ईडी द्वारा टीएमसी खातों को फ्रीज करने से पहले पार्टी के एक बागी की शिकायत पर फ्रीज खातों के मामले में कोलकाता हाईकोर्ट ने टीएमसी को राहत दी है। जज ने कहा कि खाते को फ्रीज कराने की शिकायत किसी छिपे मकसद से की गई है।
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ईडी द्वारा टीएमसी के तीन खातों को फ्रीज करने से कुछ हफ्ते पहले टीएमसी के एक बागी की शिकायत के आधार पर फ्रीज किए गए खातों के मामले में कोलकाता हाईकोर्ट ने टीएमसी को राहत दे दी है। अदालत ने टीएमसी को उसके फ्रीज किए गए तीन बैंक खातों से सीमित खर्च करने की मंजूरी दे दी है। अदालत ने साफ़ किया कि पार्टी रोजमर्रा के कामकाज और क़ानूनी ख़र्चों के लिए इन खातों से पैसा निकाल सकेगी, लेकिन यह प्रक्रिया अदालत द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में होगी।
यह फैसला तब आया है जब टीएमसी पहले से ही आंतरिक गुटबाजी और हालिया राजनीतिक घटनाक्रमों से जूझ रही है। अदालत का यह आदेश पार्टी के लिए राहत माना जा रहा है, जबकि शिकायत करने वाले बागी विधायक और उनके समर्थक गुट को झटका लगा है। शुभेंदु सरकार के लिए यह झटका से कम नहीं है क्योंकि टीएमसी के बागी की शिकायत पर शुभेंदु की पुलिस ने बैंक खातों को फ्रीज कराया था और अदालत में भी बंगाल सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फ्रीज खातों पर टीएमसी को राहत देने का विरोध किया।
दूसरे मामले में ED ने की थी कार्रवाई
टीएमसी के बागी की शिकायत पर की गई पुलिस की कार्रवाई से ईडी की कार्रवाई अलग है। एक अन्य मामले में ईडी ने गुरुवार को पीएमएलए मामले में टीएमसी के तीन बैंक खातों में जमा क़रीब 440.42 करोड़ रुपये को फ्रीज कर दिया है। एजेंसी का दावा है कि पार्टी के खातों से बड़ी मात्रा में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन हुए हैं, जिनकी जांच धन शोधन निवारण अधिनियम यानी पीएमएलए के तहत की जा रही है। टीएमसी के बैंक खातों पर इस कार्रवाई से पहले ईडी ने कोलकाता और उसके आसपास पांच ठिकानों पर छापेमारी की थी। ये सभी स्थान केयरवेल ग्रुप ऑफ कंपनीज से जुड़े बताए गए हैं, जो विमानन क्षेत्र में काम करती है। ईडी का आरोप है कि जांच के दौरान कंपनी और तृणमूल कांग्रेस के बीच बड़े पैमाने पर वित्तीय लेन-देन के सबूत मिले हैं। लेकिन टीएमसी के बागी विधायक की शिकायत के मामले में बैंक खाते फ्रीज होने का मामला बिल्कुल अलग है।
दरअसल, टीएमसी के तीन बैंक खातों को बिधाननगर पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर डेबिट फ्रीज कर दिया था। यह शिकायत पार्टी के बागी विधायक बिश्वनाथ दास ने दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि पार्टी फंड का दुरुपयोग किया गया है और खातों में संदिग्ध वित्तीय लेन-देन हुए हैं। टीएमसी के एक बागी की शिकायत के बाद पुलिस ने एफ़आईआर दर्ज कर अगले ही दिन तीनों बैंक खातों पर रोक लगा दी थी। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए टीएमसी ने कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने क्या फ़ैसला दिया?
