ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनावपूर्ण युद्ध को रोकने के लिए पाकिस्तान ने एक अहम कूटनीतिक पहल की है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच शांति स्थापित करने के लिए एक दो-चरणीय (Two-Phase) सीज़फायर प्रस्तावित किया है। इस योजना के तहत, अगर सभी पक्ष सोमवार देर रात तक सहमत हो जाते हैं, तो तुरंत संघर्ष विराम लागू किया जा सकता है। इससे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को दोबारा खोला जा सकेगा। इस पहल को इस्लामाबाद समझौता नाम दिया गया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बक़ई ने कहा है कि तेहरान ने अमेरिका को दिए जाने वाले अपने राजनयिक जवाब को अंतिम रूप दे दिया है और उचित समय पर इसका खुलासा करेगा। लेकिन इस समझौते की कामयाबी तभी संभव है, जब सभी पक्ष सोमवार को देर रात तक “सहमत” हो जाएं।

‘इस्लामाबाद समझौता’: संघर्ष विराम की रूपरेखा

पाकिस्तान ने एक शांत कूटनीतिक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसे अनौपचारिक रूप से “इस्लामाबाद समझौता” कहा जा रहा है। इस प्रस्ताव को वॉशिंगटन और तेहरान, दोनों के साथ साझा किया गया है। 
इस योजना के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:
  • पहला चरण: तत्काल युद्धविराम (Ceasefire)
  • दूसरा चरण: दीर्घकालिक और व्यापक शांति समझौता
  • अंतिम चरणः इस्लामाबाद में आमने-सामने की बातचीत होगी

अंतिम समझौते में शायद ये प्रमुख शर्तें शामिल हों

  • ईरान की ओर से परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता
  • इसके बदले में अमेरिका द्वारा आर्थिक प्रतिबंधों में राहत
  • ईरान की अमेरिका में फ्रीज संपत्तियों को छोड़ना या उनकी पाबंदी खत्म करना

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ईरान का स्टैंड- स्पष्ट विरोध, कोई सीधी बातचीत नहीं

ईरान ने कहा है कि इस समय वह वाशिंगटन और ईरान के बीच किसी भी सीधी बातचीत में शामिल नहीं होगा। दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता के माध्यम से बातचीत की बात कर रहे हैं, लेकिन स्पष्ट रूप से कहें तो, इस कूटनीतिक प्रयास से युद्धविराम और तनाव कम होने की संभावना बहुत कम है, क्योंकि ज़मीनी हकीकत तनाव कम होने से बहुत दूर है। धमकी भरे शब्दों की बात करें तो, हमें यह ध्यान रखना चाहिए कि अमेरिकी राष्ट्रपति की ओर से ईरान को इस तरह की धमकियों का सामना पहली बार नहीं करना पड़ा है।
अगर शुरुआती सहमति बनती है, तो इसे एक समझौता ज्ञापन (MoU) के रूप में औपचारिक रूप दिया जाएगा और पाकिस्तान के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक तरीके से फैलाया जाएगा। वर्तमान में पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मुख्य कम्युनिकेशन चैनल के रूप में उभरा है। इससे पहले ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरगची कह चुके हैं कि ईरान कभी भी पाकिस्तान में बातचीत के खिलाफ नहीं रहा है।
सबसे पहले यूएस मीडिया Axios ने सोमवार सुबह बताया था कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थों के बीच 45 दिनों के संघर्ष विराम पर चर्चा चल रही है, जो आगे चलकर स्थायी शांति का रास्ता खोल सकता है। हालांकि, अमेरिकी और इसराइली अधिकारियों का कहना है कि अगले 48 घंटों में किसी आंशिक समझौते की संभावना कम है। फिर भी, यह प्रयास युद्ध को और भड़कने से रोकने का आखिरी मौका माना जा रहा है।

फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की अहम भूमिका

इस पूरी कूटनीतिक पहल के केंद्र में पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, उन्होंने पूरी रात  अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ लगातार संपर्क बनाए रखा। इस सक्रियता से पाकिस्तान इस संकट में एक महत्वपूर्ण बैक-चैनल मध्यस्थ के रूप में उभरा है। हालांकि रविवार रात को ईरान के विदेश मंत्री अरगची ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ फोन पर बातचीत की थी। भारत ने इस बातचीत का ब्यौरा मीडिया को उपलब्ध नहीं कराया।

होर्मुज है सारे विवाद के केंद्र में

इस प्रस्ताव की विशेषता का सबसे बड़ा कारण है हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा संभालता है। संघर्ष विराम होते ही इस मार्ग को फिर से खोला जाएगा। इसके बाद 15 से 20 दिनों के भीतर व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने की समयसीमा तय की गई है। इस जलमार्ग के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी अस्थिरता आ गई है, और तेल की कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप का दबाव

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से इस संघर्ष को जल्द खत्म करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर जल्द संघर्ष विराम नहीं हुआ, तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं। उनका यह रुख पर्दे के पीछे चल रही कूटनीतिक कोशिशों को और तेज कर रहा है। हालांकि ट्रंप का बयान बार-बार बदल रहा है। 
अगर ईरान इस प्रस्ताव को स्वीकार करता है, तो प्रक्रिया कुछ इस प्रकार आगे बढ़ेगी: तत्काल युद्धविराम लागू होगा,  हॉर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाएगा, 15 दिनों की बातचीत के दौरान व्यापक समझौते को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद सबसे आखीर में इस्लामाबाद में औपचारिक शांति वार्ता होगी।
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तेहरान की ओर से अब तक इस प्रस्ताव पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। पाकिस्तानी अधिकारियों के अनुसार: “ईरान ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया है।” हालांकि पाकिस्तान, चीन और अमेरिका द्वारा समर्थित अस्थायी संघर्ष विराम प्रस्ताव पर बातचीत जारी है, लेकिन ईरान की सहमति अब भी अनिश्चित बनी हुई है।