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भारतीय मूल के अफ़सर की अमेरिका में हत्या, हेट क्राइम?

भारतीय मूल के अमेरिकी पुलिस अफ़सर संदीप सिंह धालीवाल को टेक्सस में ड्यूटी के दौरान गोली मार दी गई। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उनकी मौत हो गई। यह अभी पता नहीं चल सका है कि यह नफ़रत की वजह से किया गया अपराध यानी 'हेट क्राइम' था या क़ानून व्यवस्था भंग करने की सामान्य घटना थी। अमेरिका में सिखों को निशाना बनाने की यह पहली वारदात नहीं है। वहाँ स्थानीय लोग कई बार दाढ़ी-पगड़ी की वजह से सिखों को अल-क़ायदा सदस्य समझ कर उन पर हमला कर देते हैं। इस मामले में क्या हुआ है, इसकी रिपोर्ट आनी बाकी है। पर हेट क्राइम की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। 
धालीवाल हैरिस काउंटी शेरिफ़ दफ़्तर में डिप्टी के पद पर तैनात थे। शेरिफ़ एड गोंज़ालिज ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि धालीवाल ड्यूटी पर थे, सड़क पर परिवह नियंत्रित कर रहे थे जब यह वारदात हुई। उन्होंन एक गाड़ी वाले को रोकी तो वह तमतमाता हुआ निकला और दो गोलियाँ धालीवाल को मार दी। प्रशासन ने धालीवाल को हेलीकॉप्टर से एक अस्पताल ले जाकर दाखिला कराया, पर बाद में उनकी मौत हो गई। शेरिफ़ ने धालीवाल की तारीफ़ करते हुए ट्वीट किया। उन्होंने धालीवाल की मौत को काउंटी ही नहीं, पूरे समुदाय के लिए अपूरणीय क्षति बताया। 

सेनेटर ने दुख जताया

टेक्सस के सेनेटर टेड क्रूज़ ने धालीवाल की मौत को दुखद बताते हुए उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की है। उन्होंने ट्वीट किया, 'ड्यूटी निभाते हुए टेक्सस के एक और पुलिस अफ़सर की मृत्यु की दुखद ख़बर मिली है। मैं और हेडी लेफ़्टीनेंट संदीप सिंह धालीवाल और उनके परिवार के लिए प्रार्थना करते हैं, वह हैरिस काउंटी शेरिफ़ कार्यालय में काम करने वाले पहले सिख थे, जो अपने धर्म का पालन भी कर रहे थे, आज उनकी हत्या कर दी गई।' 
अमेरिकी कांग्रेस के निचले सदन हाउस ऑफ़ रीप्रेज़ेन्टेटिव्स के सदस्य केविन ब्रैडी ने भी ट्वीट कर दुख जताया है। उन्होंने धालीवाल को 'अमेरिका का हीरो' बताया और कहा कि उन्होंने पूरे साहस के साथ लोगों की सेवा की। 

सुर्खियों में थे धालीवाल

धालीवाल 2015 में अमेरिकी अख़बार की सुर्खियों में छा गए, जब उन्होंने सिख धर्म के प्रतीक पगड़ी और दाढ़ी रखने का अधिकार हासिल कर लिया। वह टेक्सस के पहले सिख पुलिस अफ़सर थे और उसके पहले विभाग में किसी को पगड़ी या दाढ़ी रखने की अनुमति नहीं थी। विभाग ने कहा था कि धालीवाल अमेरिकी समाज की विविधता के प्रतीक हैं। 
धालीवाल अमेरिकी सिखो के शीर्ष संगठन 'युनाइटेड सिख्स' के सदस्य थे। हालाँकि अभी तक यह नहीं पता चल सका है कि उनकी हत्या हेट क्राइम थी या नहीं, पर इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। यह सच है कि अमेरिका में लगभग डेढ़ सौ साल से सिख रहते आए हैं, अब उनकी तादाद लाखों में है। पर यह भी सच है कि वे श्वेत अमेरिकियों के निशाने पर रहते हैं और जब-तब उन पर हमले होते रहते हैं। ये हमले 9/11 आतंकवादी हमलोें के बाद बढ़ गए हैं। कई अमेरिकी बढ़ी हुई दाढ़ी और पगड़ी की वजह से सिखोें को अल-क़ायदा का सदस्य समझने की ग़लती कर बैठते हैं। 
'युनाइटेड सिख्स' ने एक टाइम लाइन जारी कर बताया है कि अमेरिका में कब-कब सिखों पर हमले हुए हैं। यह सूचा बहुत लंबी है, पिछले 10 साल में 50 से अधिक वारदात हुई हैं।  
  • 25 अगस्त, 2019 को उत्तरी कैलिफ़ोर्निया के ट्रेसी में परमजीत सिंह को रात में टहलते समय गोली मार दी गई। इस मामले में एक श्वेत अमेरिकी पुरुष को गिरफ़्तार किया गया। 
  • 25 जुलाई, 2019 को उत्तरी कैलिफ़ोर्निया के ही मोडेस्टो के एक गुरुद्वारे में एक व्यक्ति घुस गया, गुरुद्वारा के पुजारी अमरजीत सिंह को घूंसे मारे, उन्हें गालियाँ बकीं, उन्हें अपमानित किया और उन्हें अपने देश लौट जाने को कहा।
  • 16 अगस्त, 2018 को न्यू जर्सी के ईस्ट ऑरंज में तरलोक सिंह अपनी दुकान पार्क डेली और ग्रॉसरी में मृत पाए गए, उनके शरीर पर चाकू के निशान थे।
  • 6 अगस्त, 2018 को कैलीफ़ोर्निया के मैन्टेका में 71 साल के बुजुर्ग साहिब सिंह जब पार्क में टहल रहे थे, दो श्वेत किशोरों ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें बुरी तरह पीटा।  
 
युनाइटेड सिख्स ने अपने वेबसाइट पर एक बयान जारी कर संदीप सिंह धालीवाल की मृत्यु पर शोक जताया है और उनके लिए न्याय की माँग की है। इसके साथ ही उसने धालीवाल के परिवार के लिए पैसे एकत्रित करने की मुहिम भी छेड़ दी है। 
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