एसआईआर के तहत मतदाताओं के नाम हटाए जाने पर बड़े विवाद के बीच अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव ख़त्म होते ही अपीलीय ट्रिब्यूनल में एक बड़ा इस्तीफ़ा हुआ है। कलकत्ता हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस टीएस शिवगणनम ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR से जुड़े अपीलेट ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने इस्तीफा का कारण व्यक्तिगत बताया है।

चुनाव से पहले चुनाव आयोग ने पूरे पश्चिम बंगाल में वोटर लिस्ट की खास समीक्षा कराई थी। इसमें लाखों लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर इन हटाए गए नामों पर अपील सुनने के लिए 19 रिटायर्ड जजों को अपीलेट ट्रिब्यूनल बनाया गया था। जस्टिस टीएस शिवगणनम इन्हीं 19 जजों में शामिल थे। जस्टिस शिवगणनम ने सितंबर 2025 में कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के पद से रिटायर होने के बाद यह जिम्मेदारी संभाली थी।
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इस्तीफे की जानकारी

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार जस्टिस शिवगणनम ने गुरुवार को कलकत्ता हाई कोर्ट के मौजूदा चीफ़ जस्टिस सुजॉय पॉल को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया। चुनाव आयोग और बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को भी इसकी जानकारी दे दी गई। जब उनसे संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा, 'मैंने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा दिया है।'

क्यों है यह इस्तीफा चर्चा में?

SIR के तहत जांच के अधीन आए मतदाताओं की अपीलें इस ट्रिब्यूनल को सुननी थीं और इस पर फ़ैसला देना था। लेकिन सुनवाई के बाद भी बड़े पैमाने पर नाम काटे जाने पर पहले से ही काफी बहस हो रही थी। ऐसा इसलिए क्योंकि SIR के दौरान लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी की वजह से 60 लाख से ज़्यादा वोटरों के नामों पर फ़ैसला होना था। 

700 जजों द्वारा सुनवाई के बाद भी 27.16 लाख लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। इस मामले में 34 लाख से ज़्यादा लोगों ने इन फ़ैसलों के ख़िलाफ़ अपील की थी। लेकिन ट्रिब्यूनल से बहुत कम लोगों को राहत मिली- सिर्फ़ 1607 लोगों को।

जस्टिस शिवगणनम ने मंजूर की थी मोताब शेख की अपील

जस्टिस टीएस शिवगणनम ने कांग्रेस उम्मीदवार मोताब शेख की अपील मंजूर की थी। मोताब शेख का नाम वोटर लिस्ट में जोड़ा गया। बाद में उन्होंने फरक्का सीट से चुनाव लड़ा और बीजेपी के सुधीर चौधरी को 8000 वोटों से हराकर जीत हासिल की। सुप्रीम कोर्ट ने मोताब शेख और नंदलाल बोस के पोते की अपीलों जैसी कुछ खास अपीलों को जल्द सुनवाई का आदेश दिया था। ये मामले जस्टिस शिवगणनम के सामने आई थीं।
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चुनाव के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने को लेकर तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया था कि यह बीजेपी के फायदे के लिए किया गया। बंगाल में इस बार बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस को करारी हार दी है और सरकार बनाने जा रही है। जस्टिस शिवगणनम का इस्तीफा चुनाव खत्म होते ही आया है, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। हालाँकि उन्होंने साफ कहा है कि इस्तीफा सिर्फ व्यक्तिगत कारणों से है।

चुनाव आयोग अब इस ट्रिब्यूनल की जगह नए जज की नियुक्ति कर सकता है। बंगाल में नई सरकार बनने के साथ-साथ वोटर लिस्ट और चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस जारी रहने की संभावना है।