भारत से इसराइली सेना को तमाम सामान भेजे जाने में बढ़ोतरी
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के दखल बाद इटली के अधिकारियों ने भारत से इसराइल भेजा जा रहा 'सैन्य-ग्रेड स्टील' (military-grade steel) की तीन बड़ी खेपों को अपने बंदरगाहों पर रोक दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब कार्यकर्ता समूहों ने इस बात का खुलासा किया कि इस स्टील का इस्तेमाल इसराइली सेना के लिए हथियार और गोला-बारूद बनाने में किया जाना है।
इटली से एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 'मेडिटेरेनियन शिपिंग कंपनी' (MSC) द्वारा ले जाई जा रही इन खेपों को इटली के जियोइया टॉरो (Gioia Tauro) और काग्लियारी (Cagliari) बंदरगाहों पर रोका गया है।
'बॉयकॉट, डाइवेस्टमेंट एंड सैंक्शंस' (BDS) आंदोलन और 'नो हार्बर फॉर जेनोसाइड' (NHB) जैसे वैश्विक नागरिक समाज संगठनों की ट्रैकिंग और निगरानी के कारण इन खेपों की पहचान हो सकी।
कार्यकर्ता समूहों ने बताया कि रोकी गई खेप में कुल 806 टन स्टील शामिल है। कार्यकर्ताओं का दावा है कि इस स्टील का इस्तेमाल इसराइली सेना के लिए लगभग 17,458 तोपखाने के गोले (artillery shells) बनाने के लिए किया जा सकता था। यह खेप भारत के औरंगाबाद में स्थित 'आर एल स्टील्स एंड एनर्जी लिमिटेड' (R L Steels & Energy Limited) से भेजी गई थी। इस कार्गो की अंतिम मंजिल इसराइल के रामत हशारोन में स्थित 'आईएमआई सिस्टम्स' (IMI Systems - जो अब एलबिट सिस्टम्स लैंड के नाम से जानी जाती है) की मुख्य हथियार निर्माण फैक्टरी थी।
'नो हार्बर फॉर जेनोसाइड' (NHB) के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया, "यह स्टील रामत हशारोन गोला-बारूद प्लांट के लिए भेजा जा रहा था, जहाँ कोई नागरिक (civilian) उत्पादन नहीं होता है। वहाँ शत-प्रतिशत केवल सैन्य उत्पादन होता है।"
रास्ता बदलने की कोशिश
रिपोर्ट के अनुसार, कार्यकर्ताओं की पैनी नजर और ट्रैकिंग शुरू होने के बाद, तीन अन्य खेपों के रास्ते को बदलकर उन्हें श्रीलंका की ओर डायवर्ट (reroute) कर दिया गया था। कार्यकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया कि कानूनी और सामाजिक जांच से बचने के लिए कई मामलों में शिपिंग मार्गों और गंतव्यों को जानबूझकर अस्पष्ट या गुप्त रखा गया था।बीडीएस (BDS) के सैन्य प्रतिबंध समन्वयक इल्हाम यासीन ने इस पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा, "हम अब भारत से इसराइल के लिए सैन्य आपूर्ति की बाढ़ देख रहे हैं।" उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से इस तरह की आपूर्तियों को रोकने और इसमें शामिल कंपनियों को जवाबदेह ठहराने की अपील की।
डॉकवर्कर्स (बंदरगाह कर्मियों) का विरोध प्रदर्शन
यह घटना यूरोप और भूमध्यसागरीय (Mediterranean) क्षेत्र के बंदरगाह श्रमिकों द्वारा नागरिक बंदरगाहों के माध्यम से हथियारों के शिपमेंट के खिलाफ किए जा रहे व्यापक विरोध का हिस्सा है।
हाल ही में इटली, ग्रीस, बास्क देश, मोरक्को और तुर्की सहित 20 से अधिक बंदरगाहों के श्रमिकों ने "डॉकवर्कर्स डोंट वर्क फॉर वॉर" (Dockworkers Don't Work for War) के बैनर तले संयुक्त कार्रवाई में हिस्सा लिया था। इटली के श्रमिक संघ 'यूनियोन सिंडाकाले डी बेस' (USB) का कहना है कि वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनके बंदरगाह शांति के स्थान बने रहें, न कि युद्ध को बढ़ावा देने वाले माध्यम।
