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कोरोना: ट्रंप की बेवक़ूफ़ी से लाखों अमेरिकियों की जान सांसत में

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेवक़ूफ़ी की बड़ी भारी क़ीमत उनका देश चुका रहा है। उनकी बेवक़ूफ़ी का एक और ताज़ा उदाहरण सामने आया है। ट्रंप अब मलेरिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा हाइड्रोजाइक्लोरोक्वीन के ‘चमत्कार’ के बारे में बात कह रहे हैं। वह मलेरिया के इलाज में होने वाली इस दवा को कोरोना के मरीजों को देने की वकालत कर रहे हैं। ऐसा वह तब कह रहे हैं जब तमाम डॉक्टर और स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसका विरोध कर रहे हैं। और न ही किसी प्रयोगशाला में यह प्रमाणित हुआ है कि कोरोना का इलाज इस दवा से संभव है।

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप जब रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस करने आए तो उनके अपने ही बयानों में भारी अंतर्विरोध दिखा। बेवक़ूफ़ी दिखी। और यह दिखा कि वह डॉक्टरों और विशेषज्ञों की बातों को नज़रअंदाज़ कर अपने ही ढंग से कोरोना से निपटना चाहते हैं। जब वह कोरोना वायरस टास्क फ़ोर्स को लेकर मीडिया को जानकारी देने के लिए आए तो उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस पर मलेरिया वाली इस दवा के प्रभाव पर और अधिक अध्ययन की ज़रूरत है। उन्होंने यह भी कहा कि मलेरिया वाली दवा का अभी परीक्षण किया जा रहा है। इसके बावजूद ट्रंप ने कह दिया कि इस दवा का इस्तेमाल कोरोना मरीजों के लिए किया जाए। ट्रंप के बगल में ही सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़े दो बड़े अफ़सर खड़े थे जिन्होंने मलेरिया वाली दवा देने की बात का समर्थन करने से इनकार कर दिया है। 

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इसके बाद ट्रंप कहते हैं, 'लेकिन मैं क्या जानता हूँ? मैं डॉक्टर नहीं हूँ'। फिर वह कहते हैं, 'अगर यह (दवा) काम करती है, तो यह शर्म की बात होगी कि हमने इसे जल्दी इस्तेमाल नहीं किया'। ट्रंप ने यह भी कहा कि संघीय सरकार ने फिर से दवा की 29 मिलियन गोलियाँ खरीदी और स्टॉक की थीं। 'हम उन्हें विभिन्न प्रयोगशालाओं, सेना में भेज रहे हैं, हम उन्हें अस्पतालों में भेज रहे हैं।'

अब ट्रंप के इस बयान के बारे में सोचिए। वह ख़ुद कह रहे हैं कि यह प्रमाणित नहीं हुआ और फिर उस दवा के इस्तेमाल करने को भी कह रहे हैं। 

क्या स्वास्थ्य और इलाज के बारे में सामान्य बात जानने वाला आदमी भी यह नहीं कहेगा कि जब तक प्रयोगशाला में साबित नहीं हो जाए तब तक दवा का इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए!

जब एक रिपोर्टर ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ एलर्जी एंड इंफेक्शियस डिजीज के निदेशक डॉ. एंथनी एस फ़ॉसी से पूछा कि इस दवा के विषय में उनकी राय क्या है तो बगल में खड़े ट्रंप ने उन्हें जवाब देने से रोक दिया। ट्रंप ने साफ़ किया कि वह नहीं चाहते कि डॉक्टर जवाब दें। रिपोर्टर ने सवाल पूछने के दौरान यह भी ज़िक्र किया था कि डॉ. फ़ॉसी, ख़ुद दवा के असर के बारे में अधिक उलझन में हैं। ट्रंप ने कह दिया कि आपको पता है कि इस सवाल का मैं कितनी बार जवाब दे चुका हूँ, शायद 15 बार?

अभी तक यह कहीं भी प्रमाणित नहीं हुआ है कि हाइड्रोजाइक्लोरोक्वीन कोरोना के इलाज में काम करता है। हालाँकि चीन में शोधकर्ताओं ने कहा था अपेक्षाकृत कोरोना के सामान्य मरीज को जल्दी ठीक होने में इस दवा से सहायता मिली थी पर उनके इस दावे को अभी तक क्लिनिकल ट्रायल में पुष्ट नहीं किया जा सका है। अंदेशा तो यह भी जताया जा रहा है कि मलेरिया वाली इस दवा का मरीजों पर कहीं कोई ग़लत प्रभाव न पड़े।

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वैसे ट्रंप का ऐसी अजीबोगरीब बातें कहना कोई नयी बात नहीं है। हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि कोरोना एक सामान्य फ्लू यानी सर्दी-जुकाम की तरह ही है जो 'चमत्कारिक ढंग से' ग़ायब हो जाएगा। अमेरिका जैसे देश के राष्ट्रपति यदि कोरोना जैसे वायरस पर ऐसा नज़रिया रखेंगे तो स्थिति कितनी बुरी हो सकती है इसका अंदाज़ा भर लगाया जा सकता है।

ट्रंप के ऐसे ही बयानों और रविवार को प्रेस कॉन्फ़्रेंस के बाद ब्रॉउन यूनिवर्सिटी की इमर्जेंसी विभाग की चिकित्सक डॉ. मेगन एल रने ने एक इंटरव्यू में कहा है कि उन्होंने आज तक चुने हुए किसी ऐसे अधिकारी को नहीं देखा है जैसा ट्रंप ‘चमत्कारिक इलाज’ का प्रचार करते हैं। अब यदि ऐसे इलाज के भरोसे रहा जाएगा तो लोगों की ज़िंदगियाँ कितनी सुरक्षित होंगी?

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