अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई, ईरान के सर्वोच्च पद के प्रबल दावेदार के रूप में उभर रहे हैं। आईआरजीसी ने उनका समर्थन किया है। मुजतबा का इस पद पर आना इस बात का संकेत है कि इसराइल और अमेरिका के साथ ईरान का कड़ा रुख जारी रहेगा।
मुजतबा खामेनेई (बाएं) अपने पिता अली खामेनेई की जगह ले सकते हैं
अली ख़ामेनेई के बेटे मुजतबा ख़ामेनेई को उनका संभावित उत्तराधिकारी माना जा रहा है। ईरान की प्रमुख सेना आईआरजीसी उन्हें बनाए जाने के समर्थन में है। अगर ऐसा हुआ तो यह एक मजबूत संकेत भी होगा कि फिलहाल ईरान अपनी नीतियों में कोई बड़ा बदलाव करने का इरादा नहीं रखता। यह अमेरिका और इसराइल को लेकर ईरान के नज़रिए में बिना किसी बदलाव के सत्ता परिवर्तन होगा।
मुजतबा को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। बताया जा रहा है कि अली ख़ामेनेई को सुपुर्दे खाक के बाद ही नए सुप्रीम लीडर के नाम का ऐलान किया जा सकता है। अली खामेनेई का अंतिम संस्कार शुक्रवार को किया जा सकता है।
इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने मुजतबा ख़ामेनेई को उत्तराधिकारी के रूप में समर्थन दिया है। इस समय ईरान का पूरा सैन्य अभियान आईआरजीसी ही चला रही है। मुजतबा का नाम सामने आने के बाद इसराइल ने चेतावनी दी है कि खामेनेई की जगह जो भी सुप्रीम लीडर बनेगा, हम उसे भी मार डालेंगे।
ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन 88 सदस्यीय “असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स” करती है। इसी निकाय के सदस्य आयतुल्लाह सैयद ख़तानी ने कहा कि यह परिषद नए नेता के चयन के बेहद करीब पहुंच चुकी है।
अमेरिका और पश्चिम के साथ टकराव की आशंका
मुजतबा ख़ामेनेई अपने कड़े पश्चिम-विरोधी विचारों के लिए जाने जाते हैं। मुजतबा वो नेता नहीं हैं जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस पद पर देखना चाहते हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने मंगलवार को कहा था कि ईरान पर “धार्मिक कट्टरपंथी पागलों” का शासन है। मुजतबा खामेनेई की संभावित नियुक्ति इस धारणा को बदलने वाली नहीं मानी जा रही।ट्रंप ने कहा था कि सबसे खराब स्थिति तब होगी जब नया नेता “पिछले व्यक्ति जितना ही खराब” हो।
नए सुप्रीम लीडर का चयन असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के 88 सदस्य करते हैं। बताया जा रहा है कि इस बार यह परिषद छह संभावित उम्मीदवारों में से एक को चुनने जा रही है। यदि मुजतबा ख़ामेनेई को चुना जाता है तो इसे इस बात का स्पष्ट संकेत माना जाएगा कि ईरान की सरकार अमेरिका के साथ किसी समझौते या नरमी की दिशा में नहीं जा रही।
लंबे समय से चल रही थी उत्तराधिकार की चर्चा
पिछले एक दशक से अधिक समय से यह अटकलें लगती रही हैं कि मुजतबा अपने पिता के उत्तराधिकारी बन सकते हैं। यह चर्चा तब और तेज हो गई जब ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति और अली ख़ामेनेई के करीबी माने जाने वाले इब्राहिम रईसी की हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई।मुजतबा खामेनेई का राजनीतिक सफर
मुजतबा खामेनेई का जन्म 1969 में हुआ था। हाई स्कूल के बाद उन्होंने इस्लामी धर्मशास्त्र (थियोलॉजी) की पढ़ाई की। 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने ईरान-इराक युद्ध में भी सेवा दी। हालांकि सार्वजनिक रूप से उनका प्रभाव 1990 के दशक के अंत में सामने आया।1997 के राष्ट्रपति चुनाव में अली खामेनेई के पसंदीदा उम्मीदवार अली अकबर नातेघ नूरी को भारी हार का सामना करना पड़ा था और उन्हें केवल 25% वोट मिले थे। इसके बाद ईरान के कई रूढ़िवादी समूहों ने अपनी राजनीतिक संरचना में बदलाव की आवश्यकता महसूस की, और इस प्रक्रिया में मुजतबा खामेनेई की भूमिका महत्वपूर्ण मानी गई।
2009 के विरोध प्रदर्शनों में भूमिका के आरोप
सुधारवादी नेताओं के अनुसार 2009 के विवादित राष्ट्रपति चुनाव के बाद हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों को दबाने में भी मुजतबा की भूमिका थी। उस समय सड़कों पर प्रदर्शनकारियों ने उनका नाम लेकर नारे लगाए थे। ईरान के सुधारवादी नेता मुस्तफा ताजज़ादेह, जिन्हें चुनाव के बाद जेल में डाल दिया गया था, ने आरोप लगाया था कि उनके और उनकी पत्नी फख़र अल-सादात मोहताशमिपुर के मुकदमे की निगरानी सीधे मुजतबा खामेनेई कर रहे थे।आयतुल्लाह की उपाधि और सत्ता में बढ़ता प्रभाव
2022 में मुजतबा खामेनेई को “आयतुल्लाह” की उपाधि दी गई, जो सर्वोच्च नेता बनने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जाती है। उस समय तक वे अपने पिता के साथ राजनीतिक बैठकों में नियमित रूप से दिखाई देने लगे थे।उन्होंने इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग (IRIB) में भी प्रभावशाली भूमिका निभाई। यह संस्थान अक्सर सरकारी प्रचार प्रसार के लिए आलोचना का सामना करता रहा है, जबकि ईरान में खामेनेई विरोधी लोग विदेशी सैटेलाइट चैनलों को ज्यादा पसंद करते हैं।
मुजतबा के करीबी राजनीतिक सहयोगियों में शामिल हैं: IRGC के नए कमांडर अहमद वहीदी, IRGC की खुफिया शाखा के पूर्व प्रमुख हुसैन ताएब और ईरानी संसद के वर्तमान स्पीकर मोहम्मद बाकिर क़ालिबाफ।
मुजतबा की संभावित नियुक्ति का सबसे बड़ा विरोध ईरान के सुधारवादी गुटों से आता रहा है, क्योंकि इसे सत्ता के वंशानुगत ट्रांसफर के रूप में देखा जाता है। पूर्व प्रधानमंत्री मीर हुसैन मुसवी ने 2022 में लिखा था: “इस साजिश (मुजतबा को बनाने) की खबरें 13 वर्षों से सुनी जा रही हैं। अगर वे सचमुच ऐसा नहीं कर रहे हैं, तो वे इसका खंडन क्यों नहीं करते।?” इससके जवाब में, विशेषज्ञों की सभा ने “संदेहों की निरर्थकता” की निंदा की और कहा कि सभा केवल “सबसे योग्य और सबसे उपयुक्त” का ही चयन करेगी।