ईरान के साथ अमेरिका और इसराइल युद्ध 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ। इस युद्ध में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनेई की हत्या कर दी गई। यह युद्ध ट्रंप प्रशासन के दूसरे कार्यकाल में शुरू हुआ, जिसका मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना बताया गया। लेकिन गोपनीय ब्रीफिंग में रक्षा अधिकारियों ने सांसदों को बताया कि युद्ध की योजना में कई गलतियां हुईं, और अब यह वैश्विक अर्थव्यवस्था, तेल की कीमतों और राजनीतिक दबाव का कारण बन रहा है।
कांग्रेस के सदस्यों, खासकर डेमोक्रेट्स को दी गई गोपनीय ब्रीफिंग्स में युद्ध की स्थिति को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आईं। ये ब्रीफिंग्स 10 मार्च 2026 को हुईं, जिसमें रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रुबियो और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने भी हिस्सा लिया। इनके अलावा इसमें डेमोक्रेट और रिपब्लिकन सांसद भी थे।

गोपनीय ब्रीफिंग की खास बातें

  • सीनेटर रिचर्ड ब्लुमेंथल ने कहा कि "कोई एंडगेम नहीं लगता" और स्थिति "परेशान करने वाली" है। ट्रम्प कहते हैं कि युद्ध "लगभग पूरा" हो गया है, लेकिन पेंटागन कहता है कि यह "अभी शुरू हुआ है"।
  • डेमोक्रेट्स ने चेतावनी दी कि यह मध्य पूर्व में एक और लंबा युद्ध बन सकता है, जिसमें अमेरिकी सैनिकों की जान जाएगी और अरबों डॉलर खर्च होंगे। अब तक 140 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक घायल हो चुके हैं, और 6 की मौत हुई है।
  • अमेरिका ईरान के परमाणु स्टॉकपाइल को सुरक्षित करने के लिए स्पेशल फोर्सेस भेजने पर विचार कर रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह बहुत जोखिम भरा है। ईरान के पास कम से कम 10 परमाणु हथियार बनाने लायक सामग्री है।
  • मिनाब में एक स्कूल पर हमले में 170 से ज्यादा लोग मारे गए (ज्यादातर लड़कियां), जिसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इस पर अमेरिकी सांसद भी नाराज हैं। हालांकि ट्रंप ने इनकार किया, लेकिन सबूत टॉमहॉक मिसाइल की ओर इशारा करते हैं। ब्रीफिंग में सिविलियन कैजुअल्टीज को कम करने की नीतियों को कमजोर करने की बात भी सामने आई।
  • तेल की कीमतें $120 तक पहुंच गईं, और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद है। गल्फ देशों पर हमले बढ़ सकते हैं।

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गोपनीय ब्रीफिंग से जो सबसे बड़ा संकेत निकलकर आया, वो ये है कि युद्ध की कोई समयसीमा नहीं है। ट्रंप प्रशासन में मिले जुले संदेशों (mixed messaging) से असमंजस बढ़ रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स और गार्जियन की रिपोर्ट्स के मुताबिक, सांसदों ने कहा कि स्थिति "सोच से भी बदतर" है।

डेमोक्रेट्स युद्ध के बारे में क्या कह रहे हैं? 

डेमोक्रेट्स ने युद्ध को गैरकानूनी और अनावश्यक बताया है। वे कांग्रेस से अनुमति के बिना शुरू किए गए इस युद्ध की कड़ी आलोचना कर रहे हैं और पब्लिक हियरिंग्स की मांग कर रहे हैं। सीनेटर एलिजाबेथ वॉरेन ने कहा कि "ट्रम्प प्रशासन के पास ईरान में कोई योजना नहीं है। यह अवैध युद्ध झूठ पर आधारित है और अमेरिका के लिए कोई आसन्न खतरा नहीं था।" सीनेट माइनॉरिटी लीडर चक शूमर ने रुबियो और हेगसेथ से पब्लिक टेस्टिमोनी की मांग की। डेमोक्रेट्स ने कहा कि यह "अनंत युद्ध" बन सकता है, जो गैस की कीमतें बढ़ाएगा (अभी $100 से ऊपर) और अमेरिकियों को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने सप्लिमेंटल फंडिंग की बात की, लेकिन डेमोक्रेट्स इसे अस्वीकार कर रहे हैं।

युद्ध की मंजूरी कांग्रेस से न लेने पर सवाल

सीनेटर टिम केन और क्रिस मर्फी ने वॉर पावर्स रेजोल्यूशन पेश किया, जो युद्ध रोकने के लिए कांग्रेस (अमेरिकी संसद) की मंजूरी जरूरी बनाता है। वे कहते हैं कि ट्रम्प ने "अनावश्यक युद्ध" शुरू किया, जो अमेरिका को सुरक्षित नहीं बनाता। सीनेटर डेमोक्रेट्स ने धमकी दी कि अगर हियरिंग्स नहीं हुईं, तो वे फ्लोर पर वोट्स कराएंगे। वे कहते हैं कि ट्रंप प्रशासन पारदर्शिता नहीं बरत रहा और युद्ध के उद्देश्यों पर घंटे दर घंटे बदलाव कर रहा है। कुछ डेमोक्रेट्स ने कहा कि रूस ईरान की मदद कर रहा है, जो युद्ध को जटिल बना रहा है।

सीएनबीसी, अल जजीरा और एनपीआर की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सिर्फ डेमोक्रेट्स में ही नहीं ट्रंप कई मोर्चों पर अलोकप्रिय होते जा रहा है।

क्या ट्रंप को युद्ध पर गलत सलाह मिली? 

