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डोनाल्ड ट्रम्प पर दर्ज मुकदमों के कारण कानून का शिकंजा उनपर कसता जा रहा है  

अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में घोखाधड़ी के मामले में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को भले ही शुक्रवार को आत्मसमर्पण करने के 20 मिनट के बाद ही जमानत मिल गई हो लेकिन उनकी मुश्किलें आने वाले दिनों में कम होती नहीं दिख रही। 

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन दिनों दर्जनों आपराधिक आरोपों का सामना कर रहे हैं। अगले डेढ़ वर्ष में उन्हें कई आपराधिक मुकदमों का सामना करना होगा। 

कानूनी मामलों के जानकारों का मानना है कि 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में भले ही रिपब्लिकन पार्टी से वे उम्मीदवार बन जाएं लेकिन चुनाव प्रचार के दौरान उन पर चल रहे विभिन्न मुकदमें उनकी परेशानी बढ़ाएंगे। 

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर हाल के महीनों में कानून का शिकंजा कसता जा रहा है। उन पर बीते पांच 5 महीने में ही चार क्रिमिनल केस दर्ज किए गए हैं। उन पर 2020 के चुनाव में मिली हार के नतीजों को पलटने की कोशिश करने, झूठे बयान देने, जालसाजी, गवाहों को प्रभावित करने, राज्य को धोखा देने की साजिश करने, चोरी और झूठी गवाही आदि आरोप लगाए गए हैं।

इनमें से सबसे गंभीर आरोप रैकेटियर और करप्शन ऑर्गेनाइजेशन एक्ट के उल्लंघन का है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर डेढ़ दर्जन से ज्यादा आपराधिक केस दर्ज हैं। उन पर जो चार चर्चित केस हैं उनमें जॉर्जिया क्रिमिनल केस,पोर्न स्टार को पैसे देकर चुप कराने, कैपिटल हिंसा और व्हाइट हाउस से खुफिया दस्तावेज घर ले जाने का केस शामिल है। 
ट्रम्प पर चल रहे ज्यादातर केस तीन मामलों से जुड़े हुए हैं। इसमें पहला मामला वित्तीय गड़बड़ी का है। दूसरा मामला 6 जनवरी 2021 को संसद में हुई हिंसा में और उसमें ट्रम्प की भूमिका को लेकर है। तीसरे तरह के केस वैसे हैं जिसमें उनपर 2020 के राष्ट्रपति चुनाव में दखलअंदाजी की कोशिश का आरोप है। पेश हैं ट्रंम्प पर लगे चर्चित आरोप और उनसे जुड़े मुकदमे। 

जॉर्जिया क्रिमिनल केस ने ट्रम्प को पहुंचाया जेल 

जिस केस ने ट्रम्प को पहली बार जेल तक पहुंचाया वह जॉर्जिया क्रिमिनल केस के नाम से जाना जाता है। इसमें उनपर आरोप है कि  2020 में राष्ट्रपति चुनाव के बाद उन्होंने अमेरिकी राज्य जॉर्जिया में चुनाव नतीजों को पलटने की कोशिश की थी। बीबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक जनवरी 2021 को ट्रम्प और जॉर्जिया के इलेक्शन ऑफिसर ब्रेड रैफेंसपर्गर के बीच फोन पर करीब एक घंटे बात हुई थी। व्हाइट हाउस के ऑफिस से यह कॉल की गई थी। 

आरोप के मुताबिक ट्रम्प ने रैफेंसपर्गर को फोन पर कहा था कि उन्हें वोटों की दोबारा से गिनती करनी चाहिए। इसके पीछे उनका मकसद राज्य के 16 इलेक्टोरल वोट को अपने हिस्से में लाना था। इन दोनों की कॉल रिकॉर्डिंग को मशहूर अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने सबसे पहले पब्लिश किया था।वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार ट्रम्प ने रैफेंसपर्गर से कहा था कि मैं सिर्फ 11,780 वोट चाहता हूं। यह जीत के अंतर से एक वोट ज्यादा है। फोन पर ट्रम्प ने रैफेंसपर्गर को उनकी बात नहीं मानने पर क्रिमिनल केस की धमकी भी दी थी। 

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पॉर्न स्टार को चुप रहने के लिए पैसे दिए 

