यूएई के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के भारत दौरे के तुरंत बाद पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। इस्लामाबाद एयरपोर्ट विकास सौदे से बाहर होने के क्या कूटनीतिक और आर्थिक मायने हैं, पढ़िए रिपोर्ट।
नरेंद्र मोदी मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान
यूएई यानी संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान को बड़ा झटका दिया है। यूएई ने इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट को चलाने की योजना रद्द कर दी है। यह फ़ैसला यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान की भारत की अचानक यात्रा के कुछ दिनों बाद आया है।
तो क्या इसी राजनीतिक वजह से यह झटका पाकिस्तान को लगा है या कुछ और वजहें हैं? क्या अब यूएई और पाकिस्तान के बीच रिश्ते ख़राब हो रहे हैं? क्या इसकी वजह है यूएई और सऊदी अरब के बीच तनाव में पाकिस्तान का सऊदी की तरफ़ जाना? या फिर पाकिस्तान में हालात इतने ख़राब हो गए हैं कि अब यूएई के लिए वहाँ काम करना मुश्किल हो गया है?
इन सवालों के जवाब ढूंढने से पहले यह जान लें कि इस्लामाबाद इंटरनेशनल एयरपोर्ट का मामला क्या है? इस सौदे से यूएई के बाहर निकलने की यह ख़बर पाकिस्तानी अखबार 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' ने दी है। हालाँकि, आधिकारिक रूप से इसे राजनीति से जोड़ा नहीं गया है, लेकिन क्षेत्रीय बदलावों के बीच यह बड़ा विकास माना जा रहा है।
क्या थी योजना?
अगस्त 2025 से इस्लामाबाद एयरपोर्ट को प्राइवेट तरीके से चलाने की बात चल रही थी। यूएई इसमें रुचि दिखा रहा था क्योंकि उसके पास मुश्किल हालात में एयरपोर्ट चलाने का अनुभव है। इसने अफगानिस्तान जैसे देश में भी एयरपोर्ट चलाया है। लेकिन अबू धाबी को पाकिस्तान में कोई स्थानीय पार्टनर नहीं मिला और उसकी दिलचस्पी ख़त्म हो गई। अब पाकिस्तान एयरपोर्ट को पूरी तरह प्राइवेटाइज करने की तरफ़ बढ़ रहा है। पाकिस्तान सरकार ने कहा है कि कोई डील रद्द नहीं हुई, बल्कि गवर्नमेंट-टू-गवर्नमेंट प्रक्रिया खत्म हुई है। लेकिन रिपोर्टों में इसे यूएई के रुचि नहीं रखने के रूप में बताया गया है।
यूएई के राष्ट्रपति की भारत यात्रा
19 जनवरी 2026 को शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने भारत का एक अहम दौरा किया। यह यात्रा सिर्फ़ 3 घंटे की थी, लेकिन इसमें कई बड़े फ़ैसले हुए-
- दोनों देशों ने रिश्तों को और महत्वाकांक्षी और बहुआयामी बताया।
- 900 भारतीय कैदियों को रिहा करने की मंजूरी दी गई, जो सद्भावना का बड़ा संकेत है।
- रक्षा सहयोग पर लेटर ऑफ इंटेंट साइन हुआ, जो आगे चलकर पूर्ण रणनीतिक रक्षा साझेदारी बन सकता है।
- व्यापार, ऊर्जा और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बात हुई।
यह यात्रा भारत-यूएई के मजबूत होते रिश्तों को दिखाती है।
यूएई-पाकिस्तान रिश्ते क्यों ठंडे पड़ रहे हैं?
पहले यूएई पाकिस्तान का बड़ा व्यापारिक साझेदार था। हजारों पाकिस्तानी वहां काम करते थे और रेमिटेंस का पैसा बहुत आता था। दोनों देशों ने रक्षा, ऊर्जा और निवेश में मिलकर काम किया। लेकिन अब हालात बदल गए हैं।सुरक्षा चिंताएं, लाइसेंसिंग विवाद और पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर की वजह से रिश्ते कमजोर हुए। पाकिस्तान में सरकारी कंपनियों में मिसमैनेजमेंट और राजनीतिक हस्तक्षेप से भारी नुक़सान हुआ।
पिछले साल पाकिस्तान इंटरनेशनल एयरलाइंस यानी पीआईए जैसे एसेट बेचे गए। यूएई को पाकिस्तान के इंफ्रास्ट्रक्चर और गवर्नेंस पर भरोसा कम हुआ।
यूएई-सऊदी तनाव और पाकिस्तान
यूएई और सऊदी अरब पहले कभी क़रीबी सहयोगी थे। अब यमन जैसे मुद्दों पर दोनों आमने-सामने हैं। सऊदी ने यूएई के समर्थित अलगाववादी गुटों को रोका है। सऊदी मीडिया ने अबू धाबी की नीतियों की खुली आलोचना की है।
इस बीच, पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ रक्षा के क्षेत्र में गहरा रिश्ता बनाया है। सितंबर 2025 में स्ट्रैटेजिक म्यूचुअल डिफेंस एग्रीमेंट साइन हुआ। इसमें एक देश पर हमला दूसरे देश पर हमला माना जाएगा। सऊदी पाकिस्तान की सैन्य ताक़त पर भरोसा कर रहा है। वहीं, यूएई ने भारत के साथ नए रक्षा डील साइन किए हैं। गल्फ के दो बड़े देशों के बीच बढ़ता मतभेद पाकिस्तान के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है। यूएई का एयरपोर्ट से पीछे हटना इसी का असर माना जा रहा है।
भारत के लिए क्या मतलब?
यह घटना भारत के लिए सकारात्मक है। भारत-यूएई रिश्ते मज़बूत हो रहे हैं, जबकि पाकिस्तान के साथ यूएई के रिश्ते कमजोर पड़ रहे हैं। क्षेत्रीय जियो-पॉलिटिक्स में बदलाव तेज हो रहा है। यूएई अब भारत को ज़्यादा महत्व दे रहा है, जो आर्थिक और रक्षा दोनों क्षेत्रों में फायदेमंद साबित हो सकता है।
पाकिस्तान को अब इस्लामाबाद एयरपोर्ट के लिए नया रास्ता ढूंढना होगा और यह उसके इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार की चुनौती को और बढ़ा देगा।