पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त किए गए पुलिस ऑब्जर्वर और बीजेपी उम्मीदवार के बीच कथित 'गुप्त बैठक' को लेकर बड़ा विवाद हो गया है। टीएमसी का कहना है कि पुलिस ऑब्जर्वर परमार स्मित पर्षोत्तमदास ने बीजेपी के एक उम्मीदवार के साथ अनौपचारिक और गुप्त बैठक की, जो चुनाव नियमों का उल्लंघन है। पार्टी ने यह गंभीर आरोप लगाते हुए कलकत्ता हाईकोर्ट में याचिका दायर की है।
टीएमसी ने यह याचिका आर्टिकल 226 के तहत दायर की है। याचिका में कहा गया है कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त पुलिस ऑब्जर्वर को पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र रहना चाहिए, लेकिन इस अधिकारी ने अपना कर्तव्य नहीं निभाया। याचिका टीएमसी नेता राजीव कुमार ने पार्टी की ओर से दाखिल की है।
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पूरा विवाद क्या है?

यह मामला दक्षिण 24 परगना जिले की 142-मगराहाट पश्चिम विधानसभा सीट से जुड़ी है। यहाँ बीजेपी के उम्मीदवार गौर घोष चुनाव लड़ रहे हैं। आरोप है कि इस क्षेत्र के चार विधानसभा क्षेत्रों के लिए नियुक्त पुलिस ऑब्जर्वर परमार स्मित पर्षोत्तमदास ने 20 अप्रैल को डायमंड हार्बर स्थित सागरिका टूरिस्ट लॉज में गौर घोष से मुलाकात की।
आरोप लगाया गया है कि आधिकारिक रूप से इस अधिकारी को अलीपुर स्थित आईपीएस मेस में ठहरने की व्यवस्था दी गई थी, लेकिन उन्होंने प्रोटोकॉल तोड़ते हुए सागरिका लॉज में रुकना चुना और वहीं कथित बैठक हुई। टीएमसी का दावा है कि इस बैठक का सीसीटीवी फुटेज उनके पास है और उन्होंने इसे याचिका के साथ कोर्ट में जमा कर दिया है।

टीएमसी की दलील

याचिका में कहा गया है कि चुनाव ऑब्जर्वर का काम चुनाव को निष्पक्ष, स्वतंत्र और पारदर्शी बनाना होता है। वे किसी भी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार से निजी रूप से मिल नहीं सकते, खासकर गुप्त तरीके से। 

टीएमसी ने याचिका में कहा है कि चुनाव पर्यवेक्षक को किसी राजनीतिक पार्टी या उम्मीदवार से निजी रूप से मिलना संस्था की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है और जनता का चुनाव प्रक्रिया पर भरोसा कम करता है।

टीएमसी ने कहा, 'यह गंभीर कदाचार है। अधिकारी को सख्ती से निष्पक्ष रहना था, लेकिन उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार से अनऑफिशियल बैठक की, जो उनके क्षेत्र में आती है।' टीएमसी का कहना है कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार ऑब्जर्वर किसी भी उम्मीदवार से निजी मुलाकात नहीं कर सकते। ऐसी कोई भी अनधिकृत बैठक चुनाव की निष्पक्षता को प्रभावित करती है।

पहले इस पद पर हरि लाल चौहान थे, लेकिन बाद में परमार स्मित पर्षोत्तमदास को उनकी जगह नियुक्त किया गया। वे दक्षिण 24 परगना के चार विधानसभा क्षेत्रों के पुलिस ऑब्जर्वर हैं।
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कलकत्ता हाईकोर्ट जल्द ही इस याचिका पर सुनवाई करने वाला है। कोर्ट इस मामले में क्या निर्देश देता है, यह देखना अहम होगा। अभी तक चुनाव आयोग या संबंधित अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।

यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के दौरान निष्पक्षता को लेकर उठे सवालों को और बढ़ा रही है। टीएमसी ने मांग की है कि कोर्ट इस मामले की जांच करे और उचित कार्रवाई करे ताकि चुनाव प्रक्रिया पर कोई असर न पड़े।