पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है कि निशाना बनाकर मतुआ और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। इस दावे से सियासत गरमा गई है।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर के बाद मतुआ समुदाय और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। नदिया जिले के चकदहा में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा, 'यह भेदभाव क्यों? मतुआ, राजबंशी और अल्पसंख्यकों के नाम निकाले जा रहे हैं। क्या आप समझते हैं कि लोग यह नहीं देख रहे हैं?'
कितने नाम कटे?
चुनाव आयोग के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक़ पश्चिम बंगाल में एसआईआर प्रक्रिया के बाद लगभग 91 लाख वोटरों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं। 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 63.66 लाख नाम काटे गए थे। ये कुल मतदाताओं का लगभग 8.3% हैं। इससे मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से कुछ ही ज़्यादा रह गई थी। इसके बाद जो क़रीब 60 लाख मतदाताओं के नाम एडजुडिकेशन यानी जाँच के आधीन लाए गए थे, उसमें से 27 लाख से ज़्यादा यानी क़रीब 45 फीसदी नाम हटा दिए गए। इस तरह कुल मिलाकर 91 लाख से ज़्यादा नाम काट दिए गए। केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप लगाते हुए बनर्जी ने दावा किया कि कुछ खास समुदायों को निशाना बनाकर मतदाता सूचियों से नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुर्शिदाबाद, मालदा और उत्तर दिनाजपुर जैसे जिलों में जहां अल्पसंख्यक आबादी ज्यादा है, वहां नामों को चुन-चुनकर हटाया जा रहा है।
ममता का दावा
सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद करीब 60 लाख मामलों में से 32 लाख नाम वापस बहाल कर दिए गए हैं। जिन लोगों के नाम अभी भी नहीं जुड़े हैं, वे ट्रिब्यूनल में आवेदन करें। तृणमूल कांग्रेस उनके साथ खड़ी है और कानूनी मदद देगी। भबानीपुर विधानसभा क्षेत्र में 40 हज़ार नाम काटे गए हैं। मदर टेरेसा की मिशनरीज ऑफ चैरिटी के 300 सदस्यों के नाम भी वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। रामकृष्ण मिशन और भारत सेवाश्रम संघ के साधुओं के नाम भी कटे हैं। ममता ने कहा,
यह चुनाव सिर्फ सरकार बनाने का नहीं है। यह आपकी पहचान, भाषा और सम्मान बचाने का चुनाव है। ताकि कोई आपको ‘विदेशी’ न कह सके। ममता बनर्जी
पश्चिम बंगाल सीएम
मतुआ समुदाय पर फोकस
मतुआ समुदाय उत्तर 24 परगना और नदिया जिले की कई विधानसभा सीटों पर काफी प्रभावशाली है। ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार ने इन इलाकों में बहुत सारा विकास कार्य किया है। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह मतुआ वोटों को बांटने की कोशिश कर रही है।
केंद्र पर हमला
ममता बनर्जी ने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन वह पश्चिम बंगाल सरकार पर घुसपैठ का इल्जाम लगा रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, 'जब आप गल्फ देशों में जाते हैं तो मुस्लिम शासकों को गले लगाते हैं, तब धर्म की बात नहीं होती। लेकिन यहां वोट बांटने के लिए धर्म का इस्तेमाल करते हैं।' उन्होंने यह भी कहा कि देश से गाय निर्यात होती है, लेकिन उस पर कोई मुद्दा नहीं बनाया जाता। उन्होंने यह भी कहा कि 'उनकी धर्म सिर्फ वोट बांटना है, यह हिंदू धर्म नहीं है'। पश्चिम बंगाल से और ख़बरें
आगामी चुनाव पर क्या बोलीं?
बोंगांव में दूसरी रैली में ममता बनर्जी ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस पिछले चुनाव से ज्यादा सीटें जीतेगी और चौथी बार सरकार बनाएगी। 2021 के विधानसभा चुनाव में टीएमसी ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 215 सीटें जीती थीं। ममता ने कहा, 'यह चुनाव वोटर लिस्ट से नाम काटने का बदला लेने का चुनाव है। टीएमसी जीतेगी और पहले से ज्यादा सीटें लाएगी।'
ममता का आश्वासन
मुख्यमंत्री ने कहा कि जो भी नाम अभी भी लिस्ट से गायब हैं, वे ट्रिब्यूनल में अपील करें। तृणमूल कांग्रेस उन्हें हर तरह की मदद देगी। उन्होंने साफ कहा कि पश्चिम बंगाल में कोई डिटेंशन कैंप नहीं बनेगा और संवैधानिक अधिकारों की लड़ाई वे लगातार लड़ेंगी।
क्या है पूरा मामला?
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन के तहत चुनाव आयोग ने पूरे देश में वोटर लिस्ट की जांच की। पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया के बाद बहुत बड़े पैमाने पर नाम कटने के आरोप लगे हैं। चुनाव आयोग अभी अंतिम वोटर लिस्ट घोषित नहीं कर पाया है। ममता बनर्जी का कहना है कि यह सिर्फ नाम काटने की प्रक्रिया नहीं, बल्कि कुछ खास समुदायों को वोट देने से रोकने की साजिश है।
अभी स्थिति यह है कि पूरे राज्य में इस मुद्दे पर चर्चा गरम है और आगामी विधानसभा चुनाव में वोटर लिस्ट विवाद बड़ा मुद्दा बनता दिख रहा है। लोगों में डर है कि अगर नाम नहीं जुड़ा तो वे वोट कैसे डाल पाएंगे। तृणमूल कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र पर हमला बताया है।