न्यूयॉर्क के मेयर ज़ोहरान ममदानी ने व्हाइट हाउस पर मिनियापोलिस में आतंक फैलाने का आरोप लगाते हुए ICE (Immigration and Customs Enforcement) को खत्म करने की मांग की है। ट्रंप प्रशासन की कड़ी आप्रवासन नीति और डिपोर्टेशन अभियान के बीच मिनियापोलिस में फेडरल एजेंट्स द्वारा दो अमेरिकी नागरिकों की हत्या ने पूरे देश में आक्रोश फैला दिया है। तमाम शहरों में प्रदर्शन हो रहे हैं।

ममदानी ने एबीसी न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा कि मिनियापोलिस में चल रही आप्रवासन प्रवर्तन कार्रवाई "भयानक" (horrific) है। उन्होंने आरोप लगाया कि व्हाइट हाउस लोगों को उनकी आंखों, कानों और हकीकत से मुंह मोड़ने को मजबूर कर रहा है। ममदानी ने ICE को "क्रूर और अमानवीय" बताया और कहा कि ये छापेमारी सार्वजनिक सुरक्षा के हित में कुछ नहीं करतीं। उन्होंने स्पष्ट कहा, "मैं ICE को खत्म करने का समर्थन करता हूं क्योंकि यह एजेंसी लोगों को आतंकित कर रही है, चाहे उनकी आप्रवासन स्थिति कुछ भी हो।"

मिनियापोलिस में 7 जनवरी को ICE एजेंट ने 37 वर्षीय रेनी गुड (Renee Good) को गोली मार दी, जो अमेरिकी नागरिक थीं और उनका इमीग्रेशन से कोई लेनादेना नहीं था। इसके बाद 24 जनवरी के आसपास एक और अमेरिकी नागरिक एलेक्स प्रेटी (Alex Pretti) की फेडरल एजेंट द्वारा हत्या कर दी गई, जो एक नर्स थे और विरोध प्रदर्शन में शामिल थे। इन घटनाओं ने शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भड़का दिए, जहां हजारों लोग सड़कों पर उतरे और "Abolish ICE" (ICE को खत्म करो) के नारे लगाए।

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मेयर ममदानी ने ट्वीट कर कहा कि पूरे अमेरिका में हजारों लोग ICE द्वारा फैलाई जा रही हिंसा के खिलाफ विरोध कर रहे हैं, जबकि फेडरल एजेंट्स ने मिनियापोलिस में एक और व्यक्ति की हत्या कर दी। उन्होंने न्यूयॉर्क शहर को ऐसी कार्रवाइयों से बचाने का वादा किया और राष्ट्रपति ट्रंप को सीधे संदेश दिया कि ये छापेमारी अमानवीय हैं।

मिनियापोलिस में हजारों लोग सर्दी के बावजूद सड़कों पर उतरे, "ICE Out Now" और "Justice for Alex" के पोस्टर लिए। लॉस एंजिल्स, शिकागो, फिलाडेल्फिया, न्यूयॉर्क और सैन डिएगो में सैकड़ों-हजारों लोगों ने मार्च निकाले, जहां "Abolish ICE" के नारे गूंजे। नेशनल नर्सेस यूनाइटेड जैसी संस्थाओं ने एलेक्स प्रेटी की याद में हफ्ते भर की मोमबत्ती जुलूस और विरोध की घोषणा की, साथ ही कांग्रेस से ICE की फंडिंग रोकने की मांग की।





कई डेमोक्रेटिक नेता जैसे इल्हान ओमार, रशीदा त्लाइब और अन्य ने भी ICE को खत्म करने की मांग दोहराई। पोल में अब 46% अमेरिकी ICE को खत्म करने के पक्ष में हैं, जो हाल के महीनों में बड़ा बदलाव है।

ये विरोध ट्रंप प्रशासन की बड़े पैमाने पर डिपोर्टेशन मुहिम के खिलाफ हैं, जिसमें ICE को नए फंडिंग और अधिकार दिए गए हैं। ममदानी और अन्य आलोचकों का कहना है कि यह एजेंसी अब कानून लागू करने से ज्यादा लोगों को डराने और हिंसा फैलाने का काम कर रही है। स्थिति दिन-ब-दिन गर्म हो रही है, और "Abolish ICE" का नारा फिर से जोर पकड़ रहा है।