कलकत्ता हाईकोर्ट के जस्टिस सौगत भट्टाचार्य ने रिटायर्ड हाईकोर्ट जज जस्टिस सुभ्रत तालुकदार को 30 सितंबर तक स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया है। अदालत ने आदेश दिया कि टीएमसी अपने बैंक खातों से केवल रोजमर्रा के प्रशासनिक खर्च कर सकेगी। इसने कहा कि पार्टी कानूनी मामलों पर होने वाला खर्च भी इन्हीं खातों से कर सकेगी। किसी भी बड़े या अतिरिक्त खर्च की अनुमति नहीं होगी।
खाते से पैसा निकालने के लिए अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता पहले स्पेशल ऑफिसर को चेक देंगे। स्पेशल ऑफिसर के काउंटर साइन के बाद ही बैंक भुगतान करेगा। अदालत ने यह भी कहा कि स्पेशल ऑफिसर को हर महीने 1.25 लाख रुपये मानदेय दिया जाएगा और इसका भुगतान भी इन्हीं खातों से किया जा सकेगा।अदालत ने पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्रवाई पर भी गंभीर सवाल खड़े किए। अदालत ने कहा कि शिकायत दर्ज होने के तुरंत बाद जिस तेजी से एफआईआर दर्ज हुई और अगले ही दिन बैंक खाते फ्रीज कर दिए गए, वह असामान्य है।
जज ने टिप्पणी करते हुए कहा, 'जब कोई गरीब नागरिक थाने में शिकायत लेकर जाता है तो पुलिस इतनी तेजी नहीं दिखाती। लेकिन यहां शाम छह बजे शिकायत दर्ज हुई और अगले ही दिन खाते फ्रीज कर दिए गए।' अदालत ने यह भी कहा कि पुलिस यह साफ़ नहीं कर सकी कि खाते फ्रीज करने के लिए उसके पास कौन से ठोस सबूत थे।
शिकायत पर भी जताई शंका
हाईकोर्ट ने शिकायतकर्ता बागी विधायक बिश्वनाथ दास की मंशा पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि शिकायत में किसी विशेष लेन-देन या घटना का साफ़ उल्लेख नहीं है और यह शिकायत पहली नजर में काफी सामान्य दिखाई देती है। जज ने कहा, 'ऐसा लगता है कि शिकायत का उद्देश्य केवल बैंक खातों को फ्रीज कराना था।' अदालत ने यह भी पूछा कि यदि इतनी गंभीर अनियमितताएं थीं तो विधानसभा चुनाव के नतीजे आने से पहले शिकायत क्यों नहीं की गई। न्यायाधीश ने इसे अवसरवाद बताया।
शुभेंदु सरकार ने क्या कहा?
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा कि पुलिस की कार्रवाई जनता के पैसे और संपत्ति की सुरक्षा के लिए की गई थी। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यदि खाते पूरी तरह खोल दिए गए तो टीएमसी के दोनों गुटों के बीच उन्हें संचालित करने को लेकर विवाद हो सकता है।
असली टीएमसी कौन? अदालत ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठा कि पार्टी के दो गुट खुद को असली टीएमसी बता रहे हैं और यह विवाद फिलहाल चुनाव आयोग के पास लंबित है। इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में यह तय करना जरूरी नहीं है कि असली टीएमसी कौन है। अदालत ने साफ़ किया कि यदि भविष्य में चुनाव आयोग किसी एक गुट को आधिकारिक टीएमसी घोषित करता है तो वह पक्ष अदालत में उचित आवेदन दे सकता है।टीएमसी का कहना था कि बैंक खाते फ्रीज होने से पार्टी का सामान्य कामकाज लगभग ठप हो गया था और कर्मचारियों के वेतन से लेकर कानूनी खर्च तक प्रभावित हो रहे थे। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद पार्टी अब अपने जरूरी खर्च पूरे कर सकेगी, हालाँकि सभी भुगतान अदालत द्वारा नियुक्त स्पेशल ऑफिसर की निगरानी में होंगे।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर तय की है। तब तक स्पेशल ऑफिसर खातों के संचालन की निगरानी करेंगे और अदालत के आदेश के अनुसार ही भुगतान किया जाएगा। इस बीच अदालत की टिप्पणियों को टीएमसी के लिए बड़ी राहत और शिकायतकर्ता बागी गुट के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय द्वारा धनशोधन से जुड़े अलग मामले में टीएमसी के कुछ बैंक खातों पर की गई कार्रवाई की जांच और कानूनी प्रक्रिया अलग से जारी है।