तृणमूल कांग्रेस (TMC) में मची बगावत और संकट के बीच पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर भाजपा पर तीखा हमला बोला है। टीएमसी के कुछ बागियों के बीजेपी में शामिल होने और उन्हें राज्यसभा चुनाव में उतारे जाने के बाद बंगाल की राजनीति गरमा उठी है।
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे आंतरिक संकट और बगावत के बीच पूर्व मुख्यमंत्री और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी का एक बड़ा बयान आज शुक्रवार 10 जुलाई को सामने आया है। ममता बनर्जी ने एक वीडियो संदेश जारी कर सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) को निशाने पर लिया है। उन्होंने बेहद आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा कि अगर भाजपा उन्हें चुप कराना चाहती है या टीएमसी को खत्म करना चाहती है, तो इसके लिए उन्हें "मुझे मारना होगा।"
भाजपा पर टीएमसी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप
ममता बनर्जी ने अपने वीडियो संदेश में भाजपा पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि वह केंद्रीय एजेंसियों और राजनीतिक दबाव के जरिए तृणमूल कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं को लगातार निशाना बना रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी के भीतर अस्थिरता पैदा करने की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन वह किसी भी दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं।बगावत और संकट के बीच संदेश
यह वीडियो संदेश ऐसे समय में आया है जब तृणमूल कांग्रेस गहरे आंतरिक संकट और विभाजन (split crisis) के दौर से गुजर रही है। पार्टी के कुछ बागी नेताओं के तेवरों के बीच ममता बनर्जी ने इस संदेश के जरिए न केवल विपक्ष को अपनी ताकत का अहसास कराया है, बल्कि अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं का हौसला बढ़ाने की भी कोशिश की है।उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि वह आखिरी सांस तक भाजपा की नीतियों और उनकी राजनीति के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगी।
टीएमसी का संकट क्या है, क्यों हो रही है बगावत
पश्चिम बंगाल में TMC के भीतर मचे इस बड़े आंतरिक संकट और बगावत के पीछे कई गंभीर राजनीतिक, प्रशासनिक और सांगठनिक कारण हैं। हालिया घटनाक्रमों और राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस संकट की मुख्य वजहें इस तरह हैं:
2026 के विधानसभा चुनावों में हारः पार्टी में तात्कालिक असंतोष का सबसे बड़ा कारण 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को मिली करारी शिकस्त है। इस हार के बाद से ही पार्टी के भीतर नेतृत्व की रणनीतियों पर सवाल उठने लगे और कई नेताओं को अपना राजनीतिक भविष्य असुरक्षित दिखाई देने लगा।
केंद्रीय एजेंसियों की जांच और 'सिग्नेचर स्कैंडल'
राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और कई अन्य नेता शिक्षकों की भर्ती में हुए कथित घोटाले (Teachers' Recruitment Scam) को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) और अन्य केंद्रीय जांच एजेंसियों के निशाने पर हैं। इससे पार्टी की छवि पर असर पड़ा और आंतरिक कलह बढ़ी।
विधानसभा के भीतर एक 'सिग्नेचर स्कैंडल' (फर्जी हस्ताक्षर विवाद) सामने आया, जिसमें कई विधायकों ने आरोप लगाया कि विधानसभा के एक प्रस्ताव में उनके फर्जी हस्ताक्षर किए गए। इस मामले की जांच सीआईडी (CID) कर रही है, जिसने पार्टी के अंतर्विरोधों को और गहरा कर दिया है।