ईरान ने अमेरिका के साथ पाकिस्तान में होने वाली दूसरे दौर की बातचीत में हिस्सा लेने से इनकार कर डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा झटका दिया है। ईरान के सरकारी मीडिया IRNA ने रविवार को यह ख़बर दी है। इससे दो महीने से चल रही जंग में नाजुक संघर्षविराम को बढ़ाने की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। ईरान की ओर से यह बयान तब आया जब ट्रंप ने कहा है कि पाकिस्तान में सोमवार को बातचीत के लिए उनका प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद जा रहा है और उन्होंने चेताया भी है कि यदि वार्ता सफल नहीं हुई तो वह ईरान को पूरी तरह तबाह कर देंगे। इस बीच, ताज़ा घटनाक्रमों के बाद मध्यस्थता कर रहे पाकिस्तान के पीएम शहबाज़ शरीफ ने ईरानी नेतृत्व से बात की है।
अमेरिकी टीम के सोमवार शाम को इस्लामाबाद पहुंचने की डोनाल्ड ट्रंप की घोषणा से उम्मीद जगी थी कि 22 अप्रैल को ख़त्म हो रहे सीजफायर से पहले कोई समझौता हो सकता है। लेकिन रविवार को ईरान ने साफ कर दिया कि वह बातचीत में नहीं जाएगा।

ईरान का इनकार क्यों?

ईरान ने बातचीत से इनकार करने की वजह बताते हुए अमेरिका पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। ईरानी मीडिया के मुताबिक़, तेहरान का कहना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा हैं, अवास्तविक उम्मीदें हैं, रुख बार-बार बदल रहा है और विरोधाभास भरा है। इसके अलावा अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक ब्लॉकेड कर रखी है, जिसे ईरान सीजफायर का उल्लंघन मानता है।
उच्चस्तरीय बैठक में ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रेजा आरेफ ने रविवार को अमेरिका की बातचीत की शैली की आलोचना की। उन्होंने कहा कि अमेरिका का रवैया बचकाना और असंगत है। कभी दबाव में सीजफायर और बातचीत की बात करता है, तो बाद में और सख्त रुख अपनाता है।

पहले क्या हुआ था?

पिछले हफ्ते उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस की अगुवाई में पहला दौर की लंबी बातचीत इस्लामाबाद में हुई थी। व्हाइट हाउस ने कहा था कि वेंस और अन्य सीनियर अधिकारी अब दूसरा दौर करने इस्लामाबाद जा रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने राजधानी में सुरक्षा भी कड़ी कर दी थी।

अब ईरान का यह फ़ैसला अचानक यू-टर्न लग रहा है। कुछ दिन पहले ईरानी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया था कि उनका प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को पाकिस्तान पहुंच सकता है। ईरान के संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर कालिबाफ ने भी कहा था कि कूटनीति के क्षेत्र में कोई पीछे हटना नहीं है। लेकिन ट्रंप की नई धमकियों ने शायद ईरान का मन बदल दिया।

ट्रंप की सख्त धमकी

शनिवार और रविवार को ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर दोबारा सख्त चेतावनी दी। उन्होंने लिखा कि अगर ईरान अमेरिका की पेशकश की उचित डील नहीं लेता तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट और हर ब्रिज को तबाह कर देगा। ट्रंप ने कहा, 'ईरान की किलिंग मशीन को खत्म करने का समय आ गया है।'
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, "कल ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में गोलीबारी की- यह हमारे सीजफायर समझौते का पूरी तरह उल्लंघन है! उनकी कई गोलियाँ एक फ्रेंच जहाज और एक ब्रिटिश मालवाहक जहाज पर निशाना लगाकर चलाई गईं। यह अच्छी बात नहीं है, है कि नहीं? मेरे प्रतिनिधि पाकिस्तान के इस्लामाबाद जा रहे हैं। वे कल शाम तक वहाँ पहुँचेंगे और ईरान के साथ बातचीत करेंगे।"

डोनाल्ड ट्रंप की पोस्ट

ईरान को ही नुक़सान?

अमेरिकी राष्ट्रपति ने पोस्ट में कहा, "ईरान ने हाल ही में कहा था कि वह होर्मुज स्ट्रेट बंद कर देगा। यह अजीब बात है, क्योंकि हमारा ब्लॉकेड पहले ही इसे बंद कर चुका है। ईरान अनजाने में हमारी मदद कर रहा है। स्ट्रेट बंद होने से रोजाना 50 करोड़ डॉलर का नुक़सान हो रहा है और यह नुकसान ईरान को ही हो रहा है। अमेरिका को कुछ भी नहीं हो रहा। दरअसल, अभी कई जहाज अमेरिका के टेक्सास, लुइसियाना और अलास्का की ओर जा रहे हैं ताकि तेल लाद सकें- यह सब ईरान की आईआरजीसी की वजह से हो रहा है, जो हमेशा 'ताकतवर बनने' का दिखावा करती रहती है!"

ईरान को तबाह करने की धमकी

ट्रंप ने आगे कहा कि "हम ईरान को एक बहुत उचित और वाजिब डील ऑफर कर रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि वे इसे मान लेंगे। अगर उन्होंने डील नहीं मानी, तो अमेरिका ईरान के हर पावर प्लांट और हर पुल को तबाह कर देगा। अब नरम व्यवहार खत्म! वे बहुत तेजी से और आसानी से गिर जाएंगे। अगर उन्होंने डील स्वीकार नहीं की, तो जो करना जरूरी है, उसे करने का गर्व मुझे होगा। पिछले 47 सालों से जो काम दूसरे अमेरिकी राष्ट्रपतियों को करना चाहिए था, वह अब होगा। ईरान की मारक मशीन का अब अंत होना चाहिए!"

क्या है पूरा विवाद?

अभी क़रीब दो महीने से अमेरिका और ईरान के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया का बेहद अहम तेल रास्ता है। ईरान ने इसे कई बार बंद करने की धमकी दी, जिससे तेल की कीमतें बढ़ गई हैं।

पाकिस्तान दोनों देशों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। पहला दौर की बातचीत बेनतीजा रही थी। अब दूसरा दौर भी टल गया है, जिससे क्षेत्र में शांति की उम्मीदें कम हो गई हैं।

ईरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपनी अतिरिक्त मांगें और ब्लॉकेड नहीं हटाता, तब तक बातचीत फायदेमंद नहीं होगी। वहीं अमेरिका साफ कह रहा है कि अगर डील नहीं हुई तो सैन्य कार्रवाई होगी।

पाकिस्तान सरकार ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था पहले से कड़ी कर दी गई थी।

भविष्य क्या है?

अब सवाल यह है कि 22 अप्रैल को सीजफायर खत्म होने के बाद क्या होगा। अगर दोनों तरफ से बातचीत नहीं हुई तो होर्मुज क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। इससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

दोनों देश अभी भी कूटनीति का रास्ता खुला रखने की बात कर रहे हैं, लेकिन ट्रंप की धमकियां और ईरान का सख्त रुख देखते हुए स्थिति काफी गंभीर बनी हुई है।