले वे टीएमसी से सांसद थे, लेकिन अब जीत के बाद बीजेपी से होंगे। माना जा रहा है कि इसके पीछे बीजेपी की वह रणनीति है जिसमें एनडीए संसद में दो-तिहाई बहुमत पाने के प्रयास में है।

राज्यसभा में मजबूत होगी NDA की स्थिति

इन तीन सीटों पर जीत के बाद एनडीए की राज्यसभा में कुल संख्या बढ़कर 154 तक पहुंच सकती है। फिलहाल राज्यसभा में बीजेपी के 114 सांसद हैं। सदन में सामान्य बहुमत के लिए 123 सांसदों की ज़रूरत होती है। एनडीए के कुल 151 सदस्य हैं, जिनमें मनोनीत और निर्दलीय सदस्य भी शामिल हैं। तीन नई सीटें मिलने के बाद एनडीए दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े 163 से केवल 9 सीटें दूर रह जाएगा। माना जा रहा है कि बीजेपी किसी भी गठबंधन में नहीं शामिल विपक्षी दलों को समर्थन देने के लिए राजी कर सकती है।

राज्यसभा में विपक्षी INDIA गठबंधन की संख्या घटकर 64 सांसदों तक पहुंच गई है। इसके अलावा 27 सांसद ऐसे हैं जो किसी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं। इनमें प्रमुख रूप से डीएमके के 8 सांसद, बीजेडी के 5 सांसद, आम आदमी पार्टी के 3 सांसद बताए जाते हैं। इनमें से अधिकांश सदस्य विभिन्न मुद्दों पर बीजेपी का विरोध करते रहे हैं।

बीजेपी को दो-तिहाई बहुमत क्यों चाहिए?

बीजेपी मुख्य रूप से संवैधानिक संशोधन बिल पास कराने के लिए राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत यानी 163 सीटें हासिल करने की कोशिश कर रही है।

पहले से पास हुआ 33% महिला आरक्षण को 2029 या उससे पहले लागू करने के लिए समयसीमा बदलने वाला बिल बीजेपी की प्राथमिकता में है। इसके अलावा लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर क़रीब 850 करने और नए जनगणना के आधार पर सीटों का परिसीमन करने के लिए बीजेपी कोशिशों में जुटा है।

प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्रीय, राज्य मंत्री अगर 30 दिनों से ज्यादा जेल में रहें तो स्वतः पद से हट जाएंगे, इसको लेकर भी सरकार बिल लाने वाली है। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए उसे दो-तिहाई बहुमत चाहिए।

संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत संवैधानिक संशोधन के लिए दोनों सदनों लोकसभा और राज्यसभा में कुल सदस्यों का बहुमत के अलावा उपस्थित और मतदान करने वालों का दो-तिहाई बहुमत चाहिए। साधारण बिल के लिए साधारण बहुमत काफी है, लेकिन ये बिल संवैधानिक हैं। इस वजह से दो-तिहाई बहुमत के बिना इनको पास नहीं माना जा सकता है।

बीजेपी में शामिल हुए तीनों दलबदलू नेता

बहरहाल, कोलकाता के साल्ट लेक स्थित बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में गुरुवार को पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य ने टीएमसी से आए तीनों नेताओं को पार्टी की सदस्यता दिलाई। सदस्यता ग्रहण करने के कुछ ही समय बाद बीजेपी ने उन्हें राज्यसभा उपचुनाव के लिए उम्मीदवार बना दिया।

TMC नेताओं के लिए तो दरवाजे बंद थे?

बीजेपी अध्यक्ष समीक भट्टाचार्य से जब पूछा गया कि पार्टी पहले कहती थी कि टीएमसी नेताओं के लिए बीजेपी के दरवाजे बंद हैं, तो अब उन्हें क्यों शामिल किया गया? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह एक एक्सेप्शनल केस है। उन्होंने कहा कि बीजेपी का रुख आज भी वही है, लेकिन ऐसे नेता जिन्होंने भ्रष्टाचार नहीं किया, लोगों पर अत्याचार नहीं किया, नौकरी घोटालों में शामिल नहीं रहे और जनता के अधिकार नहीं छीने उनका टीएमसी के ख़िलाफ़ हमारी लड़ाई में पार्टी में स्वागत है। उन्होंने कहा कि इन तीनों नेताओं का अनुभव पश्चिम बंगाल में बीजेपी को मजबूत करेगा।

सुष्मिता देव के टीएमसी पर गंभीर आरोप

बीजेपी में शामिल होने के बाद सुष्मिता देव ने अपनी पूर्व पार्टी टीएमसी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्हें एहसास हुआ कि भ्रष्टाचार किस स्तर तक हो सकता है। सुष्मिता देव ने कहा, 'मेरी आलोचना करने वाले बहुत लोग हो सकते हैं, लेकिन कोई यह नहीं कह सकता कि मेरा कभी भ्रष्टाचार से कोई संबंध रहा है।' उन्होंने कहा कि बीजेपी नेतृत्व के फैसले के अनुसार ही उन्होंने कोलकाता में पार्टी की सदस्यता ली।
सुष्मिता देव मूल रूप से असम की राजनीति से जुड़ी रही हैं। इस पर उन्होंने कहा कि वे चाहतीं तो घर बैठे ऑनलाइन भी बीजेपी की सदस्य बन सकती थीं, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें कोलकाता आकर सदस्यता लेने के लिए कहा। उन्होंने बताया कि असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने भी उन्हें सलाह दी कि पश्चिम बंगाल की जनता का सम्मान करना चाहिए क्योंकि उन्होंने उन्हें दो बार राज्यसभा भेजा था।

पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर राय ने भी टीएमसी नेतृत्व की आलोचना की। वहीं समीक भट्टाचार्य ने कहा कि अब इन नेताओं की पुरानी राजनीतिक पहचान मायने नहीं रखती। उन्होंने कहा, 'हर व्यक्ति का एक राजनीतिक अतीत होता है। आज उनकी पहचान सिर्फ बीजेपी कार्यकर्ता की है।'

सुष्मिता देव: कांग्रेस से BJP तक का सफर

सुष्मिता देव पहले कांग्रेस की वरिष्ठ नेता थीं। उन्होंने वर्ष 2021 में कांग्रेस छोड़कर टीएमसी का दामन थामा था। अब करीब पांच साल बाद उन्होंने टीएमसी भी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गई हैं।

बंगाल की राजनीति में बढ़ेगी हलचल

इन नेताओं के बीजेपी में शामिल होने और तुरंत राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने को पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है। इससे एक ओर टीएमसी को झटका लगा है, वहीं बीजेपी ने साफ़ संकेत दिया है कि वह आगामी राजनीतिक मुकाबलों से पहले अपने संगठन और संसदीय ताकत को मजबूत करने की रणनीति पर काम कर रही है।