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क्रिश्चियन एस्त्रोसी

फ्रांस में फिर गला काटा गया, कार्टून विवाद पर शक!

फ्रांस के शहर नीस में गिर्जाघर के अंदर प्रार्थना कर रहे तीन ईसाइयों पर हमला कर उनकी हत्या कर दी गई है। इस हमले में एक महिला का गला काट कर कत्ल किया गया है और दो पर चाक़ू से वार किया गया है। हत्या करने वाला 'अल्लाहो अकबर' का नारा लगा रहा था। ऐसे में सवाल यह है कि क्या इसका संबंध पैगंबर मुहम्मद कार्टून विवाद से है? 
नीस के मेयर क्रिश्चियन एस्त्रोसी ने हत्या की पुष्टि करते हुए कहा कि जिस समय हमला हुआ, प्रार्थना करने वाले लोग गिर्जाघर के अंदर ही थे। मेयर एस्त्रोसी ने इसे 'इसलामी फासीवाद' क़रार देते हुए हमले को 'इसलामी आतंकवाद' बताया है।
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क्या है मामला?

बीबीसी के अनुसार, मेयर ने पत्रकारों से कहा कि हमलावर ज़ोर-ज़ोर से 'अल्लाहो अकबर' का नारा लगातार लगाए जा रहा था। फ़्रांस में ये हमला उस वक़्त हुआ है जब फ़्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों के इसलाम पर दिये बयान से मुसलिम देश ग़ुस्से से उबल रहे हैं और फ़्रांसीसी सामान और फ़्रांस के बहिष्कार की बात की जा रही है । 
ये बवाल इस समय भड़का है जब राजधानी पेरिस के एक उपनगर में पैगंबर मुहम्मद का कार्टून दिखाने के कारण इतिहास के एक चालीस वर्षीय शिक्षक पैटी की गर्दन काट दी गई। वहाँ पहुँची पुलिस ने हमलावर पर गोलियाँ चलाईं, जिससे उसकी वहीं मौत हो गई। हमवलावर चेचन मूल का 18 साल का किशोर बताया जाता है।

इसलामी आतंकवाद

इस पर विवाद तब गहराया था जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शिक्षक को इसलामी आतंकवादी हमले का पीड़ित बताया था और कहा था कि वह अभिव्यक्ति की आज़ादी के समर्थक हैं। मैक्रो ने कहा था कि दुनिया में इसलाम संकट से गुज़र रहा है और उसमें सुधार की जरूरत है। 
उनके इस बयान पर तुर्की के राष्ट्रपति रजब तैय्यप अर्दोआन ने तीखी प्रतिक्रिया की थी और कहा था कि मैक्रों का मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है। सऊदी अरब, पाकिस्तान, ईरान और दूसरे मुसलिम देशों ने फ़्रांसीसी सामान के बहिष्कार की अपील कर दी। बांग्लादेश, लीबिया जैसे कुछ दूसरे देशों में हजारों लोगों ने सड़कों पर उतर कर मैक्रों के बयान की निंदा की और विरोध प्रदर्शन किया। 
बीबीसी के अनुसार, स्कूल में हिंसा के बाद 'मैंक्रों ने नागरिकों से हिंसा के विरोध में एकजुट होने की अपील की था और कहा था आतंकवाद कभी जीत नहीं सकता।'

क्या कहा था राष्ट्रपति ने?

मैक्रों ने कहा था, 'कॉन्फ्लैन्स सौं होनोरी में शाम को क्या हुआ मैं इस बारे में बात नहीं करना चाहता, लेकिन आज हमारे एक नागरिक को मार दिया गया। उन्होंने अपने छात्रों को अभिव्यक्ति की आज़ादी के बारे में बताया। उन्होंने उन्हें हर मुद्दे पर सोचने और यकीन करने की आज़ादी के बारे में बताया। उन पर हुआ हमला कायराना हरकत है और वो 'इसलामी आतंकवादी’ हमले से पीड़ित हैं।'
नीस की ताज़ा घटना को उस हत्या से जोड़ कर देखा जा रहा है। सवाल किया जा रहा है कि क्या यह वाकई यूरोप बनाम मुसलिम देश या ईसाईयत बनाम इसलाम का मामला होता जा रहा है।
याद दिला दें कि इसके पहले भी एक बार नीस शहर इस तरह के आतंकवादी हमले के लिए सुर्खियों में आया था। ट्यूनीशियाई मूल के एक ट्रक ड्राइवर ने 16 जुलाई 2016 को बैस्टील दिवस पर एक भीड़ भरे इलाक़े में अपना ट्रक तेज़ रफ़्तार से घुसा दिया था, जिसमें 86 लोगों की मौत हो गई थी। 
इसके कुछ दिन बाद ही रूआं के एक गिर्जाघर में पादरी फ़ादर जाक हैमल का गला काट दिया गया था। फिलहाल इस घटना न केवल फ़्रांस और यूरोप को हिला कर रख दिया है बल्कि पूरे दुनिया सकते में है । 

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