डोनाल्ड ट्रम्प पर आरोप है कि उन्होंने पॉर्न स्टार स्टॉर्मी डेनियल्स को अपने संबंधों को लेकर चुप रहने के लिए पैसे दिए थे। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2016 में राष्ट्रपति चुनाव से ठीक पहले स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे दिए थे।स्टॉर्मी डेनियल्स ने अपनी किताब में आरोप लगाया था कि ट्रंप से उनकी मुलाकात पहली बार 2006 में एक गोल्फ टूर्नामेंट के दौरान हुई थी। अपनी किताब फुल डिस्क्लोजर में उन्होंने इस मुलाकात का जिक्र किया था। 
स्टॉर्मी ने इस किताब में लिखा है कि ट्रम्प ने उन्हें पेंटहाउस में डिनर के लिए बुलाया था। इसमें दोनों के बीच के अफेयर की भी बात कही गई है। स्टॉर्मी डेनियल्स को चुप रहने के लिए पैसे देने के आरोपों पर ट्रंप की जमकर आलोचना हो चुकी है। इसको लेकर उनपर आपराधिक केस भी दर्ज किया गया जिसका वह सामना कर रहे हैं। उनपर इस मामले में 34 आरोप लगे हैं। ट्रंप के वकील माइकल कोहेन इस मामले में स्वीकार कर चुके हैं कि उन्होंने ट्रम्प की ओर से स्टॉर्मी डेनियल्स को करीब एक करोड़ सात लाख रुपए दिए थे। 

चुनाव में हार के बाद हिंसा भड़काने का आरोप

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में मिली हार के बाद ट्रंप पर अपने समर्थकों को हिंसा के लिए भड़काने का आरोप है। उनके समर्थक 6 जनवरी 2021 को कैपिटल हिल यानी अमेरिकी संसद में ट्रम्प के समर्थक घुस आए थे। राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे सामने आने के बाद से ट्रंप समर्थकों ने चुनाव में धांधली के आरोप लगाए थे। 
वोटिंग होने के 64 दिन बाद जब अमेरिकी संसद बाइडेन की जीत पर मुहर लगाने वाली थी तो ट्रम्प के समर्थक संसद में घुस गए और वहां तोड़फोड़ और हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया था। चुनावी नतीजों के बाद भड़की इस हिंसा में एक पुलिस अफसर समेत 5 लोगों की मौत हो गई थी। हिंसा के बाद पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर अपने समर्थकों को भड़काने का आरोप लगा था। इसके बाद 18 महीने तक चली जांच में ट्रम्प को दोषी पाया गया और उनके उपर मुकदमा चलाने की जांच समिति ने सिफारिश की थी।  
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व्हाइट हाउस छोड़ते समय गोपनीय दस्तावेज साथ ले गए 

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प पर एक गंभीर आरोप यह भी है कि जब उन्होंने व्हाइट हाउस छोड़ा तब अपने साथ बड़ी संख्या में गोपनीय दस्तावेज भी साथ ले गए जो अमेरिकी सुरक्षा से जुड़े हुए बेहद संवेदनशील थे। अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनसे नेशनल आर्काइव्स ने कई बार डॉक्युमेंट मांगे लेकिन ट्रम्प ने इसे नजरअंदाज कर दिया। इसके बाद शिकायत दर्ज होने पर अगस्त 2021 में अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई ने डोनाल्ड ट्रम्प के फ्लोरिडा स्थित रिजॉर्ट और पाम हाउस पर छापा मारा। 

न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक एफबीआई ने इस छापेमारी के लिए जो वारंट इस्तेमाल किया था उनमें से तीन आपराधिक कानूनों से संबंधित थे। इनमें राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े दस्तावेज को बिना इजाजत अपने पास रखने, सरकारी दस्तावेजों को छिपाने या नष्ट करने और जांच एजेंसी के कामकाज में दखल डालने से जुड़े कानून शामिल थे। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इस छापेमारी में 13 हजार दस्तावेज जब्त किए गए जिनमें से 100 पर क्लासिफाइड लिखा हुआ था। इन दस्तावेजों में अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए, जांच एजेंसी एफबीआई से जुड़ी फाइलें बड़ी संख्या में थीं। साथ ही इसमें ईरान, चीन से जुड़े गोपनीय जानकारियां वाले दस्तावेज भी थे। 
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क़मर वहीद नक़वी
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