कई रिपोर्ट्स से लगता है कि ट्रंप को गलत सलाह मिली, जिससे ईरान की प्रतिक्रिया और तेल बाजारों के प्रभाव को कम आंका गया। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप और उनके सलाहकारों ने ईरान की प्रतिक्रिया को गलत समझा। वे सोचते थे कि ईरान जल्दी हार मान लेगा, लेकिन ईरान ने तेल सुविधाओं पर हमले किए और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को प्रभावित किया, जिससे तेल की कीमतें बढ़ीं।
ट्रंप ने कहा था कि युद्ध "बहुत जल्दी" खत्म होगा, लेकिन पेंटागन कहता है कि यह "शुरू ही हुआ है"। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट में कहा गया कि सलाहकार अब एग्जिट प्लान की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि लंबा युद्ध राजनीतिक नुकसान पहुंचा सकता है। ट्रंप समर्थक फॉक्स न्यूज ने कहा कि "ईरान युद्ध के सभी 4 अनुमान गलत साबित हुए"।

ट्रंप को ईरान युद्ध पर सलाह किसने दी? 

ईरान युद्ध में इसराइल ने अमेरिका को इस युद्ध में जबरन ढकेला। लेकिन अमेरिका में ट्रंप के सलाहकारों को इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं ठहराया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप ने युद्ध की सलाह एक छोटे समूह से ली, जिसमें सैन्य और गैर-सैन्य लोग शामिल थे। मुख्य सलाहकार मार्को रुबियो (राज्य मंत्री) हैं, जो ईरान पर कड़े रुख के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने कांग्रेस को ब्रीफिंग दी। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका "फॉरएवर वॉर" नहीं करेगा, लेकिन अब ग्राउंड ट्रूप्स पर विचार कर रहे हैं। वे सिविलियन कैजुअल्टीज की नीतियों को कमजोर करने के आरोपी हैं। ज्वाइंट चीफ्स चेयरमैन जनरल डैन केन ने ट्रंप को युद्ध के जोखिमों (prolonged conflict) के बारे में चेतावनी दी, लेकिन ट्रंप ने ध्यान नहहीं दिया। एक्सियोस की रिपोर्ट में कहा गया कि केन ने हमले के खिलाफ सलाह दी।
जेरेड कुश्नर और स्टीव विटकॉफ: कुश्नर ट्रम्प के दामाद हैं, और विटकॉफ एक रियल एस्टेट डेवलपर। वे ईरान के साथ न्यूक्लियर टॉक्स में शामिल थे। एनबीसी न्यूज की रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रम्प इनसे सलाह लेते हैं, जो सैन्य विशेषज्ञ ही नहीं हैं।

इसराइल के पीएम नेतन्याहू और लिंडसे ग्राहम (रिपब्लिकन सीनेटर) ने भी ट्रंप को युद्ध की सलाह दी। कुछ रिपोर्ट्स में पुतिन का जिक्र है। जनरल जैक कीन ने कहा कि ईरान ने ट्रम्प को "गलत समझा"। ट्रम्प ने इन्हें "ट्रस्टेड एडवाइजर्स" कहा, लेकिन आलोचक कहते हैं कि गैर-सैन्य लोगों की सलाह से गलतियां हुईं।

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ईरान युद्ध ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति से भी उलट है, क्योंकि उन्होंने चुनाव में "कोई नया युद्ध नहीं" करने का वादा किया था। गोपनीय ब्रीफिंग्स से उदास तस्वीर सामने आई है, जहां कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है, और डेमोक्रेट्स इसे अवैध बताकर विरोध कर रहे हैं। ट्रंप को गलत सलाह मिली, जिससे ईरान की प्रतिक्रिया और आर्थिक प्रभाव को कम आंका गया। सलाहकारों में रुबियो, हेगसेथ और कुश्नर मुख्य हैं, लेकिन अब वे एग्जिट प्लान की बात कर रहे हैं क्योंकि तेल कीमतें बढ़ रही हैं और राजनीतिक नुकसान का खतरा है। रूस की ईरान को मदद से युद्ध जटिल हो गया है। अगर युद्ध लंबा चला, तो मिड-टर्म चुनावों में ट्रम्प को नुकसान हो सकता है। वैश्विक स्तर पर, यह मध्य पूर्व की अस्थिरता बढ़ा रहा है, और अमेरिका को अलग-थलग कर सकता है।