TMC के तीन बागी सांसदों- यूसुफ पठान, खलीलुर रहमान और अबू ताहिर खान ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लाउडस्पीकर मामले में एक ज्ञापन सौंपा है। रिपोर्ट है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट शुक्रवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के सामने यह मुद्दा उठाने वाला है।
शुभेंदु अधिकारी के बंगाल में मस्जिद पर लाउडस्पीकर का विवाद।
बंगाल में मस्जिदों से अज़ान के लिए इस्तेमाल होने वाले लाउडस्पीकर हटाने को लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के लिए दबाव डाले जाने के मुस्लिम संगठनों के आरोप के बाद अब टीएमसी के तीन बागी सांसद यूसुफ पठान, खलीलुर रहमान और अबू ताहिर खान ने गुरुवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर इस मुद्दे पर एक ज्ञापन सौंपा। सांसदों ने आरोप लगाया कि राज्य के कई हिस्सों में पुलिस मस्जिद समितियों पर लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बना रही है। सांसदों ने केंद्र से मांग की कि धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा सुनिश्चित की जाए और नोइज पॉल्यूशन से जुड़े नियमों को लागू करते समय किसी भी समुदाय की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुंचे।
मुर्शिदाबाद से सांसद अबु ताहिर खान ने कहा है कि उन्होंने अमित शाह से मिलकर कहा कि 'मस्जिद में अजान नहीं होगा तो क्या होगा'। अबु ताहिर खान के साथ ही यूसुफ़ पठान और खलीलुर रहमान ने गृहमंत्री को सौंपे पत्र में कहा है कि 'स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा मस्जिदों से लाउडस्पीकर और माइक्रोफोन हटाने के निर्देश दिए जा रहे हैं।' रिपोर्ट है कि इन तीनों सांसदों ने कहा है कि 'हमें मतदाताओं को जवाब देना है। हम किसी ऐसे कदम का समर्थन नहीं करेंगे जो मुसलमानों के खिलाफ हो।' सांसदों ने एसआईआर से नाम काटे जाने के मामले में यह भी लिखा है कि बड़ी संख्या में वैध भारतीय नागरिक अपने हक के लिए ट्रिब्यूनल के फैसलों का इंतजार कर रहे हैं। बता दें कि ये तीनों सांसद मुस्लिम बहुसंख्यक संसदीय क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन तीनों सांसदों के बारे में रिपोर्ट यह भी है कि इन्होंने हाल में एनडीए की बैठक में भाग नहीं लिया है।
विवाद की शुरुआत राज्य सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों पर ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों को सख्ती से लागू करने के फ़ैसले के बाद हुई। सरकार का कहना है कि अदालत के निर्देशों के अनुसार सभी धार्मिक संस्थानों में तय ध्वनि सीमा का पालन कराया जा रहा है। नियमों के मुताबिक़ रिहायशी इलाकों में दिन के समय 55 डेसीबल और रात में 45 डेसीबल से अधिक आवाज़ नहीं हो सकती। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कई जिलों में मस्जिद समितियों से बैठक कर छतों पर लगे तेज आवाज वाले लाउडस्पीकर हटाकर उनकी जगह कम क्षमता वाले साउंड बॉक्स लगाने को कहा है।
मुस्लिम संगठनों का आरोप
कई मुस्लिम संगठनों और मस्जिद समितियों का आरोप है कि पुलिस बिना किसी लिखित आदेश के मौखिक रूप से लाउडस्पीकर हटाने के लिए दबाव बना रही है। ऑल बंगाल इमाम एंड मुअज्जिन एसोसिएशन के महासचिव निजामुद्दीन बिस्वास ने कहा कि यदि किसी धार्मिक स्थल पर तय सीमा से अधिक ध्वनि हो रही है तो उसका वैज्ञानिक तरीके से डेसीबल मापकर कार्रवाई की जानी चाहिए। ऑल बंगाल इमाम एंड मुअज्जिन एसोसिएशन के महासचिव निजामुद्दीन बिस्वास ने कहा कि कानून में ध्वनि सीमा तय की गई है, लेकिन कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि मस्जिदों से लाउडस्पीकर पूरी तरह हटा दिए जाएं।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि प्रशासन केवल अदालत के आदेशों का पालन कर रहा है। उन्होंने कहा कि मंदिर हो या मस्जिद, किसी भी धार्मिक स्थल की आवाज़ उसके परिसर से बाहर नहीं जानी चाहिए। इसी आधार पर पुलिस को कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के अनुसार, अब तक पुलिस के निर्देश के बाद 5299 लाउडस्पीकर हटाए जा चुके हैं। इनमें से 4203 मस्जिदों और 1096 मंदिरों से लाउडस्पीकर हटाए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस को किसी प्रकार की जबरदस्ती न करने के निर्देश दिए गए थे और अधिकांश मस्जिद समितियों ने प्रशासन का सहयोग किया।
बागी टीएमसी नेताओं ने जताई नाराज़गी
टीएमसी के बागी विधायक अखरुज्जमान ने कहा कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है और सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने का संवैधानिक अधिकार है। उन्होंने कहा कि जैसे हिंदू मंदिरों में पूजा कर सकते हैं, उसी तरह मुसलमानों को मस्जिदों में अज़ान और नमाज़ अदा करने की पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनका गुट इस मुद्दे को मुख्यमंत्री के सामने उठाएगा।रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाला टीएमसी का बागी गुट शुक्रवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात कर इस पूरे मामले को उठाएगा। नेताओं का कहना है कि यदि कहीं नियम लागू किए जा रहे हैं तो वे सभी धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने दी आंदोलन की चेतावनी
जमीयत उलेमा-ए-हिंद (पश्चिम बंगाल) के अध्यक्ष और पूर्व मंत्री सिद्दीकुल्लाह चौधरी ने कहा कि यदि मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने का दबाव जारी रहा तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पुलिसकर्मी मस्जिद समितियों के पास जाकर लाउडस्पीकर हटाने का दबाव बना रहे हैं, जबकि अदालत ने केवल ध्वनि सीमा तय की है, लाउडस्पीकर हटाने का आदेश नहीं दिया।
इंडियन सेक्युलर फ्रंट यानी आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने कहा कि उन्हें कई मस्जिद समितियों से शिकायतें मिली हैं कि पुलिस बिना किसी लिखित आदेश के कार्रवाई कर रही है। उन्होंने राज्य के पुलिस महानिदेशक को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर वह कलकत्ता हाईकोर्ट का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।बीजेपी ने आरोपों को किया खारिज
बीजेपी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार किसी एक समुदाय को निशाना नहीं बना रही है। राज्य बीजेपी अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियम सभी धार्मिक संस्थानों पर समान रूप से लागू होंगे। उन्होंने कहा, 'यह लोकतांत्रिक देश है। सभी को विरोध करने का अधिकार है, लेकिन दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं किए जा सकते।'
मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने के मुद्दे ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गर्मा दिया है। एक ओर सरकार इसे अदालत के आदेशों के पालन और ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण का मामला बता रही है, वहीं मुस्लिम संगठन और विपक्षी नेता आरोप लगा रहे हैं कि नियमों को लागू करने के नाम पर केवल मस्जिदों को निशाना बनाया जा रहा है।