चुनाव आयोग ने जगह की कमी और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय को ट्रांसफर करने की मंज़ूरी दे दी है। आयोग के इस कदम से ममता बनर्जी सरकार के साथ नए सिरे से तनाव पैदा हो सकता है।
बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया जारी है।
चुनान आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय को स्थानांतरित करने की मंजूरी दे दी है। इस फैसले से राज्य सरकार के साथ एक और टकराव की संभावना बन गई है। क्योंकि राज्य सरकार ने मई महीने से इस प्रस्ताव को लंबित रखा हुआ था। यह कदम एसआईआर प्रक्रिया से पैदा हुए जबरदस्त विवाद के बाद सामने आया है।
वर्तमान में CEO का दफ्तर 21 एन.एस. रोड स्थित बाल्मर लॉरी भवन में चल रहा है। नया पता 13 स्ट्रैंड रोड पर शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया का भवन होगा।
चुनाव आयोग के सूत्रों ने द टेलीग्राफ को बताया कि पता बदलने के लिए आयोग की मंजूरी ही कानूनी रूप से पर्याप्त है। मंजूरी का कारण यह दिया गया कि मौजूदा कार्यालय बहुत तंग था और सुरक्षा के नज़रिए से भी कमज़ोर था।
आयोग की ओर से शुक्रवार को बंगाल CEO कार्यालय को भेजे गए पत्र में कहा गया है, “प्रशासनिक आवश्यकता, जगह की कमी, सुरक्षा संबंधी चिंताओं और तत्काल आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आयोग ने कोलकाता के बीबीडी बाग स्थित शिपिंग हाउस, 13 स्ट्रैंड रोड की दूसरी और तीसरी मंजिल किराए पर लेने की मंजूरी दे दी है।”
पत्र में स्पष्ट किया गया है कि नए कार्यालय में IT और संबंधित इन्फ्रास्ट्रक्चर स्थापित करने, नवीनीकरण तथा अन्य लॉजिस्टिक व्यवस्थाओं का पूरा खर्च निर्वाचन आयोग वहन करेगा। अब किराए का मामला CEO को राज्य सरकार के साथ उठाना है। यानी सीईओ अब नए भवन में किराये का मामला राज्य सरकार के सामने उठाएंगे, क्योंकि किराया राज्य सरकार को ही देना है।
राज्य सरकार के मुख्यालय नबन्ना के कई अधिकारियों ने कहा कि निर्वाचन आयोग ने बंगाल सरकार से “परामर्श किए बिना” ट्रांसफर की अनुमति दे दी है, जिसे राज्य के शीर्ष नेतृत्व को अच्छा नहीं लगेगा। एक अधिकारी ने कहा, “मुख्य सचिव मनोज पंत को मंजूरी की प्रति भेजी गई है, लेकिन ट्रांसफर प्रस्ताव को मंजूरी देने से पहले राज्य सरकार से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया।”
एक अधिकारी ने कहा- “चूंकि CEO का कार्यालय राज्य के गृह विभाग के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है, इसलिए निर्वाचन आयोग को राज्य सरकार से सलाह लेनी चाहिए थी।” इस अधिकारी ने बताया कि इस साल की शुरुआत में जब CEO कार्यालय ने प्रस्ताव नबन्ना भेजा था, तब मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों से कहा था कि राज्य सरकार के स्वामित्व वाली किसी इमारत की तलाश की जाए, जहां कार्यालय ट्रांसफर किया जा सके।
अधिकारी ने कहा, “जाहिर है, मुख्यमंत्री नहीं चाहती थीं कि राज्य सरकार का एक अंग केंद्र सरकार की इमारत से काम करे। अभी तलाश जारी थी, उसी बीच चुनाव आयोग ने कार्यालय को (केंद्र सरकार के स्वामित्व वाली) शिपिंग कॉर्पोरेशन की इमारत में स्थानांतरित करने की अनुमति दे दी।”
चुनाव आयोग के सूत्रों का कहना है कि नए कार्यालय पर राज्य सरकार को मौजूदा कार्यालय की तुलना में काफी कम खर्च करना पड़ेगा।एक सूत्र ने बताया, “नई जगह 18,000 वर्ग फुट की है और किराया 85 रुपये प्रति वर्ग फुट प्रतिमाह है। राज्य सरकार को हर महीने 15.3 लाख रुपये (सालाना 1.836 करोड़ रुपये) किराए के रूप में देने होंगे। वर्तमान कार्यालय, जो इससे काफी छोटा है, के लिए राज्य सरकार सालाना 1.8 करोड़ रुपये किराया और अतिरिक्त 20 लाख रुपये रखरखाव पर खर्च कर रही थी।”इसके अलावा चुनाव के समय बाल्मर लॉरी भवन की छठी मंजिल को चार महीने के लिए अतिरिक्त 50 लाख रुपये में किराए पर लेना पड़ता था। नए कार्यालय में ऐसी अतिरिक्त लागत नहीं आएगी। नए दफ्तर में 100 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी आसानी से काम कर सकेंगे, जो मौजूदा कार्यालय में लगभग असंभव था।”