पश्चिम बंगाल की जिस चुनाव प्रक्रिया पर ममता बनर्जी और तमाम विपक्षी पार्टियाँ सवाल उठाती रही हैं उसमें इस्तेमाल की गईं क़रीब 4000 ईवीएम जल कर नष्ट हो गईं। कोलकाता की एक सरकारी इमारत में आग लगी जिसमें ये ईवीएम यानी इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें रखी हुई थीं। ये EVM इस साल हुए विधानसभा चुनावों में 10 सीटों पर इस्तेमाल की गई थीं। राज्य के अग्निशमन और आपातकालीन सेवाओं के राज्य मंत्री कौशिक चौधरी ने कहा है कि यह आग सामान्य नहीं लग रही है। उन्होंने साज़िश की आशंका जताई है।

मंत्री कौशिक चौधरी ने कहा कि आग तीसरी मंजिल पर शुरू हुई, लेकिन चौथी, पांचवीं और छठी मंजिल को छोड़कर सीधे सातवीं और आठवीं मंजिल तक पहुंच गई। एचटी की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने इस बात पर सवाल उठाया कि आग बीच की मंजिलों को छोड़कर ऊपर कैसे पहुँची?

सामान्य आग नहीं: मंत्री

रिपोर्ट के अनुसार कौशिक चौधरी ने कहा, 'यह सामान्य आग नहीं दिख रही है। हम साज़िश की आशंका की जाँच कर रहे हैं।' उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद एफ़आईआर दर्ज कर ली गई है और जाँच शुरू हो गई है। फॉरेंसिक टीम ने सैंपल लेने के लिए मौक़े पर पहुँची।

रिपोर्ट है कि पुलिस और फॉरेंसिक विशेषज्ञ पूरे मामले की जांच कर रहे हैं। आग से कितना नुकसान हुआ है, इसकी पूरी जानकारी जुटाई जा रही है। EVM जलने से चुनावी दस्तावेजों और अन्य सरकारी सामान को भी नुकसान पहुंचा है।

साउथ 24 परगना अभिषेक बनर्जी का गढ़

आग दक्षिण कोलकाता के अलीपुर इलाके में एक नौ मंजिला सरकारी भवन में बुधवार को लगी। इस इमारत में साउथ 24 परगना जिला परिषद का कार्यालय भी है। यह क्षेत्र तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का मज़बूत क्षेत्र रहा था।

आग लगने की यह घटना चुनाव के बाद EVM की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रही है। विपक्षी पार्टियाँ पहले से ही EVM पर सवाल उठाती रही हैं, ऐसे में इस आग की घटना राजनीतिक रूप से संवेदनशील बन गई है। अभी तक किसी भी संगठन या व्यक्ति ने इस आग की जिम्मेदारी नहीं ली है।
पुलिस की जाँच से आगे की सच्चाई सामने आने की संभावना है। राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए उच्च स्तर पर जांच के आदेश दिए हैं।

चुनाव प्रक्रिया पर टीएमसी की रही है आपत्ति

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में बीजेपी को बड़ी जीत मिली है जबकि टीएमसी सत्ता से बाहर हो गई है। लेकिन टीएमसी और ममता बनर्जी चुनाव होने से पहले से ही चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाती रही थीं। ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस ने 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की प्रक्रिया और नतीजों को पूरी तरह अस्वीकार कर दिया। उन्होंने इसे 'लोकतंत्र की हत्या' और साजिश बताया था। बीजेपी को भारी बहुमत मिलने के बावजूद ममता ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया और दावा किया कि 'हम हारे नहीं हैं, 100+ सीटें लूटी गई हैं'।

एसआईआर के दौरान क़रीब 90 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। ममता ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया मनमानी, असंवैधानिक, जल्दबाजी में और पक्षपातपूर्ण थी। अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नियम लागू किए गए। कई सही वोटरों के नाम काटे गये। अदालत के हस्तक्षेप के बाद कुछ नाम जोड़े गए, लेकिन अभी भी बहुत से नाम बाहर रहे।

मतगणना में धांधली, EVM से जुड़े आरोप

टीएमसी ने मतगणना के दौरान भी धांधली के आरोप लगाए थे। ममता का आरोप था कि गिनती केंद्रों पर टीएमसी के काउंटिंग एजेंटों को बाहर निकाल दिया गया। सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए गए। ईवीएम में हेराफेरी का आरोप भी लगाया गया। आरोप लगाया गया कि ईवीएम के इस्तेमाल के बाद भी बैटरी लेवल असामान्य रूप से हाई रही। ममता बनर्जी ने व्यक्तिगत रूप से भवानीपुर सीट पर भी धांधली का आरोप लगाया जहां वे खुद हारीं। इसके अलावा पोलिंग बूथों और स्ट्रॉन्ग रूम में अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। हालाँकि चुनाव आयोग ने सभी आरोपों को खारिज कर दिया। ईसीआई ने कहा कि एसआईआर प्रक्रिया कानून के अनुसार हुई।