डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ अच्छी बातचीत होने का दावा किस आधार पर कर दिया? ईरान ने तो ट्रंप के बातचीत के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। क्या ईरानी चेतावनी के बाद बदला अमेरिका का रुख?
ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों को खारिज कर दिया है जिसमें ट्रंप ने कहा था कि ईरान और अमेरिका के बीच बहुत अच्छी और सकारात्मक बातचीत हुई है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने इसे सिरे से नकारते हुए कहा कि वाशिंगटन और तेहरान के बीच कोई बातचीत नहीं हो रही है। यह सब ऊर्जा की क़ीमतें कम करने और अमेरिका की सैन्य योजनाओं को तैयारी के लिए वक़्त देने की कोशिश है। तो क्या ईरान की सख़्त चेतावनी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पीछे हट गए? कम से कम ईरान के एक सरकारी चैनल ने तो यही ख़बर दी है।
ईरान के सरकारी मीडिया मेहर न्यूज़ ने विदेश मंत्रालय के हवाले से बताया कि ट्रंप का दावा ग़लत है। कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संवाद नहीं है। फार्स न्यूज़ एजेंसी ने भी सुरक्षा सूत्रों के हवाले से कहा कि अमेरिका के साथ कोई संपर्क नहीं है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया था कि पिछले दो दिनों में मध्य पूर्व में दुश्मनी पूरी तरह ख़त्म करने पर 'बहुत अच्छी और सकारात्मक बातें' हुई हैं। उन्होंने ईरान के पावर प्लांटों पर हमले रोकने का भी ऐलान किया है।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर क्या लिखा?
ट्रंप ने सोमवार को ट्रूथ सोशल पर लिखा, 'मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिनों में मध्य पूर्व में हमारी आपसी दुश्मनी को पूरी तरह से ख़त्म करने के संबंध में बहुत अच्छी और सार्थक बातचीत हुई है। इन गहरी, विस्तृत और रचनात्मक बातचीत के मिजाज और लहजे को देखते हुए मैंने युद्ध विभाग को निर्देश दिया है कि वे ईरान के पावर प्लांट और ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाले किसी भी और सभी सैन्य हमलों को पाँच दिनों के लिए टाल दें; यह फैसला चल रही बैठकों और चर्चाओं की सफलता पर निर्भर करेगा।'ईरान की चेतावनी से ट्रंप पीछे हटे: सरकारी टीवी
ट्रंप की इस पोस्ट के तुरंत बाद ईरान के सरकारी टीवी पर एक ग्राफिक दिखाया गया, 'ईरान की सख्त चेतावनी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति पीछे हट गए।' ट्रंप का यह बड़ा ऐलान ईरान की उस धमकी के बाद आया जिसमें ईरानी सेना ने सोमवार को कहा कि अगर उसके पावर प्लांटों पर हमला हुआ तो वो गल्फ देशों में बारूदी सुरंगों से अमेरिकी और इसराइली सुविधाओं को उड़ा देगा।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार ईरानी अधिकारियों ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य पहले जैसी स्थिति में नहीं लौटेगा। यह जगह दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल का रास्ता है। ऊर्जा बाजार अस्थिर रहेंगे। आईआरजीसी से जुड़ी तस्नीम न्यूज एजेंसी ने कहा कि अमेरिका ईरान के अहम ढाँचे पर हमला करने से पीछे हट गया, क्योंकि वित्तीय बाजारों पर दबाव था। ईरान खुद की रक्षा करता रहेगा जब तक डिटरेंस हासिल नहीं हो जाता।
ईरान ने कहा कि पड़ोसी देशों से तनाव कम करने के लिए कुछ पहल आई हैं, लेकिन जवाब साफ है कि हमने यह युद्ध शुरू नहीं किया। सभी अनुरोध वाशिंगटन को भेजे जाएँ।
होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से बाज़ार हिले
यह युद्ध 28 फ़रवरी को शुरू हुआ था, जब अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर समन्वित हमले किए। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई और कई बड़े सैन्य व राजनीतिक नेता मारे गए। उसके बाद से युद्ध जारी है। ईरान ने जवाबी हमले किए हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया है। इससे तेल की क़ीमतें बहुत बढ़ गई हैं और वैश्विक ऊर्जा बाजार प्रभावित है।ट्रंप ने हाल में होर्मुज को फिर से खोलने के लिए अल्टीमेटम दिया था और ईरान ने चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ईरान के पावर प्लांट्स पर हमला करता है तो होर्मुज पूरी तरह बंद रहेगा और तब तक नहीं खुलेगा जब तक नुकसान की भरपाई नहीं हो जाती।
ईरान का कहना है कि ट्रंप के दावे सिर्फ घरेलू दबाव कम करने और ऊर्जा कीमतें नीचे लाने की कोशिश हैं, लेकिन कोई वास्तविक बातचीत नहीं है। युद्ध अब तीसरे हफ्ते में है और दोनों तरफ़ से हमले जारी हैं। स्थिति बहुत तनावपूर्ण बनी हुई है और दुनिया भर में ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।