अक्टूबर 2023 से ग़ज़ा में जारी संघर्ष के बाद से ही दुनिया भर के सामाजिक संगठनों, अदालती फैसलों और बंदरगाह श्रमिकों के हस्तक्षेपों के जरिए इसराइल की सैन्य आपूर्ति श्रृंखला को बाधित करने के प्रयास तेज हो गए हैं। इटली में भारत से जा रहे इस स्टील कार्गो को रोका जाना इसी वैश्विक दबाव और निगरानी का एक बड़ा उदाहरण माना जा रहा है।
इसराइल का राजदूत तलब, मेलोनी का कड़ा बयान
इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ग़ज़ा जा रहे मानवीय सहायता बेड़े (Flotilla) के कार्यकर्ताओं और प्रदर्शनकारियों के साथ इसराइल द्वारा किए गए व्यवहार की कड़े शब्दों में निंदा की है। पीएम मेलोनी और इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो तायानी ने एक संयुक्त बयान जारी कर इसराइल की इस कार्रवाई को "अस्वीकार्य" और "मानवीय गरिमा का उल्लंघन" करार दिया है। इस घटना के बाद बढ़ते राजनयिक तनाव के बीच इटली सरकार ने रोम में इसराइल के राजदूत को औपचारिक स्पष्टीकरण के लिए तलब करने का फैसला किया है।
क्या है पूरा मामला
यह विवाद इसराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-गवीर (Itamar Ben-Gvir) द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो के बाद गरमाया। इस वीडियो में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इसराइली सेना द्वारा हिरासत में लिए गए कार्यकर्ताओं को प्लास्टिक की रस्सियों (zip-ties) से बांधकर घुटनों के बल बैठे हुए दिखाया गया था। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों में कई इतालवी नागरिक भी शामिल हैं। मेलोनी और तायानी ने संयुक्त बयान में कहा, "यह पूरी तरह से अस्वीकार्य है कि इन प्रदर्शनकारियों, जिनमें कई इतालवी नागरिक भी शामिल हैं, के साथ ऐसा व्यवहार किया जाए जो मानवीय गरिमा को ठेस पहुँचाता है।" इटली सरकार ने इसराइल से अपने नागरिकों को तुरंत रिहा करने की मांग की है। इसके साथ ही, इटली के स्पष्ट अनुरोधों की अनदेखी करने और कार्यकर्ताओं के साथ किए गए इस दुर्व्यवहार के लिए इसराइल से औपचारिक माफी की मांग भी की गई है।
क्या था सहायता बेड़ा Flotilla
ग्लोबल सुमुद फ्लॉटिला' (Global Sumud Flotilla) नामक संगठन ने बताया कि ग़ज़ा पर 2007 से लागू इसराइली नाकेबंदी को तोड़ने और वहां मानवीय सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से तुर्की के मारमारिस से रवाना हुए उनके सहायता काफिले के सभी 50 जहाजों को इसराइल द्वारा जब्त कर लिया गया है। इस काफिले में 44 देशों के करीब 428 लोग सवार थे। इससे पहले अप्रैल के अंत में भी अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में इसराइली सेना ने फ्लॉटिला के जहाजों को रोका था, जिसकी इटली ने "अवैध इंटरसेप्शन" कहकर निंदा की थी।
बदल रहे हैं इटली और इसराइल के संबंध
जॉर्जिया मेलोनी की दक्षिणपंथी सरकार को यूरोप में इसराइल के सबसे करीबी सहयोगियों में से एक माना जाता रहा है, लेकिन हाल के हफ्तों में मध्य पूर्व के हालातों को लेकर इटली के रुख में कड़वाहट आई है। लेबनान पर इसराइली हमलों की आलोचना करने के साथ-साथ इटली ने हाल ही में इसराइल के साथ अपने रक्षा सहयोग समझौते को भी निलंबित कर दिया था। अब कार्यकर्ताओं के साथ हुए इस दुर्व्यवहार ने दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है। दूसरी ओर, इसराइल ने ग़ज़ा में किसी भी प्रकार की आपूर्ति रोकने के आरोपों से इनकार किया है और सहायता बेड़े में शामिल कार्यकर्ताओं को "सुर्खियां बटोरने वाले आंदोलनकारी" करार दिया है।