डोनाल्ड ट्रंप की वार्ता और धमकी साथ-साथ। ईरान को आख़िर संदेश क्या देना चाहते हैं? यदि बातचीत करना चाहते हैं तो फिर धमकी क्यों? दबाव की रणनीति या फिर सिर्फ़ बड़बोलापन ही?
अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता सोमवार को इस्लामाबाद में होगी। इसकी पुष्टि खुद डोनाल्ड ट्रंप ने की है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि उनकी टीम सोमवार शाम को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद पहुंच रही है। वहां ईरान के साथ युद्ध रोकने और समझौते के लिए बातचीत होगी। लेकिन ट्रंप ने इसके साथ ही एक सख्त चेतावनी भी दे डाली है कि अगर ईरान उचित और वाजिब डील नहीं मानता तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट और हर ब्रिज को तबाह कर देगा।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "कल ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी की- यह हमारे सीजफायर समझौते का पूरी तरह उल्लंघन है! उनकी कई गोलियाँ एक फ्रेंच जहाज और एक ब्रिटिश मालवाहक जहाज पर निशाना लगाकर चलाई गईं। यह अच्छी बात नहीं है, है कि नहीं? मेरे प्रतिनिधि पाकिस्तान के इस्लामाबाद जा रहे हैं। वे कल शाम तक वहाँ पहुँचेंगे और ईरान के साथ बातचीत करेंगे।"
ईरान को ही नुक़सान?
अमेरिकी राष्ट्रपति ने पोस्ट में कहा, "ईरान ने हाल ही में कहा था कि वह होर्मुज स्ट्रेट बंद कर देगा। यह अजीब बात है, क्योंकि हमारा ब्लॉकेड पहले ही इसे बंद कर चुका है। ईरान अनजाने में हमारी मदद कर रहा है। स्ट्रेट बंद होने से रोजाना 50 करोड़ डॉलर का नुक़सान हो रहा है और यह नुकसान ईरान को ही हो रहा है। अमेरिका को कुछ भी नहीं हो रहा। दरअसल, अभी कई जहाज अमेरिका के टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का की ओर जा रहे हैं ताकि तेल लाद सकें- यह सब ईरान की आईआरजीसी की वजह से हो रहा है, जो हमेशा 'ताकतवर बनने' का दिखावा करती रहती है!"
ईरान को तबाह करने की धमकी
ट्रंप ने आगे कहा कि "हम ईरान को एक बहुत उचित और वाजिब डील ऑफर कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि वे इसे मान लेंगे। अगर उन्होंने डील नहीं मानी, तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट और हर पुल को तबाह कर देगा। अब नरम व्यवहार खत्म! वे बहुत तेजी से और आसानी से गिर जाएंगे। अगर उन्होंने डील स्वीकार नहीं की, तो जो करना जरूरी है, उसे करने का गर्व मुझे होगा। पिछले 47 सालों से जो काम दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था, वह अब होगा। ईरान की मारक मशीन का अब अंत होना चाहिए!"इस बीच ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में पुष्टि की कि उनके विशेष दूत स्टिव विटकोफ और उनके दामाद जेरेड कुश्नर इस्लामाबाद पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि स्टिव कल रात को जा रहा है। बातचीत उनके पहुंचने के तुरंत बाद शुरू हो जाएगी। इस बार उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस इस दौर में शामिल नहीं होंगे।
पहला दौर कुछ दिन पहले इस्लामाबाद में हुआ था, जिसमें कोई समझौता नहीं हो सका था। अब दूसरा दौर शुरू होने जा रहा है।
पिछले कुछ हफ्तों से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बहुत बढ़ा हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के तेल व्यापार का बेहद अहम रास्ता है। ईरान ने इसे कई बार बंद करने की घोषणा की, जिससे दुनिया भर में तेल की कीमतें प्रभावित हो रही हैं।
होर्मुज में शनिवार को भारी अफरा-तफरी रही
होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही लगभग पूरी तरह रुक गई है। पिछले कुछ घंटों में ज्यादा हलचल नहीं दिखी। सिर्फ कुछ क्रूज जहाज ओमान के पानी से गुजरे, और उनमें से एक ने रास्ता पार करते समय कोई घटना बताई। शनिवार को बहुत बड़ा कन्फ्यूजन था। कई जहाज लारक द्वीप के पास से गुजरे, जहाँ ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड निगरानी कर रहा था। अचानक वे सब मुड़ गए और पश्चिम की ओर वापस जाने लगे।
भारतीय टैंकर पर गोलीबारी
भारतीय टैंकर को पहले स्ट्रेट पार करने की अनुमति मिली थी, लेकिन बाद में आईआरजीसी ने वो अनुमति वापस ले ली और जहाज पर गोली चला दी। जिससे जहाज को वापस मुड़ना पड़ा। होर्मुज में घुस रहे एक और जहाज पर भी गोलीबारी की गई जिससे उसे भी वापस लौटना पड़ा। शनिवार को पूरे दिन बस यही भारी अफरा-तफरी मची रही।
जहाजों को पहले ईरान की शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं, उसके बाद जब वे ईरानी अधिकारियों को पार कर लेते हैं, तो उन्हें अमेरिकी नौसेना के ब्लॉकेड यानी नाकाबंदी का सामना करना पड़ता है। इसलिए अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए इस होर्मुज से गुजरना बहुत जटिल और मुश्किल हो गया है।
बहरहाल, पहले दौर की बातचीत में कोई नतीजा नहीं निकला। अब पाकिस्तान के जरिए ही दूसरे दौर की वार्ता हो रही है। पाकिस्तान दोनों तरफ़ से बातचीत कराने में मदद कर रहा है।
ट्रंप की इस ताज़ा पोस्ट से साफ है कि अमेरिका बातचीत चाहता है, लेकिन अगर ईरान नहीं माना तो सैन्य कार्रवाई की पूरी तैयारी है। ईरान की तरफ से अभी इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
दुनिया इस बात पर नजर रखे हुए है कि इस्लामाबाद में होने वाली ये नई बातचीत कोई नतीजा देती है या नहीं। अगर बातचीत फेल होती है तो होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।