भारत और यूरोपीय देशों के ख़िलाफ़ ट्रंप के टैरिफ़ के बीच यूरोपीय संघ और भारत में ऐतिहासिक व्यापार समझौता जल्द ही फाइनल हो सकता है। ईयू की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने स्विट्जरलैंड के दावोस में विश्व आर्थिक मंच पर मंगलवार को यह बड़ा संकेत दिया। उन्होंने कहा कि इस समझौते को 'मदर ऑफ़ ऑल डील्स' यानी सभी सौदों में सबसे बड़ा सौदा कहा जा रहा है।

उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने साफ़ कहा है कि यूरोपीय संघ यानी ईयू और भारत के बीच एक बहुत बड़ा मुक्त व्यापार समझौता यानी एफ़टीए अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। यह समझौता दुनिया की आधी आबादी को जोड़ेगा और वैश्विक जीडीपी का लगभग एक चौथाई हिस्सा कवर करेगा। वॉन डेर लेयेन ने अपनी स्पीच में कहा, 'अभी कुछ काम बाकी है। लेकिन हम एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते के बेहद क़रीब हैं। कुछ लोग इसे मदर ऑफ़ ऑल डील्स कहते हैं। यह समझौता 2 अरब लोगों का बाजार बनाएगा, जो दुनिया की कुल जीडीपी का लगभग एक चौथाई होगा।' उन्होंने यह भी बताया कि दावोस के बाद अगले हफ्ते वे भारत आएंगी, जहां इस समझौते पर अंतिम बातचीत हो सकती है।

समझौता कितना अहम?

यह समझौता भारत और 27 देशों के समूह ईयू को जोड़ेगा। भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है, जबकि ईयू वैश्विक व्यापार का मजबूत स्तंभ है। दोनों मिलकर सप्लाई चेन को बदल सकते हैं। ईयू के लिए भारत एक भरोसेमंद पार्टनर है, जबकि भारत के लिए ईयू दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।

इस समझौते से क्या होगा फायदा?

  • भारत के निर्यात को आसानी होगी।
  • भारत मैन्युफैक्चरिंगमें आगे बढ़ सकेगा।
  • ईयू को भारत में ज्यादा निवेश और बाजार मिलेगा।
  • साफ ऊर्जा, दवाइयां, एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटल सेवाओं जैसे नए क्षेत्रों में सहयोग बढ़ेगा।
  • 2023 में दोनों के बीच माल का व्यापार 124 अरब यूरो और सेवाओं का 60 अरब यूरो था। समझौते से यह और बहुत बढ़ सकता है।

एफ़टीए पर 2007 में शुरू हुई थी बातचीत

भारत-ईयू एफ़टीए की बात 2007 से चल रही है। लेकिन 10 साल तक यह रुकी रही। 2022 में फिर शुरू हुई, जब दोनों पक्षों में नई राजनीतिक इच्छाशक्ति आई। साथ ही ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल बना, जिससे टेक्नोलॉजी, डिजिटल नियम और सप्लाई चेन पर सहयोग बढ़ा। अब बात सिर्फ टैरिफ की नहीं, बल्कि नियमों को मैच करने की भी है।

क्या-क्या बाकी है?

वैसे तो एफ़टीए को लेकर बातचीत अंतिम दौर में होने की बात कही गई है, लेकिन कुछ चुनौतियां भी हैं। ईयू कारों, वाइन और स्पिरिट्स पर ज्यादा टैरिफ कट चाहता है, लेकिन भारत अपने उत्पादकों की रक्षा करना चाहता है। भारत आईटी इंजीनियर जैसे कुशल पेशेवरों के लिए आसान वीजा और मोबिलिटी चाहता है, लेकिन ईयू में सदस्य देशों के नियम अलग-अलग हैं। पर्यावरण मानक, सरकारी खरीद और नियमों को एकसमान करने जैसे मुद्दे भी बाक़ी हैं।
वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ये राजनीतिक रूप से संवेदनशील हैं, इसलिए अभी काम बाक़ी है। लेकिन उम्मीद है कि उनकी अगले हफ़्ते की भारत यात्रा में ये मुद्दे सुलझ सकते हैं। 27 जनवरी को भारत-ईयू लीडर्स समिट में समझौते की घोषणा हो सकती है। कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि 26 या 27 जनवरी को समझौता फाइनल हो सकता है।

समझौता होने पर क्या फायदा?

दोनों पक्षों के बीच माल, सेवाएं और निवेश आसानी से आएंगे-जाएंगे। बाजार ज्यादा सुरक्षित और अनुमानित होगा। टेक्नोलॉजी और स्टैंडर्ड पर सहयोग बढ़ेगा। दुनिया में बदलते व्यापार के दौर में भारत-ईयू की रणनीतिक साझेदारी मजबूत होगी। यह ईयू का हाल के सालों का सबसे बड़ा व्यापार समझौता होगा। यह समझौता न सिर्फ आर्थिक, बल्कि रणनीतिक रूप में भी अहम है। दुनिया में अमेरिका-चीन तनाव और सप्लाई चेन बदलाव के बीच भारत और ईयू का यह क़दम नया संतुलन बना सकता है।