इसराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने हाई-प्रोफाइल भ्रष्टाचार मुकदमे के दौरान राष्ट्रपति इसहाक हर्ज़ोग से औपचारिक रूप से क्षमादान का अनुरोध किया है। इस कदम से गहरा राजनीतिक विवाद छिड़ गया है।
इसराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने लंबे समय से चल रहे भ्रष्टाचार मुकदमे के बीच राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग से पूर्ण क्षमादान की औपचारिक मांग की है। यह कदम मुकदमे की सुनवाई के बीच में उठाया गया है, जो राजनीतिक हलकों में हलचल मचा रहा है।
नेतन्याहू पर रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वास के उल्लंघन जैसे गंभीर आरोप लगे हुए हैं। यह मुकदमा तीन वर्षों से अधिक समय से चल रहा है। जिसमें मीडिया कवरेज के बदले गिफ्ट स्वीकार करने, अथॉरिटी और रेगुलेटरी निर्णयों को प्रभावित करने और अन्य अनियमितताओं के आरोप शामिल हैं। उनके वकीलों ने राष्ट्रपति को सौंपी गई याचिका में दावा किया है कि मुकदमा राजनीतिक रूप से प्रेरित है और प्रधानमंत्री की छवि को धूमिल करने का प्रयास है। याचिका में कहा गया है कि नेतन्याहू निर्दोष हैं और यह कार्रवाई न्यायिक उत्पीड़न का उदाहरण है।
क्या इसराइल के राष्ट्रपति माफी दे सकते हैं
राष्ट्रपति हर्जोग को क्षमादान प्रदान करने का अधिकार है, लेकिन यह एक असाधारण कदम होगा। क्योंकि इसराइल में ऐसा किसी सत्तारूढ़ प्रधानमंत्री के लिए पहले कभी नहीं हुआ। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षमादान स्वीकृत होता है, तो मुकदमा समाप्त हो सकता है, लेकिन इससे राजनीतिक विवाद और बढ़ सकता है। विपक्षी दलों ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। विपक्ष के नेता यैर लापिड ने इसे "लोकतंत्र पर हमला" करार दिया, जबकि अन्य ने इसे आरोपों से "भागने" का प्रयास बताया।
नेतन्याहू के समर्थकों का कहना है कि यह मुकदमा उनके खिलाफ साजिश का हिस्सा है, खासकर ग़ज़ा संघर्ष के दौरान उनकी मजबूत नेतृत्व की पृष्ठभूमि में। मुकदमे की अगली सुनवाई अगले सप्ताह तय है, और राष्ट्रपति के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
नेतन्याहू पर क्या आरोप हैंबेंजामिन नेतन्याहू पर तीन बड़े मामले चल रहे हैं (आरोप 2019 में लगे, मुकदमा 2020 से जारी):
केस 1000
अरबपति अर्नोन मिल्चन और जेम्स पैकर से लगभग 2 लाख डॉलर के महंगे तोहफे (सिगार, शैंपेन, गहने) लिए; बदले में उन्हें अमेरिकी वीजा और टैक्स में छूट दिलाने की कोशिश की। आरोप: धोखाधड़ी और विश्वासघात।
केस 2000
अखबार ‘येदियोत अहरोनोत’ के मालिक अर्नोन मोझेस से गुप्त समझौता किया कि कानून बनाकर प्रतिद्वंद्वी अखबार ‘इसराइल हयूम’ को नुकसान पहुंचाएंगे, बदले में नेतन्याहू को पॉजिटिव कवरेज मिलेगा। आरोप: धोखाधड़ी और विश्वासघात
केस 4000 (सबसे गंभीर)
संचार मंत्री रहते हुए बेजेक टेलीकॉम को सैकड़ों मिलियन का फायदा पहुंचाया; बदले में उसकी न्यूज़ वेबसाइट ‘वाला’ पर नेतन्याहू की तारीफ और विरोधियों पर हमलों की खबरें छपवाई गईं। आरोप: रिश्वतखोरी, धोखाधड़ी और विश्वासघात
- इसराइल में रिश्वतखोरी की सजा अधिकतम 10 साल तक हो सकती है।
नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम क्यों हैं, वॉरंट क्यों जारी हुए
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर ग़ज़ा युद्ध के दौरान फिलिस्तीनियों की हत्या, युद्ध अपराधों और नरसंहार के आरोप लगे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) ने नवंबर 2024 में उन्हें और पूर्व रक्षा मंत्री योआव गैलेंट की गिरफ्तारी का वारंट जारी किया था। इसराइल के अंदर भी उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, न्यायपालिका पर हमले और ग़ज़ा युद्ध को राजनीतिक लाभ के लिए जारी रखने के आरोपों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेतन्याहू को फिलिस्तीनियों की हत्या के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। ICC ने 21 नवंबर 2024 को जारी वारंट में कहा कि नेतन्याहू और गैलेंट पर 8 अक्टूबर 2023 से 20 मई 2024 तक ग़ज़ा में युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों की जिम्मेदारी है। ग़ज़ा में नागरिक ठिकानों, बस्तियों पर बम बरसाने का आदेश देना। भोजन, पानी और दवाओं की आपूर्ति रोककर "भुखमरी को युद्ध का हथियार" बनाना। दूसरे देशों से आने वाली मानवीय सहायता को जानबूझकर रोकना और दवा और रसद लेकर आने वाले काफिलों पर जानबूझकर हमले कराना शामिल है।
