पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले और दूसरे चरण में चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि को लेकर एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स यानी एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार, दूसरे चरण के क़रीब 23 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं। पहले चरण में भी क़रीब 23 प्रतिशत उम्मीदवारों पर आपराधिक केस हैं। दोनों ही चरणों में आपराधिक बैकग्राउंड वाले उम्मीदवारों के मामले में बीजेपी अव्वल है। वैसे, तो सभी पार्टियों में ही आपराधिक मुक़दमे वाले उम्मीदवार हैं, लेकिन बीजेपी ने ऐसे सबसे ज़्यादा उम्मीदवार उतारे हैं।

दूसरे चरण के उम्मीदवार

सबसे पहले, बात दूसरे चरण के उम्मीदवारों की। एडीआर और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच ने दूसरे चरण की 142 सीटों पर चुनाव लड़ रहे कुल 1445 उम्मीदवारों के हलफनामों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट में पाया गया कि इनमें से 338 उम्मीदवार यानी क़रीब 23% ने खुद के खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। इनमें से 295 उम्मीदवार यानी 20% पर गंभीर आपराधिक मामले हैं।
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रिपोर्ट के मुताबिक़ 16 उम्मीदवारों ने हत्या के मामले घोषित किए हैं, जबकि 80 उम्मीदवारों पर हत्या के प्रयास के आरोप हैं। कई उम्मीदवारों पर महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध से जुड़े मामले भी दर्ज हैं।

दूसरे चरण के उम्मीदवारों पर केस

  • बीजेपी : 141 उम्मीदवारों में से 102 यानी 72% पर आपराधिक मामले हैं।
  • तृणमूल कांग्रेस: 142 उम्मीदवारों में से 49 यानी 35% पर आपराधिक मामले हैं।
  • सीपीआई(एम): 100 उम्मीदवारों में से 51 यानी 51% पर आपराधिक मामले हैं।
  • कांग्रेस: 142 उम्मीदवारों में से 37 यानी 26% पर आपराधिक मामले हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 142 विधानसभा क्षेत्रों में से 63 क्षेत्र यानी 44% 'रेड अलर्ट' वाले हैं। यानी ये वे क्षेत्र हैं जिनमें तीन या उससे ज़्यादा उम्मीदवार आपराधिक मामलों वाले हैं।

करोड़पति उम्मीदवार

वित्तीय स्थिति को लेकर रिपोर्ट बताती है कि दूसरे चरण में कुल 1445 उम्मीदवारों में से 321 यानी 22% करोड़पति हैं, यानी उनकी संपत्ति 1 करोड़ रुपये से ज्यादा है। तृणमूल कांग्रेस के 142 उम्मीदवारों में से 103 यानी 73% करोड़पति हैं। बीजेपी के 141 उम्मीदवारों में से 73 यानी 52%) करोड़पति हैं। कांग्रेस के 142 उम्मीदवारों में से 36 यानी 25%, सीपीआई(एम) यानी 100 उम्मीदवारों में से 33 यानी 33% करोड़पति हैं। दूसरे चरण में चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 1.21 करोड़ रुपये है।

एडीआर की रिपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का ज़िक्र करते हुए कहा गया है कि राजनीतिक पार्टियाँ अभी भी पुरानी आदत नहीं छोड़ रही हैं। वे आपराधिक पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों को टिकट दे रही हैं। इससे साफ़ है कि पार्टियों में साफ़-सुथरे उम्मीदवार चुनने की दिशा में ज़्यादा ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

यह रिपोर्ट उम्मीदवारों द्वारा चुनाव आयोग को दिए गए स्व-घोषित हलफनामों पर आधारित है। एडीआर जैसी संस्थाएँ इन हलफनामों का विश्लेषण कर आम जनता को उम्मीदवारों की पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी देती हैं, ताकि मतदाता उम्मीदवारों के बारे में जानकर वोट दे सकें।

पहले चरण में 345 उम्मीदवारों पर आपराधिक केस

बंगाल के पहले चरण में चुनाव लड़ रहे कुल 1475 उम्मीदवारों में से 345 यानी 23% उम्मीदवारों के ख़िलाफ़ आपराधिक मुक़दमे हैं। 294 उम्मीदवारों यानी 20% ने खुद के ख़िलाफ़ गंभीर आपराधिक मामले घोषित किए हैं। एडीआर और वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के अनुसार, पहले चरण के हर पाँच में से एक उम्मीदवार पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। गंभीर आपराधिक मामले का मतलब है कि ऐसा अपराध जिसमें 5 साल या उससे ज़्यादा की सजा हो सकती है या जिसमें जमानत न मिलती हो।
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महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध

रिपोर्ट में सबसे चिंताजनक बात यह है कि 98 उम्मीदवारों ने महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े मामले घोषित किए हैं। इनमें से 6 उम्मीदवारों पर बलात्कार और यौन उत्पीड़न के आरोप हैं। इसके अलावा, 105 उम्मीदवारों पर हत्या के प्रयास के गंभीर आरोप हैं।

पहले चरण में इनपर गंभीर केस

पहले चरण में बीजेपी के 152 उम्मीदवारों में से 96 यानी 63% पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। तृणमूल कांग्रेस के 148 उम्मीदवारों में से 48 यानी 32% पर गंभीर मामले हैं। सीपीआई(एम) के 98 उम्मीदवारों में से 36 यानी 37% और कांग्रेस के 151 उम्मीदवारों में से 33 यानी 22% पर गंभीर मामले हैं। कुल आपराधिक मामलों में बीजेपी सबसे आगे है, जहां उसके लगभग 70% उम्मीदवारों ने आपराधिक मामले घोषित किए हैं।

रेड अलर्ट वाली सीटें

पहले चरण की 152 विधानसभा सीटों में से 66 सीटें यानी 43% 'रेड अलर्ट' वाली हैं। इन सीटों पर तीन या उससे ज़्यादा उम्मीदवार आपराधिक मामलों वाले हैं। इसमें नंदीग्राम सीट सबसे ऊपर है, जहां 6 उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले हैं। सूती, खेजुरी और भरतपुर सीटों पर 5-5 उम्मीदवारों पर ऐसे मामले हैं।

नंदीग्राम से बीजेपी के शुभेंदु अधिकारी चुनाव लड़ रहे हैं। उन्होंने अपने हलफनामे में 29 मामले घोषित किए हैं, जिनमें हत्या का प्रयास, महिलाओं से छेड़छाड़ और धमकी देने के 8 मामले शामिल हैं। उनकी मुख्य प्रतिद्वंद्वी टीएमसी की पबित्रा कर पर 7 मामले हैं।

करोड़पति उम्मीदवार

धनबल की बात करें तो टीएमसी सबसे आगे है। पहले चरण में टीएमसी के 106 उम्मीदवार करोड़पति हैं। बीजेपी के 71 और कांग्रेस के 50 करोड़पति उम्मीदवार हैं। उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 1.34 करोड़ रुपये है।

महिलाओं की कम भागीदारी

चुनाव में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम है। पहले चरण में कुल उम्मीदवारों में सिर्फ 11 प्रतिशत यानी 167 महिलाएं हैं। वेस्ट बंगाल इलेक्शन वॉच की राज्य समन्वयक उज्जैनी हालिम ने कहा कि यह 'दुखद तस्वीर' है, खासकर जब राज्य में हाल के समय में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर कई घटनाएँ हुई हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि इतनी कम महिलाओं के मैदान में होने से जीतने वाली महिलाओं की संख्या एक अंक में रह सकती है।