पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने कहा, 'हम जिस सिस्टम में रह रहे हैं, वह ढह चुका है। इसके ज़रिए समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता।' उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ढांचागत सुधार नहीं किए गए तो पाकिस्तान एक दशक बाद भी उन्हीं मुद्दों पर चर्चा करता रहेगा।
क्या पाकिस्तान में कॉकरोचों से तख्तापलट की आशंका है? कम से कम पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने देश की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर जो बयान दिया है उसमें उन्होंने इसकी ही चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान का मौजूदा शासन तंत्र पूरी तरह विफल हो चुका है और यदि निराश युवा एकजुट हो गए तो वे 'सबकुछ पलट सकते हैं।' उन्होंने उन 'कॉकरोचों' का ज़िक्र किया जिसके आधार पर भारत में बने कॉकरोच जनता पार्टी ने बड़ा विरोध प्रदर्शन किया और सरकार के एक मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफ़े के लिए मजबूर किया।
इस्लामाबाद में आयोजित पाकिस्तान इकोनॉमिक समिट को संबोधित करते हुए नकवी ने कहा कि देश की मौजूदा व्यवस्था अब समस्याओं का समाधान करने में सक्षम नहीं रही है। पाकिस्तान के मीडिया जियो न्यूज़ के अनुसार उन्होंने प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव, नए प्रशासनिक इकाइयों के गठन और स्थानीय स्तर पर अधिक अधिकार देने की वकालत की।
अपने संबोधन में मोहसिन नकवी ने कहा कि पाकिस्तान जिस व्यवस्था के तहत चल रहा है, वह अब काम नहीं कर रही है। उन्होंने कहा, 'हम जिस सिस्टम के तहत रह रहे हैं, वह पूरी तरह ढह चुका है। चाहे कोई माने या न माने, इस व्यवस्था से समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। अगर यही सिस्टम चलता रहा तो 10 साल बाद भी हम इन्हीं मुद्दों पर चर्चा कर रहे होंगे।' उन्होंने कहा कि केवल छोटे-मोटे सुधारों से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे प्रशासनिक ढांचे को नए सिरे से तैयार करना होगा।
'कॉकरोच एकजुट हुए तो सबकुछ पलट देंगे'
अपने भाषण के दौरान नकवी ने युवाओं की नाराजगी और बेरोजगारी का जिक्र करते हुए 'कॉकरोचों' को लेकर टिप्पणी भी की। उन्होंने कहा, 'आज युवाओं को 10 हजार रुपये की नौकरी या टैबलेट देकर खुश नहीं किया जा सकता। उन्हें योग्यता के आधार पर रोजगार चाहिए। आप उन्हें युवा कहें, कॉकरोच कहें या कुछ और... अगर ये कॉकरोच एकजुट हो गए तो सबकुछ पलट सकते हैं।'नकवी का कहना था कि पाकिस्तान के युवाओं की सबसे बड़ी मांग मेरिट के आधार पर रोजगार है, न कि केवल सरकारी सहायता।
बेरोजगारी और कर्ज सबसे बड़े संकट
गृह मंत्री ने कहा कि पाकिस्तान लगातार कर्ज लेकर अपनी आर्थिक समस्याओं को और बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि हर साल ऐसा बजट बनाया जाता है जिसमें घाटा रहता है और फिर उसे पूरा करने के लिए नया कर्ज लेना पड़ता है। उनके मुताबिक, देश का कर्ज लगातार बढ़ रहा है। प्रशासनिक सुधारों के बिना आर्थिक संकट खत्म नहीं होगा। सभी राजनीतिक दलों को मिलकर व्यवस्था बदलने पर सहमत होना होगा।
नए प्रशासनिक ढांचे की वकालत
मोहसिन नकवी ने सुझाव दिया कि पाकिस्तान में नई प्रशासनिक इकाइयां बनाई जाएं। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें नए प्रांत कहा जाए या किसी अन्य नाम से पुकारा जाए, लेकिन सत्ता का विकेंद्रीकरण जरूरी है। उन्होंने कहा कि स्थानीय सरकारों को अधिक अधिकार मिलने से विकास की गति तेज होगी और लोगों तक सरकारी सेवाएं बेहतर तरीके से पहुंचेंगी।नकवी ने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की तारीफ करते हुए कहा कि वे रोज 14 से 18 घंटे काम करते हैं, लेकिन मौजूदा व्यवस्था के कारण सरकार केवल संकट से संकट तक पहुंचने वाली स्थिति में फंसी हुई है। उन्होंने कहा, 'हम हर समय केवल आग बुझाने का काम कर रहे हैं। जब तक सिस्टम नहीं बदलेगा, तब तक कोई स्थायी सुधार संभव नहीं है।'
'असीम मुनीर अकेले देश नहीं बदल सकते'
बाद में पत्रकारों से बातचीत में नकवी ने कहा कि सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर की मेहनत भी तब तक सफल नहीं होगी, जब तक राजनीतिक दल शासन व्यवस्था में व्यापक सुधार नहीं करेंगे। उन्होंने कहा, 'जब तक राजनेता मिलकर देश का सिस्टम ठीक नहीं करेंगे, तब तक फील्ड मार्शल असीम मुनीर की मेहनत का भी कोई स्थायी लाभ नहीं मिलेगा।' उन्होंने यह भी दावा किया कि असीम मुनीर लोकतांत्रिक व्यवस्था को पटरी से उतरने नहीं देना चाहते।
युवा असंतोष पर बढ़ रही चिंता
नकवी का यह बयान तब आया है जब पाकिस्तान आर्थिक संकट, महंगाई, बेरोजगारी और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों, खासकर बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी पीओके में लंबे समय से विरोध प्रदर्शन और अशांति की घटनाएं सामने आती रही हैं। हालाँकि अपने भाषण में नकवी ने बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा का उल्लेख किया, लेकिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और वहां हुई हिंसा पर कोई टिप्पणी नहीं की।बयान के राजनीतिक मायने
पाकिस्तान के गृह मंत्री का यह बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि उन्होंने पहली बार सार्वजनिक मंच से स्वीकार किया कि देश का मौजूदा शासन तंत्र गंभीर संकट में है। साथ ही उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि बेरोजगार और असंतुष्ट युवा बड़ी संख्या में एकजुट हुए तो वे पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। उनके बयान को पाकिस्तान में बढ़ते जन असंतोष, आर्थिक संकट और प्रशासनिक विफलताओं के संदर्भ में देखा जा रहा है।