'द टेलीग्राफ' के पूर्व संपादक आर राजगोपाल का पासपोर्ट पुलिस के दूसरी रिपोर्ट भेजने के बाद क्लियर हो गया। एक अधिकारी के अनुसार शनिवार तक उन्हें उनका पासपोर्ट मिल जाएगा। SIR से नाम कटने और कोलकाता पुलिस की एडवर्स रिपोर्ट के बाद उनका पासपोर्ट 100 दिनों से अटका था।
'द टेलीग्राफ' के जिन पूर्व संपादक आर राजगोपाल का पासपोर्ट SIR मतदाता सूची से नाम कटने के बाद पुलिस वेरिफिकेशन नहीं होने से अटका हुआ था, उनके पासपोर्ट को अब रिन्यू कर दिया गया है। एक अधिकारी का कहना है कि पुलिस की दूसरी वेरिफिकेशन रिपोर्ट भेजने के बाद उनका नाम क्लियर हो गया। उनका कहना है कि संभावना है कि शनिवार तक उन्हें उनका पासपोर्ट मिल जाएगा। ऐसा तब हुआ जब इसके लिए काफ़ी दबाव पड़ा। इस पर मीडिया में रिपोर्टें छपीं, केरल के मुख्यमंत्री ने पश्चिम बंगाल के सीएम को ख़त लिखा और इस मुद्दे पर सरकार की काफ़ी किरगिरी हुई। हालाँकि राजगोपाल का पोसपोर्ट तो रिन्यू हो गया, लेकिन एक रिपोर्ट के अनुसार कम से कम 17 ऐसे लोगों के पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो पा रहे हैं क्योंकि उनके नाम एसआईआर के दौरान मतदाता सूची से कट गए हैं।
राजगोपाल के पोसपोर्ट विवाद के बीच ही अन्य लोगों के पासपोर्ट अटके होने की ख़बर आई है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि इन सभी मामलों में शुरुआती पुलिस रिपोर्ट इसलिए एडवर्स आई क्योंकि संबंधित लोगों के नाम विशेष पुनरीक्षण के बाद मतदाता सूची में नहीं मिले।
एचटी की रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि केवल आर. राजगोपाल ही नहीं, बल्कि कम से कम 17 अन्य लोगों के मामले भी सामने आए हैं। अधिकारी का कहना है कि इन सभी लोगों ने अपने पुराने पते पर ही पासपोर्ट नवीनीकरण के लिए आवेदन किया था। इसके बावजूद मतदाता सूची में नाम नहीं मिलने के कारण उनके खिलाफ एडवर्स पुलिस रिपोर्ट भेज दी गई। अधिकारी का कहना है कि यह किसी सरकारी नीति का हिस्सा नहीं बल्कि प्रक्रिया के स्तर पर हुई समस्या लगती है। पुलिस अब ऐसे सभी मामलों की समीक्षा कर रही है। लेकिन इस समीक्षा से पहले ही राजगोपाल के पासपोर्ट का वेरिफिकेशन हो गया।
100 दिनों से अटका रहा था पासपोर्ट
आर राजगोपाल का पासपोर्ट SIR से नाम कटने और वेरिफिकेशन में कोलकाता पुलिस की एडवर्स रिपोर्ट के बाद 100 दिनों से ज़्यादा समय से अटका हुआ था। केरल के तिरुवनंतपुरम में जन्मे और लंबे समय से कोलकाता में रहने वाले आर. राजगोपाल ने हाल ही में सोशल मीडिया पर बताया था कि उनका पासपोर्ट रिन्यू नहीं हो पा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस सत्यापन के दौरान उनका नाम मतदाता सूची में नहीं मिलने के कारण पासपोर्ट नवीनीकरण रोक दिया गया।सोशल मीडिया पर अपनी व्यथा साझा करते हुए आर. राजगोपाल ने दावा किया था कि मतदाता सूची से उनका नाम हटाए जाने के बाद वे न केवल मतदान के अधिकार से वंचित हो गए, बल्कि उनका पासपोर्ट रिन्यूअल भी अटक गया।
उन्होंने कहा था कि उनकी कहानी केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि उन लाखों भारतीयों की है जो अपनी नागरिक पहचान साबित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
27 लाख लोगों के साथ हुए सूची से बाहर
राजगोपाल का कहना था कि पश्चिम बंगाल में लगभग 27 लाख लोगों के नाम तथाकथित 'लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी' के आधार पर मतदाता सूची से हटाए गए। उन्होंने मैट्रिकुलेशन प्रमाणपत्र समेत अन्य दस्तावेज जमा किए, लेकिन उन्हें कोई साफ़ कारण नहीं बताया गया। उन्होंने बताया था कि उनका मामला अब सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित एक ट्रिब्यूनल के सामने लंबित है। इसी वजह से वे हाल में हुए चुनाव में मतदान भी नहीं कर सके।राजगोपाल की यह टिप्पणी तब आई जब देश में मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नागरिक पहचान और सरकारी दस्तावेजों की वैधता को लेकर बहस तेज है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हाल ही में सरकार ने दोहराया था कि पासपोर्ट स्वयं नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाता। राजगोपाल की इस व्यथा के बाद मीडिया में ख़बरें छपीं। सोशल मीडिया पर लोगों ने सरकार को कोसा।
राजनीतिक विवाद भी बढ़ा
आर. राजगोपाल के मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया था। रिपोर्टों के मुताबिक, केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने इस मामले को उठाते हुए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि यदि किसी व्यक्ति का पासपोर्ट केवल मतदाता सूची में नाम न होने के आधार पर रोका जाता है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है।
दोबारा पुलिस सत्यापन के बाद मिली मंजूरी
मामले की जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ अधिकारी ने एचटी को बताया कि राजगोपाल के मामले में दोबारा पुलिस सत्यापन कराया गया।
अधिकारी ने कहा कि दूसरी रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट दे दी गई, जिसके बाद पासपोर्ट के नवीनीकरण को मंजूरी मिल गई। एचटी ने सूत्रों के हवाले से ख़बर दी है कि पासपोर्ट छप चुका है और जल्द ही उन्हें सौंप दिया जाएगा। एक अन्य अधिकारी ने बताया कि सोमवार को राजगोपाल से दोबारा सत्यापन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए संपर्क किया गया था।
प्रशासन के सामने बड़ा सवाल
इस पूरे घटनाक्रम ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या केवल मतदाता सूची में नाम न होने के आधार पर किसी नागरिक के पासपोर्ट सत्यापन को प्रभावित किया जा सकता है। हालांकि, आर. राजगोपाल के मामले में दोबारा सत्यापन के बाद पासपोर्ट जारी कर दिया गया है, लेकिन कम से कम 17 अन्य लोगों के मामले अब भी लंबित हैं।