ICC के मुख्य अभियोजक ने कहा कि यह "नागरिकों को जीवित रहने के लिए आवश्यक वस्तुओं से वंचित करने" का मामला है। इसराइल ने इन आरोपों को "एंटी-सेमिटिक" बताकर खारिज किया, लेकिन 124 ICC सदस्य देशों ने नेतन्याहू को गिरफ्तार करने का आदेश दिया है। UN विशेषज्ञों ने भी कहा कि ये वारंट "लाइफ को बचाने" में मदद करेंगे।
गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय और UN कार्यालय (OCHA) के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 से 30 नवंबर 2025 तक इसराइली कार्रवाई में 69,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की मौत हुई है। इस संख्या में महिलाओं और बच्चों की भारी संख्या (लगभग 50% महिलाएं और बच्चे) भी शामिल हैं।
- अक्टूबर 2023-मार्च 2025: 50,000 मौतें हुईं।
- जुलाई 2025: 60,000 पार।
- सितंबर 2025: 66,000।
- नवंबर 2025: 69,169 (रुबल से शव बरामद होने के बाद)।
ये आंकड़े UN और WHO द्वारा सत्यापित हैं, हालांकि इसराइल दावा करता है कि अधिकांश "हथियारबंद लड़ाके" थे। लैंसेट पत्रिका की जनवरी 2025 रिपोर्ट में अनुमानित 64,260 ट्रॉमेटिक मौतें बताई गईं, जो वास्तविक संख्या से अधिक हो सकती है। ICC वारंट में नेतन्याहू को इन मौतों के लिए "सह-साजिशकर्ता" कहा गया है।
नेतन्याहू के खिलाफ इसराइल में असंतोष क्यों है
इसराइल में नेतन्याहू के खिलाफ असंतोष 2023 से चला आ रहा है, लेकिन ग़ज़ा युद्ध ने इसे तेज कर दिया। मुख्य कारण भ्रष्टाचार का मुकदमा है। नेतन्याहू पर रिश्वत, धोखाधड़ी के आरोप हैं। हालांकि वो इसे "राजनीतिक साजिश" बताते हैं, लेकिन जनता इसे सत्ता में टिके रहने का हथकंडा मानती है।
ग़ज़ा युद्ध का प्रबंधन: बंधकों (लगभग 59 बचे) की रिहाई में विफलता; जनवरी 2025 के युद्धविराम को तोड़ना राजनीतिक लाभ के लिए बताया जा रहा है। परिवारों का आरोप है कि युद्ध "हथियारों के बिजनेस के लिए" चल रहा है।
लोकतंत्र पर हमला: न्यायपालिका सुधार (जजों की नियुक्ति में हस्तक्षेप); शिन बेट प्रमुख रोनन बार को बर्खास्त करने का प्रयास (मार्च 2025 में)।
सुरक्षा विफलता: 7 अक्टूबर हमले की चेतावनियों को नजरअंदाज करना; हामास को मजबूत करने का आरोप।
प्रदर्शन: मार्च 2025 ने 100,000 से अधिक इसराइली लोगों ने तेल अवीव में विरोध किया। नेतन्याहू पर युद्धविराम तोड़ने और लोकतंत्र पर हमले का आरोप लगाया। अगस्त 2025 में हजारों ने बंधक डील करने और युद्ध समाप्ति की मांग की; हाईवे ब्लॉक किया। सितंबर 2025 में UN महासभा के दौरान न्यूयॉर्क में इसराइली प्रवासियों ने नेतन्याहू के विरोध में जबरदस्त प्रदर्शन किया। नवंबर 2025 में भ्रष्टाचार ट्रायल के दौरान सैकड़ों स्थानों पर प्रदर्शन हुए।
विपक्षी नेता यायर लापिड ने कहा, "यह लोकतंत्र पर हमला है।" नेतन्याहू प्रदर्शकारियों को "हामास समर्थक" बताते हैं, लेकिन सर्वेक्षणों में 60% इसराइली युद्ध समाप्ति चाहते हैं। नेतन्याहू पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्ध अपराधों के गंभीर आरोप हैं, जो ग़ज़ा में 69,000 मौतों से जुड़े हैं। UN और HR संगठनों ने जांच और प्रतिबंधों की मांग की है। इसराइल में असंतोष चरम पर है, जहां प्रदर्शन युद्ध, भ्रष्टाचार और लोकतंत्र की रक्षा के लिए हो रहे हैं। यह संकट इसराइली समाज को ध्रुवीकृत कर रहा है, जबकि फिलिस्तीनी पीड़ित न्याय की प्रतीक्षा कर रहे हैं।